योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर प्रहार: राम को काल्पनिक बताने वाले आज आस्था की राजनीति कर रहे
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 जुलाई 2026 को चित्रकूट में ₹951 करोड़ की 124 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हो चुका है और एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे ट्रस्ट को बदनाम करना उचित नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और एसआईटी जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि शिकायत मिलने के तुरंत बाद सरकार ने एसआईटी गठित की। जांच में छह लोग चोरी में संलिप्त पाए गए हैं, जबकि दो अन्य पर साजिश रचने का आरोप है। सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। योगी ने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है, लेकिन इसी आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की साख पर सवाल उठाना न्यायसंगत नहीं है।
विपक्ष पर दोहरे चरित्र का आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की केंद्र सरकार ने अपने कार्यकाल में रामसेतु को तोड़ने का प्रयास किया था और सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल शपथपत्र में भगवान राम को काल्पनिक बताया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राम और कृष्ण काल्पनिक हैं, तो अयोध्या, चित्रकूट, मथुरा, वृंदावन और बरसाना जैसे आस्था के केंद्रों का अस्तित्व कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि जो दल वर्षों तक भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे, वही आज आस्था की राजनीति कर रहे हैं।
सपा पर निशाना: वक्फ, आंबेडकर और परिवारवाद
योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में विकास कार्यों के बजाय कब्रिस्तानों की चारदीवारी पर धन खर्च किया जाता था और ज़मीनें वक्फ के नाम पर दर्ज कराई जाती थीं। उन्होंने कहा कि वक्फ कानून में संशोधन होने पर सपा और कांग्रेस एकजुट होकर विरोध में खड़ी हो गईं। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कन्नौज में डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटाने का काम सपा ने किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया के समय रामायण मेले की परंपरा शुरू हुई थी, लेकिन आज के समाजवादी राम और कृष्ण से दूरी बना चुके हैं।
चित्रकूट का विकास और 2017 से पहले की स्थिति
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले चित्रकूट उपेक्षा, भय और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया था। अब कानून-व्यवस्था में सुधार, पर्यटन विकास और आधारभूत ढाँचे के विस्तार के कारण यह तीर्थनगरी देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। ₹951 करोड़ की 124 परियोजनाओं का लोकार्पण इसी विकास यात्रा की अगली कड़ी है।
समाज को जोड़ने की अपील
मुख्यमंत्री ने जनता से जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बाँटने वाली राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे दलों के पास विकास का कोई दृष्टिकोण नहीं है और उनकी राजनीति केवल परिवारवाद तथा वंशवाद तक सीमित है। आने वाले समय में एसआईटी की जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट विवाद पर सरकार का रुख राजनीतिक परिदृश्य को और आकार देगा।