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पीएम-दक्ष योजना: 2020-21 से 2023-24 के बीच 1.87 लाख+ SC, OBC व EWS उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण

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पीएम-दक्ष योजना: 2020-21 से 2023-24 के बीच 1.87 लाख+ SC, OBC व EWS उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण

सारांश

पीएम-दक्ष योजना ने चार वर्षों में SC, OBC और EWS वर्गों के 1.87 लाख से अधिक युवाओं को कौशल दिया और 96,162 को प्लेसमेंट ऑफर मिले। ₹309.5 करोड़ खर्च के बाद योजना को 2024-25 से PMKVY में विलय कर दिया गया — वंचित वर्गों के लिए कौशल कार्यक्रमों के एकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम।

मुख्य बातें

पीएम-दक्ष योजना के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच 1.87 लाख+ SC, OBC, EWS और सफाई कर्मचारी उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण मिला।
96,162 उम्मीदवारों को प्लेसमेंट ऑफर दिए गए।
90%+ लाभार्थियों ने प्रशिक्षण को करियर लक्ष्यों और स्थानीय श्रम बाज़ार के अनुरूप बताया।
योजना पर कुल ₹309.5 करोड़ खर्च हुए, जबकि आवंटन ₹276.47 करोड़ था।
प्रशिक्षण संस्थानों के लिए 70% प्लेसमेंट अनिवार्य; विफलता पर तीसरी किस्त का 30% जब्त।
वित्त वर्ष 2024-25 से पीएम-दक्ष को PMKVY में विलय कर दिया गया।

प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष) योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS), विमुक्त जनजातियों और सफाई कर्मचारियों समेत 1.87 लाख से अधिक उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इनमें से 96,162 उम्मीदवारों को नौकरियों के लिए प्लेसमेंट ऑफर दिए गए। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को जारी फैक्टशीट में यह जानकारी सामने आई है।

योजना के प्रमुख परिणाम

मंत्रालय की फैक्टशीट के अनुसार, पीएम-दक्ष के मूल्यांकन अध्ययन में योजना को प्रासंगिकता और प्रशिक्षण प्रभावशीलता के लिहाज़ से उल्लेखनीय सफल पाया गया। 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने बताया कि प्रशिक्षण उनके करियर लक्ष्यों, स्थानीय श्रम बाज़ार की ज़रूरतों और निर्धारित सीखने के परिणामों के अनुरूप था। गौरतलब है कि ये आँकड़े स्व-रिपोर्टेड हैं और मंत्रालय के मूल्यांकन पर आधारित हैं।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

फैक्टशीट में बताया गया कि योजना के प्रभावों में महज़ आर्थिक लाभ ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान में सुधार जैसे महत्वपूर्ण गैर-आर्थिक लाभ भी शामिल हैं। ये लाभ विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों के बीच अधिक स्पष्ट रूप से दर्ज किए गए। अधिकांश लाभार्थी प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल का उपयोग जारी रखे हुए हैं और दीर्घकालिक आय वृद्धि की उम्मीद रखते हैं।

बजट और व्यय

वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान पीएम-दक्ष योजना के लिए कुल ₹276.47 करोड़ आवंटित किए गए थे, जबकि इस अवधि में ₹309.5 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं — यानी आवंटन से अधिक व्यय हुआ। योजना को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (DOSJSE) के अंतर्गत तीन निगमों — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) — के माध्यम से लागू किया गया।

प्रशिक्षण और रोज़गार की अनिवार्यता

योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संस्थानों के लिए कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोज़गार उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इस लक्ष्य को पूरा न करने पर प्रशिक्षण लागत की 30 प्रतिशत राशि के बराबर तीसरी किस्त जब्त कर ली जाती है। इसके अलावा, प्रशिक्षण संस्थानों के लिए संबंधित उद्योगों के साथ सहयोग बनाए रखना भी अनिवार्य है।

पीएमकेवीवाई में विलय और आगे की राह

फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 से पीएम-दक्ष योजना को कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में विलय कर दिया गया। दोनों योजनाओं में स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पोर्टल पर जॉब रोल्स का दोहराव होने के कारण यह निर्णय लिया गया। यह विलय केंद्र सरकार के कौशल विकास कार्यक्रमों को एकीकृत और सुव्यवस्थित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 1.87 लाख प्रशिक्षित उम्मीदवारों में से केवल 96,162 को प्लेसमेंट ऑफर मिले — यानी प्रशिक्षितों के आधे से भी कम को रोज़गार के अवसर मिले, और 'ऑफर' का 'नियुक्ति' से अंतर फैक्टशीट में स्पष्ट नहीं किया गया है। ₹309.5 करोड़ का आवंटन से अधिक व्यय वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े करता है। योजना का PMKVY में विलय दोहराव खत्म करने की दिशा में तर्कसंगत कदम है, पर यह यह भी संकेत देता है कि अलग-अलग मंत्रालयों में समानांतर योजनाओं की परंपरागत समस्या बनी हुई है — जिसे नीति निर्माता अक्सर तभी सुधारते हैं जब नुकसान हो चुका हो।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-दक्ष योजना क्या है?
पीएम-दक्ष (प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही) योजना केंद्र सरकार की एक कौशल विकास पहल है, जिसे वित्त वर्ष 2020-21 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य SC, OBC, EWS, विमुक्त जनजातियों और सफाई कर्मचारियों को सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण देकर स्वरोज़गार और वेतन आधारित रोज़गार को बढ़ावा देना था।
पीएम-दक्ष योजना के तहत कितने लोगों को प्रशिक्षण मिला?
वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान 1.87 लाख से अधिक उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 96,162 उम्मीदवारों को नौकरियों के लिए प्लेसमेंट ऑफर प्रदान किए गए।
पीएम-दक्ष योजना पर कितना खर्च हुआ?
वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच योजना के लिए ₹276.47 करोड़ आवंटित किए गए थे, जबकि वास्तविक व्यय ₹309.5 करोड़ रहा — यानी आवंटित बजट से अधिक राशि खर्च की गई।
पीएम-दक्ष योजना को PMKVY में क्यों विलय किया गया?
वित्त वर्ष 2024-25 से पीएम-दक्ष योजना को PMKVY में विलय किया गया क्योंकि दोनों योजनाओं में स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पोर्टल पर जॉब रोल्स का दोहराव हो रहा था। दोहराव से बचने और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को एकीकृत करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया।
पीएम-दक्ष योजना में प्लेसमेंट के लिए क्या नियम थे?
योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण संस्थानों के लिए कम से कम 70% प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोज़गार दिलाना अनिवार्य था। इस लक्ष्य को पूरा न करने पर प्रशिक्षण लागत की 30% राशि के बराबर तीसरी किस्त जब्त करने का प्रावधान था।
राष्ट्र प्रेस
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