क्या चारधाम में गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध का वीएचपी ने स्वागत किया?

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क्या चारधाम में गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध का वीएचपी ने स्वागत किया?

सारांश

चारधाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का विवाद बढ़ रहा है। क्या वीएचपी का इस पर स्वागत करना सही है? जानिए इस पर क्या कहते हैं प्रमुख नेता और क्या हैं उनके तर्क।

Key Takeaways

  • चारधाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।
  • वीएचपी ने इस निर्णय का समर्थन किया है।
  • यह कदम धार्मिक पवित्रता की रक्षा के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के चारधाम तीर्थस्थलों, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लागू किए जा रहे प्रतिबंधों को लेकर विवाद बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस निर्णय का स्वागत किया है और यह मांग की है कि भारत के सभी पवित्र हिंदू तीर्थ स्थलों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने एक प्रेस बयान में कहा कि यह कदम धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा के लिए आवश्यक है।

डॉ. जैन ने कहा, "गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के निर्णय का वीएचपी स्वागत करती है। केवल इन तीन स्थानों पर ही नहीं, बल्कि देश के सभी हिंदू तीर्थ स्थलों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए।" उन्होंने अयोध्या में हाल ही में हुई एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां एक जिहादी द्वारा पवित्रता को भंग करने का प्रयास एक अक्षम्य अपराध है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा इस प्रतिबंध का विरोध करने पर डॉ. जैन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मदनी जी सद्भाव की बातें करते हैं, लेकिन विष वमन करते हैं। सद्भाव तब बनेगा, जब वे मक्का में हनुमान चालीसा पढ़ने की हिम्मत दिखाएं। अयोध्या हमारे लिए उतना पवित्र है जितना मक्का उनके लिए। जब मक्का में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश नहीं, तो हमारे तीर्थ स्थलों में कैसे?"

डॉ. जैन ने आरोप लगाया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद हमेशा मुस्लिम समाज में कट्टरता फैला रही है। उन्होंने देवबंद को आतंकवादियों का जन्मस्थान बताते हुए कहा कि जमीयत वहाबी विचारधारा का पोषण करती है।

उन्होंने मंदिरों पर हमले, शोभायात्राओं पर पथराव और महिलाओं पर अत्याचार के उदाहरण देते हुए कहा कि जिहादी तत्वों द्वारा हिंदुओं पर हमले सामान्य हैं, लेकिन मॉब लिंचिंग हिंदुओं का स्वभाव नहीं, जिहादी स्वभाव है। उन्होंने पिछले वर्ष से जुड़ी 187 हिंदुओं की सूची का हवाला दिया, जिन्हें भीड़ ने मारा, और इस वर्ष बाड़मेर के खेताराम भील, भीलवाड़ा के सीताराम, बरेली के तेजाराम और गुजरात के जयंती भाटी जैसे मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही सैकड़ों हिंदुओं की मॉब लिंचिंग की एक सूची जारी की जाएगी।

डॉ. जैन ने कहा कि पूरी दुनिया जिहादी उन्माद से पीड़ित है। अमेरिका, ब्रिटेन में भी सिर तन से जुदा के नारे लगाए जाते हैं, फिर भी सद्भाव की बातें की जाती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जमीयत आतंकवादी घटनाओं के आरोपियों के केस लड़ती है और फिर सद्भाव की बात करती है। उन्होंने कहा, "भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसलिए सभी धर्मों के लोग यहां रह पाते हैं। मुस्लिम देशों में भी आपस में इतना सौहार्द नहीं है, जितना हिंदू रखते हैं। अपनी भावनाओं की कद्र करें, अपमान न करें।"

Point of View

और यहाँ सभी धर्मों को साथ-साथ जीने का अधिकार है। इस मामले में संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

चारधाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश क्यों प्रतिबंधित किया गया है?
यह निर्णय धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा के लिए लिया गया है।
वीएचपी का इस फैसले पर क्या कहना है?
वीएचपी ने इस फैसले का स्वागत किया है और सभी हिंदू तीर्थ स्थलों पर ऐसे ही प्रतिबंध की मांग की है।
क्या यह निर्णय विवादित है?
हाँ, यह निर्णय समाज में विवाद पैदा कर रहा है और विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।
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