बद्रीनाथ दान चोरी मामला: गोदियाल की माँग — विपक्ष नेता की अध्यक्षता में बने सर्वदलीय जांच समिति
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने 8 जुलाई को माँग की कि बद्रीनाथ मंदिर में दान की कथित चोरी की निष्पक्ष जांच के लिए विपक्ष के नेता की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय समिति गठित की जाए। उन्होंने धामी सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय जांच समिति पर सीधे अविश्वास जताया और कहा कि मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ मंदिर, सनातन धर्म के सर्वाधिक पवित्र स्थलों में से एक है। चार धाम यात्रा के दौरान मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के दावे सोशल मीडिया पर सामने आए, जिसके बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में दान के गबन को लेकर भी विवाद चल रहा है।
आरोपों के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने व्यापक जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया और पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की।
गोदियाल का आरोप: जांच पर भरोसा नहीं
गोदियाल ने कहा, 'मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। सरकार वैसी जांच नहीं कर रही जैसी असल में होनी चाहिए।' उन्होंने जोर दिया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में हुई इस घटना ने धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुँचाई है। उनकी माँग है कि जांच समिति के सभी सदस्य भगवान बद्रीनाथ के नाम पर शपथ लें और राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर पारदर्शी तरीके से काम करें।
गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह एसआईटी ने उस मामले में साक्ष्य छिपाए, उसी तरह यह समिति भी काम कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा, 'मुझे इस कमिटी पर कोई भरोसा नहीं है।'
मुख्यमंत्री धामी का रुख
हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यदि मंदिर के दान में कोई गड़बड़ी साबित होती है, तो यह 'गो-हत्या के बराबर पाप' होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा। धामी ने इसे 'अपने माता-पिता की हत्या जैसा महापाप' बताते हुए सख्त कार्रवाई का वादा किया।
राजनीतिक और सामाजिक असर
यह विवाद उत्तराखंड में धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर व्यापक सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि चार धाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं और करोड़ों रुपये का दान चढ़ाते हैं। विपक्ष का तर्क है कि सत्तारूढ़ दल की निगरानी में बनी समिति स्वतंत्र जांच नहीं कर सकती।
आगे क्या होगा
फिलहाल बीकेटीसी की एफआईआर पर पुलिस जांच जारी है और सरकार की उच्च-स्तरीय समिति भी अपना काम कर रही है। कांग्रेस के सर्वदलीय समिति की माँग पर सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मामले में आने वाले दिनों में राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है।