बद्रीनाथ दान विवाद: कांग्रेस की माँग — हाई कोर्ट न्यायाधीशों की निगरानी में हो जांच
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड में बद्रीनाथ मंदिर के दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। 8 जुलाई 2026 को देहरादून में बद्रीनाथ विधानसभा के कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला, कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल और धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार पर निष्पक्ष जांच से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए न्यायिक निगरानी में पारदर्शी जांच की माँग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में महज सरकारी जांच पर्याप्त नहीं है।
मुख्य आरोप और माँगें
विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि उन्होंने स्वयं स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों से जानकारी जुटाई। उनके अनुसार, जिस धाम में देश-दुनिया के श्रद्धालु मोक्ष और पितरों के तर्पण के लिए आते हैं, उसी धाम को कथित तौर पर सरकार से जुड़े लोगों द्वारा गिरोह बनाकर लूटने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी छोटे कर्मचारी को दोषी ठहराकर मामले को दबाया नहीं जा सकता।
बुटोला ने दो विकल्प सुझाए — या तो हाई कोर्ट के तीन कार्यरत न्यायाधीशों की निगरानी में जांच समिति गठित हो, या विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों की सर्वदलीय समिति बने। साथ ही उन्होंने माँग की कि 23 अप्रैल से अब तक के सभी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं और पिछले कई वर्षों की संभावित अनियमितताओं की भी व्यापक जांच हो।
पूर्व विवादों का संदर्भ
बुटोला ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले वीआईपी दर्शन, क्यूआर कोड व्यवस्था और केदारनाथ मंदिर के स्वर्ण प्रकरण को लेकर भी विवाद उठ चुके हैं। उनका कहना है कि मंदिरों में मौजूद बहुमूल्य धातुओं और श्रद्धालुओं के चढ़ावे का कोई पारदर्शी ऑडिट अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड के प्रमुख धामों में वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठे हों।
धीरेंद्र प्रताप का हमला
कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से तत्काल इस्तीफे की माँग की। उनका तर्क था कि जिस व्यक्ति पर सवाल उठ रहे हों, उसके रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं — 'दूध की रखवाली बिल्ली नहीं कर सकती।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरे प्रदेश में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रही है और पार्टी की माँग है कि सर्वोच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीशों की देखरेख में स्वतंत्र जांच कराई जाए।
गोदियाल की तुलना और 'जीरो टॉलरेंस' पर सवाल
कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने सरकार की जांच प्रक्रिया को 'लीपापोती' करार दिया। उन्होंने वर्तमान जांच की तुलना अंकिता भंडारी हत्याकांड की एसआईटी जांच से की, जिसमें कथित तौर पर सबूतों को सुरक्षित रखने के बजाय नष्ट करने के आरोप लगे थे। गोदियाल ने माँग की कि सर्वदलीय जांच समिति बनाई जाए, जिसकी अध्यक्षता विपक्ष का कोई वरिष्ठ नेता करे और सभी सदस्य भगवान बद्रीनाथ की शपथ लेकर निष्पक्ष जांच का संकल्प लें।
उन्होंने राज्य सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 'जीरो टॉलरेंस' केवल नारा बनकर रह गया है और मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के स्पष्ट मामलों में भी कठोर कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं हैं। यह मामला आगे और राजनीतिक रूप लेने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है।