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बद्रीनाथ दान चोरी मामला: गोदियाल की माँग — विपक्ष नेता की अध्यक्षता में बने सर्वदलीय जांच समिति

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बद्रीनाथ दान चोरी मामला: गोदियाल की माँग — विपक्ष नेता की अध्यक्षता में बने सर्वदलीय जांच समिति

सारांश

बद्रीनाथ मंदिर में दान की कथित चोरी का मामला अब सीधे राजनीतिक टकराव में बदल गया है। कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल ने धामी सरकार की जांच समिति को नकारते हुए सर्वदलीय समिति की माँग रखी है — और अंकिता भंडारी केस का हवाला देकर सरकार पर साक्ष्य छिपाने का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने 8 जुलाई को माँग की कि बद्रीनाथ दान चोरी मामले की जांच विपक्ष के नेता की अध्यक्षता में सर्वदलीय समिति करे।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने सोशल मीडिया पर अनियमितताओं के दावों के बाद एफआईआर दर्ज कराई थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया।
गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की एसआईटी जांच का उदाहरण देते हुए सरकारी समिति पर साक्ष्य छिपाने की आशंका जताई।
यह विवाद अयोध्या राम मंदिर में दान गबन के चल रहे विवाद के बीच सामने आया है।

उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने 8 जुलाई को माँग की कि बद्रीनाथ मंदिर में दान की कथित चोरी की निष्पक्ष जांच के लिए विपक्ष के नेता की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय समिति गठित की जाए। उन्होंने धामी सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय जांच समिति पर सीधे अविश्वास जताया और कहा कि मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ मंदिर, सनातन धर्म के सर्वाधिक पवित्र स्थलों में से एक है। चार धाम यात्रा के दौरान मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के दावे सोशल मीडिया पर सामने आए, जिसके बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में दान के गबन को लेकर भी विवाद चल रहा है।

आरोपों के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने व्यापक जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया और पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की।

गोदियाल का आरोप: जांच पर भरोसा नहीं

गोदियाल ने कहा, 'मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। सरकार वैसी जांच नहीं कर रही जैसी असल में होनी चाहिए।' उन्होंने जोर दिया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में हुई इस घटना ने धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुँचाई है। उनकी माँग है कि जांच समिति के सभी सदस्य भगवान बद्रीनाथ के नाम पर शपथ लें और राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर पारदर्शी तरीके से काम करें।

गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह एसआईटी ने उस मामले में साक्ष्य छिपाए, उसी तरह यह समिति भी काम कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा, 'मुझे इस कमिटी पर कोई भरोसा नहीं है।'

मुख्यमंत्री धामी का रुख

हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यदि मंदिर के दान में कोई गड़बड़ी साबित होती है, तो यह 'गो-हत्या के बराबर पाप' होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा। धामी ने इसे 'अपने माता-पिता की हत्या जैसा महापाप' बताते हुए सख्त कार्रवाई का वादा किया।

राजनीतिक और सामाजिक असर

यह विवाद उत्तराखंड में धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर व्यापक सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि चार धाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं और करोड़ों रुपये का दान चढ़ाते हैं। विपक्ष का तर्क है कि सत्तारूढ़ दल की निगरानी में बनी समिति स्वतंत्र जांच नहीं कर सकती।

आगे क्या होगा

फिलहाल बीकेटीसी की एफआईआर पर पुलिस जांच जारी है और सरकार की उच्च-स्तरीय समिति भी अपना काम कर रही है। कांग्रेस के सर्वदलीय समिति की माँग पर सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मामले में आने वाले दिनों में राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक वैध प्रश्न है — क्या सत्तारूढ़ दल की सरकार द्वारा गठित समिति किसी ऐसे मामले में निष्पक्ष जांच कर सकती है जिसमें उसी सरकार द्वारा नियंत्रित धार्मिक निकाय शामिल हो? अंकिता भंडारी केस का संदर्भ महत्वपूर्ण है — उस मामले में भी जांच की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे थे। बद्रीनाथ जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर वित्तीय अनियमितता का आरोप केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है — और इसीलिए जांच तंत्र की पारदर्शिता पर बहस जरूरी है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बद्रीनाथ मंदिर दान चोरी मामला क्या है?
चार धाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के दावे सोशल मीडिया पर सामने आए, जिसके बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने एफआईआर दर्ज कराई। उत्तराखंड सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति गठित की है।
गणेश गोदियाल की जांच समिति को लेकर क्या माँग है?
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने माँग की है कि मामले की जांच विपक्ष के नेता की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय समिति करे। उनका कहना है कि सरकार द्वारा गठित मौजूदा समिति पर उन्हें कोई भरोसा नहीं है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस मामले पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यदि दान में गड़बड़ी साबित हुई तो यह 'गो-हत्या के बराबर पाप' होगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानून अपना काम करेगा।
गोदियाल ने अंकिता भंडारी केस का जिक्र क्यों किया?
गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की एसआईटी जांच का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि उस मामले में साक्ष्य छिपाए गए थे। उनका तर्क है कि बद्रीनाथ मामले में भी सरकार समर्थित समिति इसी तरह काम कर सकती है।
क्या यह मामला किसी अन्य विवाद से जुड़ा है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में दान के गबन को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। दोनों मामलों में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं।
राष्ट्र प्रेस
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