क्या अयोध्या के संतों ने मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश प्रतिबंधित करने के बीकेटीसी के प्रस्ताव का स्वागत किया?
सारांश
अयोध्या के संतों ने बीकेटीसी के प्रस्ताव का स्वागत किया है, जिसमें बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की बात की गई है। यह निर्णय सही और सभी के हित में माना जा रहा है, क्योंकि भारत में हिंदुओं को भी उनके धार्मिक स्थलों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
मुख्य बातें
अयोध्या, २७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का अयोध्या के संतों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। संतों का कहना है कि यह निर्णय सही और सभी के हित में है।
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने राष्ट्र प्रेस को बताया, "जब हिंदू मक्का और मदीना नहीं जा सकते हैं, और मस्जिदों में नहीं जा सकते, तो तीर्थ स्थलों पर गैर-हिंदुओं का क्या काम? उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बहुत अच्छा निर्णय लिया है और धार्मिक नेताओं ने भी इसका समर्थन किया है।"
उन्होंने कहा कि चार धाम की यात्रा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। जो लोग वंदे मातरम नहीं कह सकते, उन्हें इस पवित्र स्थान पर जाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? जो लोग यहाँ आना चाहते हैं, उन्हें राम नाम का जप करना होगा और हिंदू धर्म अपनाना पड़ेगा। हमें हिंदुओं के प्रति साजिशों को समाप्त करना होगा।
विष्णु दास ने आगे कहा कि मुस्लिम समुदाय का लक्ष्य सनातनियों की आस्था को चोट पहुँचाना है। इसलिए यह निर्णय सही और सभी के लाभ में है।
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दासी ने कहा, "उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई है, जो बहुत सराहनीय है। मैं इस आदेश का पूर्ण समर्थन करता हूँ और सभी हिंदुओं से निवेदन करता हूँ कि जब भी कट्टरपंथी सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश करें, तो सभी तीर्थ स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाई जाए।"
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रदेश के धार्मिक और पौराणिक स्थलों का संचालन करने वाले सभी धार्मिक संगठनों की राय के अनुसार सरकार आगे बढ़ेगी। सभी पौराणिक स्थलों का अध्ययन किया जा रहा है और उसी आधार पर निर्णय लिए जाएंगे।