पीएम-दक्ष योजना: 2020-21 से 2023-24 के बीच 1.87 लाख+ SC, OBC व EWS उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष) योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS), विमुक्त जनजातियों और सफाई कर्मचारियों समेत 1.87 लाख से अधिक उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इनमें से 96,162 उम्मीदवारों को नौकरियों के लिए प्लेसमेंट ऑफर दिए गए। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को जारी फैक्टशीट में यह जानकारी सामने आई है।
योजना के प्रमुख परिणाम
मंत्रालय की फैक्टशीट के अनुसार, पीएम-दक्ष के मूल्यांकन अध्ययन में योजना को प्रासंगिकता और प्रशिक्षण प्रभावशीलता के लिहाज़ से उल्लेखनीय सफल पाया गया। 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने बताया कि प्रशिक्षण उनके करियर लक्ष्यों, स्थानीय श्रम बाज़ार की ज़रूरतों और निर्धारित सीखने के परिणामों के अनुरूप था। गौरतलब है कि ये आँकड़े स्व-रिपोर्टेड हैं और मंत्रालय के मूल्यांकन पर आधारित हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
फैक्टशीट में बताया गया कि योजना के प्रभावों में महज़ आर्थिक लाभ ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान में सुधार जैसे महत्वपूर्ण गैर-आर्थिक लाभ भी शामिल हैं। ये लाभ विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों के बीच अधिक स्पष्ट रूप से दर्ज किए गए। अधिकांश लाभार्थी प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल का उपयोग जारी रखे हुए हैं और दीर्घकालिक आय वृद्धि की उम्मीद रखते हैं।
बजट और व्यय
वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान पीएम-दक्ष योजना के लिए कुल ₹276.47 करोड़ आवंटित किए गए थे, जबकि इस अवधि में ₹309.5 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं — यानी आवंटन से अधिक व्यय हुआ। योजना को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (DOSJSE) के अंतर्गत तीन निगमों — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) — के माध्यम से लागू किया गया।
प्रशिक्षण और रोज़गार की अनिवार्यता
योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संस्थानों के लिए कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोज़गार उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इस लक्ष्य को पूरा न करने पर प्रशिक्षण लागत की 30 प्रतिशत राशि के बराबर तीसरी किस्त जब्त कर ली जाती है। इसके अलावा, प्रशिक्षण संस्थानों के लिए संबंधित उद्योगों के साथ सहयोग बनाए रखना भी अनिवार्य है।
पीएमकेवीवाई में विलय और आगे की राह
फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 से पीएम-दक्ष योजना को कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में विलय कर दिया गया। दोनों योजनाओं में स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पोर्टल पर जॉब रोल्स का दोहराव होने के कारण यह निर्णय लिया गया। यह विलय केंद्र सरकार के कौशल विकास कार्यक्रमों को एकीकृत और सुव्यवस्थित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।