25 अगस्त 2026
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गुरमीत राम रहीम को 17वीं बार पैरोल, रोहतक जेल से 21 दिन के लिए रिहाई

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गुरमीत राम रहीम को 17वीं बार पैरोल, रोहतक जेल से 21 दिन के लिए रिहाई

सारांश

दुष्कर्म के दोषी डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 17वीं बार पैरोल मिली है — इस बार 21 दिन के लिए। बार-बार पैरोल पर विपक्ष के सवाल जारी हैं, और सर्वोच्च न्यायालय में छत्रपति हत्याकांड की सुनवाई नवंबर में होनी है।

मुख्य बातें

गुरमीत राम रहीम को 25 अगस्त 2026 को 21 दिन की पैरोल मंजूर की गई — यह उसकी 17वीं पैरोल रिहाई है।
राम रहीम दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सज़ा काट रहा है।
इससे पहले 26 मई को 30 दिन और जनवरी 2026 में 40 दिन की पैरोल मिली थी।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी किए जाने के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय ने 10 अगस्त को नोटिस जारी किया।
मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 25 अगस्त 2026 को एक बार फिर पैरोल दे दी गई है। रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सज़ा काट रहे राम रहीम को इस बार 21 दिन की पैरोल मंजूर की गई है। रिहाई के बाद वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय पहुँचेगा। यह उसकी 17वीं पैरोल रिहाई है।

पैरोल का क्रम और पृष्ठभूमि

राम रहीम को इससे पहले 26 मई को 30 दिन की पैरोल मिली थी। इसी वर्ष जनवरी में उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी, जिसके बाद वह 15 फरवरी को वापस सुनारिया जेल लौटा था। इससे पहले 15 सितंबर 2025 को भी उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम को दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 10-10 साल यानी कुल 20 साल की सज़ा सुनाई थी।

प्रशासन का पक्ष और विवाद

हरियाणा प्रशासन का कहना है कि पैरोल नियमों के तहत दी जाती है और इसमें कोई असाधारण रियायत नहीं है। हालाँकि, विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने बार-बार पैरोल मिलने पर लगातार आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि उम्रकैद की सज़ा काट रहे किसी दोषी को इतनी बार और इतने लंबे समय के लिए पैरोल देना न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है।

पैरोल के दौरान ठिकाना

पिछली अधिकांश पैरोल रिहाइयों के दौरान राम रहीम उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित डेरा सच्चा सौदा के आश्रम में रहा। सिरसा में मुख्यालय वाले इस संगठन के हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य उत्तरी राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं।

सुप्रीम कोर्ट में नया मोड़

इस बीच, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बरी किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने 10 अगस्त को नोटिस जारी किया था। अदालत ने राम रहीम और सीबीआई दोनों से जवाब माँगा है। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के बरी करने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। इस मामले की सुनवाई 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होनी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ स्वयं अपील दाखिल नहीं की है।

आगे क्या होगा

21 दिन की पैरोल समाप्त होने के बाद राम रहीम को पुनः सुनारिया जेल लौटना होगा। सर्वोच्च न्यायालय में छत्रपति हत्याकांड की सुनवाई और बार-बार पैरोल को लेकर उठते सवाल — दोनों मिलकर इस मामले को आने वाले महीनों में और अधिक कानूनी और राजनीतिक ध्यान का केंद्र बना सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन नियमों की व्याख्या और उनके चयनात्मक अनुप्रयोग पर स्वतंत्र समीक्षा की ज़रूरत है। सर्वोच्च न्यायालय में छत्रपति हत्याकांड की लंबित सुनवाई इस पूरे प्रकरण को और जटिल बनाती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरमीत राम रहीम को इस बार कितने दिन की पैरोल मिली है?
राम रहीम को 25 अगस्त 2026 को 21 दिन की पैरोल मंजूर की गई है। यह उसकी 17वीं पैरोल रिहाई है और जेल से निकलकर वह सिरसा जाएगा।
गुरमीत राम रहीम को किस मामले में सज़ा हुई है?
सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम को दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 10-10 साल यानी कुल 20 साल की सज़ा सुनाई थी। वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।
राम रहीम को पहले कब-कब पैरोल मिली थी?
इससे पहले 26 मई को 30 दिन, जनवरी 2026 में 40 दिन और 15 सितंबर 2025 को 40 दिन की पैरोल मिली थी। कुल मिलाकर यह उसकी 17वीं पैरोल रिहाई है।
सुप्रीम कोर्ट में राम रहीम से जुड़ा कौन-सा मामला चल रहा है?
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा राम रहीम को बरी किए जाने के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। अदालत ने 10 अगस्त को नोटिस जारी कर राम रहीम और सीबीआई से जवाब माँगा है और सुनवाई 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
बार-बार पैरोल मिलने पर विवाद क्यों है?
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि उम्रकैद की सज़ा काट रहे दोषी को इतनी बार और लंबी अवधि की पैरोल देना न्याय की भावना के विरुद्ध है। हरियाणा प्रशासन का कहना है कि पैरोल नियमों के तहत दी जाती है, लेकिन इन नियमों की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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