11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने SLP स्वीकार की, गुरमीत राम रहीम को नोटिस जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने SLP स्वीकार की, गुरमीत राम रहीम को नोटिस जारी

सारांश

दो दशक से न्याय की राह देख रहे पत्रकार परिवार को राहत — सर्वोच्च न्यायालय ने राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड में हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार की, जिसने गुरमीत राम रहीम को बरी किया था। नवंबर में सुनवाई तय।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 10 अगस्त 2026 को राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड में दायर स्पेशल लीव पिटीशन स्वीकार की।
तीन जजों की पीठ ने गुरमीत राम रहीम सिंह सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 7 मार्च 2026 को राम रहीम को बरी किया था, जबकि तीन सह-आरोपियों की उम्रकैद बरकरार रखी थी।
पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में चारों आरोपियों को आजीवन कारावास सुनाया था।
मामला नवंबर 2026 में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 10 अगस्त 2026 को राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) स्वीकार कर ली है। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। यह मामला अब नवंबर 2026 में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2002 में सिरसा निवासी पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी थी। इलाज के दौरान 21 नवंबर 2002 को उनकी मृत्यु हो गई। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में गुरमीत राम रहीम सिंह, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट का विवादित फैसला

सजा के विरुद्ध दायर अपील पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 7 मार्च 2026 को अपना फैसला सुनाया, जिसमें गुरमीत राम रहीम सिंह को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया, जबकि तीन अन्य सह-आरोपियों — कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल — की सजा बरकरार रखी गई। इस फैसले से असंतुष्ट होकर मृतक पत्रकार के पुत्र अंशुल प्रजापति ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

अंशुल प्रजापति ने बताया, 'हाई कोर्ट ने मेरे पिता के हत्या के आरोप से गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया है, जबकि 3 सह-आरोपियों की सजा बरकरार रखी है। इसी फैसले के खिलाफ मैंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।' उन्होंने आगे कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने इस मामले को सुना और डेरा प्रमुख राम रहीम सहित अन्य जिम्मेदारों को नोटिस जारी किया है। यह हमारे लिए राहत की बात है।'

अंशुल प्रजापति ने यह भी बताया कि सुनवाई के दौरान राम रहीम के वकीलों ने याचिका का विरोध किया, परंतु सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने उस विरोध को दरकिनार करते हुए अपील स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा, 'अब सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।'

आगे क्या होगा

यह मामला नवंबर 2026 में सर्वोच्च न्यायालय में विस्तृत सुनवाई के लिए निर्धारित है। गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम सिंह पहले से ही एक अन्य मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। यह मुकदमा न्याय की लंबी प्रतीक्षा कर रहे पत्रकार परिवार के लिए एक निर्णायक पड़ाव साबित हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड क्या है?
पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में सिरसा में उनके घर के बाहर गोली मारी गई थी और 21 नवंबर 2002 को उनकी मृत्यु हो गई। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में गुरमीत राम रहीम सिंह समेत चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था?
7 मार्च 2026 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरमीत राम रहीम सिंह को हत्या के आरोप से बरी कर दिया, जबकि तीन सह-आरोपियों — कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल — की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दायर की और क्यों?
राम चंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल प्रजापति ने हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ स्पेशल लीव पिटीशन दायर की, जिसमें गुरमीत राम रहीम को बरी किया गया था। उनका तर्क है कि मुख्य आरोपी को बरी करना और सह-आरोपियों की सजा बरकरार रखना न्यायसंगत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए हैं?
10 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की पीठ ने SLP स्वीकार करते हुए गुरमीत राम रहीम सिंह सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए। राम रहीम के वकीलों के विरोध को दरकिनार कर मामले को नवंबर 2026 में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को नवंबर 2026 में विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। तब तक नोटिस प्राप्त पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले