क्या बद्रीनाथ और केदारनाथ में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगेगी?
सारांश
Key Takeaways
- गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव
- बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों की सुरक्षा
- धार्मिक सहिष्णुता पर प्रभाव
- समिति की बैठक में औपचारिक प्रस्ताव
- जन जागरूकता का महत्व
देहरादून, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में जल्द ही गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीएस) के अनुसार, सदियों पुराने इन मंदिरों में केवल हिंदुओं का ही प्रवेश होगा। यह प्रस्तावित प्रतिबंध समिति द्वारा प्रबंधित सभी मंदिरों पर लागू होगा, जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी शामिल हैं।
बीकेटीएस के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगा दी जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि इस निर्णय को लागू करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
बद्रीनाथ मंदिर सर्दियों में छह महीने बंद रहने के बाद 23 अप्रैल को फिर से खोला जाएगा। केदारनाथ मंदिर के फिर से खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के अवसर पर घोषित की जाएगी।
चार धाम में केदारनाथ और बद्रीनाथ के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री भी शामिल हैं। इन दोनों तीर्थस्थलों के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पर्व के साथ फिर से खुलने वाले हैं।
यह घोषणा उत्तराखंड में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने से संबंधित एक बड़ी बहस के बीच आई है।
हाल ही में हरिद्वार के हर की पौड़ी पर 'गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित' का ऐलान करने वाले पोस्टर दिखाई दिए, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया।
इन पोस्टरों में हर की पौड़ी क्षेत्र को पूरी तरह से 'हिंदू क्षेत्र' बताया गया था, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक पहुंच को लेकर बहस और तेज हो गई।
श्री गंगा सभा द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था, "गैर-हिंदुओं के लिए प्रवेश वर्जित क्षेत्र"। हालांकि, संगठन ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य केवल लोगों को जानकारी देना है।
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस बारे में बातचीत करते हुए कहा, "हर नागरिक के लिए कानून की बुनियादी जानकारी जरूरी है। हाल ही में कुछ घटनाओं के बाद गंगा सभा को लगा कि लोगों को नियमों और विनियमों के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरी है।"
उन्होंने बताया कि इन बैनरों का उद्देश्य लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है ताकि कानून-व्यवस्था मजबूत हो और समाज में शांति और सद्भाव बना रहे।
यह ध्यान देने योग्य है कि हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग लंबे समय से उठ रही है, खासकर अगले वर्ष होने वाले अर्ध कुंभ मेले को देखते हुए।