28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या बीकेटीसी के फैसले पर इमरान मसूद का आरोप है, 'नफरत का एजेंडा चला रहे हैं'?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या बीकेटीसी के फैसले पर इमरान मसूद का आरोप है, 'नफरत का एजेंडा चला रहे हैं'?

सारांश

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बीकेटीसी के द्वारा बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को नफरत का एजेंडा बताया है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि देश में रोजगार और अर्थव्यवस्था की बात नहीं हो रही है।

मुख्य बातें

बीकेटीसी का निर्णय विवादित है।
इमरान मसूद ने इसे नफरत का एजेंडा कहा है।
धार्मिक स्थलों की पहचान पर सवाल उठते हैं।
रोजगार और अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
शंकराचार्य का अपमान गंभीर मुद्दा है।

सहारनपुर, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बीकेटीसी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की घोषणा पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ये केवल नफरत का एजेंडा चला रहे हैं।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा, 'पहले भी कोई वहां नहीं जाता था। मुसलमान गंगोत्री धाम नहीं जाते थे। यह हिंदुओं का पवित्र स्थल है, और केवल वही लोग वहाँ जाते हैं। ये लोग नफरत का एजेंडा चला रहे हैं। वर्तमान में स्थिति यह हो गई है कि पहले साबित करो कि आप हिंदू हैं, तभी जा सकते हो। शंकराचार्य को भी साबित करना पड़ेगा कि वे शंकराचार्य हैं। वोटर को साबित करना पड़ेगा कि वे वोटर हैं। सब कुछ तमाशा बनाकर रख दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि देश में रोजगार और अर्थव्यवस्था पर बात नहीं हो रही है। मौजूदा सरकार में वर्षों पुरानी मंदिर-मस्जिद-दरगाहें तोड़ी गई हैं। शंकराचार्य ने कहा कि 150 मंदिर तोड़ दिए गए हैं।

यूजीसी के नए नियम को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि अब ये लोग जातियों के आधार पर झगड़े भड़काने का काम करेंगे। इनकी राजनीति ही झगड़ों पर आधारित है। एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान कांग्रेस ने ही लाए थे, लेकिन ये लोग केवल नफरत फैलाते हैं। कितने वाइस चांसलर एससी हैं? कितने दलित चांसलर हैं?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान से नाराज बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर इमरान मसूद ने कहा कि शंकराचार्य का अपमान हुआ है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

ज्ञात हो कि बरेली सिटी मजिस्ट्रेट ने अपना इस्तीफा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि उनका निर्णय आत्म-सम्मान, अंतरात्मा और समाज के प्रति जवाबदेही के मुद्दों पर आधारित है। पत्र में उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का भी उल्लेख किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे समाज में सहिष्णुता और समन्वय के सिद्धांतों को भी चुनौती देता है। एक राष्ट्रीय संपादक के रूप में, यह आवश्यक है कि हम इस मुद्दे को एक बड़े दृष्टिकोण से देखें और यह सुनिश्चित करें कि हमारे देश में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार हों।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बीकेटीसी का निर्णय उचित है?
इस पर विभिन्न दृष्टिकोण हैं। कुछ इसे धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए उचित मानते हैं, जबकि अन्य इसे नफरत का एजेंडा मानते हैं।
इमरान मसूद ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यह केवल नफरत का एजेंडा है और सरकार को रोजगार और अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले