चारधाम यात्रा 2025: 19 दिनों में 7.72 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 29 की मौत

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चारधाम यात्रा 2025: 19 दिनों में 7.72 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 29 की मौत

सारांश

चारधाम यात्रा 2025 के महज 19 दिनों में 7.72 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं — केदारनाथ अकेले 3.45 लाख के साथ शीर्ष पर है। लेकिन उत्साह के साथ-साथ चिंता भी है: स्वास्थ्य कारणों से 29 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है, जो ऊँचाई पर यात्रा के खतरों की याद दिलाता है।

मुख्य बातें

7 लाख 72 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने 19 दिनों में चारधाम में दर्शन किए।
केदारनाथ धाम में सर्वाधिक 3 लाख 45 हजार श्रद्धालु पहुँचे।
बद्रीनाथ में 1 लाख 85 हजार , यमुनोत्री में 1 लाख 16 हजार और गंगोत्री में 1 लाख 15 हजार से अधिक श्रद्धालु आए।
स्वास्थ्य कारणों से यात्रा में अब तक 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है।
यात्रा 19 अप्रैल 2025 को यमुनोत्री-गंगोत्री से शुरू हुई; केदारनाथ 22 अप्रैल और बद्रीनाथ 23 अप्रैल को खुले।

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2025 जोर-शोर से जारी है। 19 अप्रैल 2025 को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने के साथ शुरू हुई इस पवित्र यात्रा में 7 मई 2025 तक 7 लाख 72 हजार से अधिक श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं। हालाँकि, यात्रा की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अब तक 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है।

धाम-वार श्रद्धालुओं की संख्या

यात्रा शुरू होने के 19 दिनों के भीतर केदारनाथ धाम में सर्वाधिक 3 लाख 45 हजार श्रद्धालु पहुँचे हैं, जो चारों धामों में सबसे अधिक है। बद्रीनाथ धाम में 1 लाख 85 हजार के करीब श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। यमुनोत्री में तकरीबन 1 लाख 16 हजार और गंगोत्री में 1 लाख 15 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुँचे हैं। श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

यात्रा की शुरुआत और परंपरा

इस वर्ष चारधाम यात्रा 19 अप्रैल 2025 को यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों के कपाट खुलने के साथ आरंभ हुई। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। परंपरागत रूप से यह यात्रा पश्चिम से पूर्व की दिशा में — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ — के क्रम में की जाती है।

यात्रा का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है। यह यात्रा हिमालय की ऊँचाइयों पर बसे चार प्रमुख तीर्थस्थलों — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — से होकर गुजरती है। मान्यताओं के अनुसार 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से इस तीर्थयात्रा को लोकप्रिय बनाया था। आस्था है कि इस यात्रा से व्यक्ति को आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यात्रा में चुनौतियाँ और सावधानियाँ

यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि के बावजूद, ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह यात्रा स्वास्थ्य की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। स्वास्थ्य कारणों से अब तक 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से यात्रा पर निकलने से पहले स्वास्थ्य जाँच कराने और उचित तैयारी के साथ आने की अपील की है। आने वाले हफ्तों में यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 29 मौतें एक गंभीर संकेत हैं जिसे महज आँकड़े में नहीं समेटा जाना चाहिए। हर साल चारधाम में भीड़ बढ़ती है, पर स्वास्थ्य अवसंरचना और आपातकालीन सेवाएँ उसी अनुपात में नहीं बढ़तीं। ऊँचाई पर स्थित इन धामों तक पहुँचने से पहले अनिवार्य स्वास्थ्य जाँच और क्षमता-आधारित प्रवेश प्रणाली पर गंभीरता से विचार होना चाहिए — वरना श्रद्धा का यह सफर कुछ परिवारों के लिए अंतिम सफर बनता रहेगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चारधाम यात्रा 2025 में अब तक कितने श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं?
7 मई 2025 तक चारधाम यात्रा में 7 लाख 72 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इनमें केदारनाथ में 3 लाख 45 हजार, बद्रीनाथ में 1 लाख 85 हजार, यमुनोत्री में 1 लाख 16 हजार और गंगोत्री में 1 लाख 15 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं।
चारधाम यात्रा 2025 कब शुरू हुई?
चारधाम यात्रा 2025 की शुरुआत 19 अप्रैल 2025 को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने के साथ हुई। केदारनाथ धाम 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
चारधाम यात्रा 2025 में कितने श्रद्धालुओं की मौत हुई है?
7 मई 2025 तक चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य कारणों से 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।
चारधाम यात्रा का धार्मिक महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है। मान्यता है कि 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की इस यात्रा को हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए लोकप्रिय बनाया था।
चारधाम यात्रा किस क्रम में की जाती है?
परंपरागत रूप से चारधाम यात्रा पश्चिम से पूर्व की दिशा में की जाती है — पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ के दर्शन किए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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