11 जुलाई 2026
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राम रहीम को 9 साल में 16वीं पैरोल: एसजीपीसी का विरोध, सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप

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राम रहीम को 9 साल में 16वीं पैरोल: एसजीपीसी का विरोध, सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप

सारांश

9 साल में 16वीं पैरोल — एसजीपीसी का कहना है कि यह महज़ संयोग नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ की सुनियोजित कोशिश है। सिख समुदाय में गहरे रोष के बीच सवाल उठ रहा है कि बेअदबी और दुष्कर्म के दोषी को वह सुविधाएँ क्यों, जो आम कैदियों को नसीब नहीं?

मुख्य बातें

गुरमीत राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल से 30 दिन की पैरोल दी गई — 9 वर्षों में यह 16वीं बार है।
एसजीपीसी सदस्य भगवंत सिंह सियालका ने इसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया।
सियालका ने आरोप लगाया कि राम रहीम के मामले फरीदकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित करना सुनियोजित रणनीति थी और आम कैदियों वाले नियम उस पर लागू नहीं किए जा रहे।
चुनावों के दौरान पैरोल मिलने का पैटर्न राजनीतिक लाभ की मंशा की ओर इशारा करता है — यह आरोप एसजीपीसी का है।
बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बैठक हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं आया।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल से एक बार फिर 30 दिन की पैरोल दी गई है — यह 9 वर्षों में उसकी 16वीं बार जेल से बाहर आने का मौका है। दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए राम रहीम को मिलती इन बार-बार की छूटों पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और हरियाणा सरकार तथा केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

एसजीपीसी की आपत्ति और सिख समुदाय का रोष

एसजीपीसी सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भगवंत सिंह सियालका ने इस निर्णय को सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का नाम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामलों में सामने आया हो और जो हत्या व दुष्कर्म जैसे संगीन अपराधों में सज़ा काट रहा हो, उसे बार-बार पैरोल देना सरकारों की मंशा पर गहरा संदेह पैदा करता है। सियालका के अनुसार, इस फैसले से सिख समुदाय में व्यापक रोष है।

बेअदबी मामलों से जुड़े आरोप और विशेष सुविधाओं पर सवाल

सियालका ने आरोप लगाया कि राम रहीम और उसके डेरे से जुड़े कई लोगों के नाम बेअदबी के मामलों में सामने आए थे, फिर भी सरकार उसे विशेष सुविधाएँ प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने पहले अकाली दल के विरुद्ध माहौल बनाया, लेकिन अब वही दल राम रहीम के मामले में नरमी बरतते दिखाई दे रहे हैं।

सियालका ने यह भी आरोप लगाया कि राम रहीम से जुड़े मामलों को फरीदकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित करना एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था। उनके अनुसार, इस मामले में विशेष कानूनी प्रावधान किए गए और सज़ा से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया — आम कैदियों पर लागू होने वाले नियम राम रहीम पर लागू नहीं किए जा रहे।

चुनावों और पैरोल का कथित संबंध

सियालका ने दावा किया कि देश में जब भी चुनाव होते हैं, उसी दौरान राम रहीम को पैरोल दिए जाने की घटनाएँ सामने आती हैं, जिससे राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने इसे सरकारों का 'दोहरे मापदंड' वाला रवैया बताते हुए कहा कि एक ओर सज़ा पूरी कर चुके लोगों को भी रिहा नहीं किया जाता, जबकि दूसरी ओर गंभीर मामलों में दोषी व्यक्तियों को लगातार पैरोल दी जा रही है।

हरियाणा गुरुद्वारा कमेटी और मनोहर लाल पर निशाना

एसजीपीसी सदस्य ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने सिख मामलों में हस्तक्षेप करते हुए अलग हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन किया, जबकि पहले एसजीपीसी हरियाणा के गुरुद्वारों, स्कूलों और कॉलेजों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की सहायता देती थी।

बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई और गृह मंत्री से बैठक

सियालका ने बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई का मुद्दा भी उठाया और कहा कि एसजीपीसी लगातार उनके हक में संघर्ष कर रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। यह मामला सिख समुदाय और सरकार के बीच बढ़ती खाई का प्रतीक बनता जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरमीत राम रहीम को कितनी बार पैरोल मिल चुकी है?
गुरमीत राम रहीम को 9 वर्षों में यह 16वीं बार पैरोल दी गई है। इस बार उसे 30 दिन की पैरोल मिली है और वह रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में सज़ा काट रहा है।
एसजीपीसी ने राम रहीम की पैरोल का विरोध क्यों किया?
एसजीपीसी का कहना है कि राम रहीम का नाम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामलों में सामने आया है और वह हत्या व दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में दोषी है। ऐसे व्यक्ति को बार-बार पैरोल देना सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है और सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करता है।
क्या राम रहीम की पैरोल का चुनावों से कोई संबंध है?
एसजीपीसी सदस्य भगवंत सिंह सियालका ने दावा किया है कि देश में चुनावों के दौरान ही राम रहीम को पैरोल दिए जाने की घटनाएँ सामने आती हैं। यह आरोप है कि इससे राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जाती है, हालाँकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बलवंत सिंह राजोआणा का मामला इससे कैसे जुड़ा है?
एसजीपीसी ने बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई की माँग उठाते हुए कहा है कि सज़ा पूरी कर चुके लोगों को रिहा नहीं किया जाता, जबकि गंभीर मामलों के दोषी को बार-बार पैरोल मिल रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस विषय पर बैठक हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं आया।
हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन पर एसजीपीसी की क्या आपत्ति है?
एसजीपीसी का कहना है कि हरियाणा सरकार ने सिख मामलों में हस्तक्षेप करते हुए अलग हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाई, जबकि पहले एसजीपीसी हरियाणा के गुरुद्वारों, स्कूलों और कॉलेजों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की सहायता देती थी। यह कदम सिख धार्मिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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