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पीएम मोदी की ₹7,395 करोड़ की 'विकसित ग्राम स्वराज योजना' को मंजूरी, 32 लाख पंचायत प्रतिनिधि होंगे लाभान्वित

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पीएम मोदी की ₹7,395 करोड़ की 'विकसित ग्राम स्वराज योजना' को मंजूरी, 32 लाख पंचायत प्रतिनिधि होंगे लाभान्वित

सारांश

मोदी सरकार ने ग्रामीण शासन को डिजिटल और भागीदारी-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ₹7,395.55 करोड़ की PMVGSY को 2030-31 तक की मंज़ूरी मिली, जिससे 32 लाख पंचायत प्रतिनिधि और 1 करोड़ नागरिक प्रति अभियान लाभान्वित होंगे — यह 'विकसित भारत' के ग्रामीण आधार को मज़बूत करने की सुनियोजित कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PMVGSY) को ₹7,395.55 करोड़ के परिव्यय के साथ मंज़ूरी दी।
योजना 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी और सोलहवें वित्त आयोग के कार्यकाल के साथ समाप्त होगी।
केंद्र का अंशदान ₹4,869.48 करोड़ और राज्यों का ₹2,526.07 करोड़ है।
लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि व पंचायत पदाधिकारी और 25 लाख से अधिक पंचायतें प्रत्यक्ष लाभार्थी होंगी।
प्रतिवर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर तैयार की जाएंगी।
प्रत्येक जागरूकता अभियान से कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँचने का लक्ष्य।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PMVGSY) को ₹7,395.55 करोड़ के परिव्यय के साथ 2026-27 से 2030-31 तक लागू करने की स्वीकृति दी। इस निर्णय के साथ मोदी ने कहा कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और पंचायतों के सशक्तिकरण के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

योजना की संरचना और वित्तीय विभाजन

आधिकारिक बयान के अनुसार, योजना की कुल लागत में केंद्र सरकार का अंशदान ₹4,869.48 करोड़ और राज्य सरकारों का अंशदान ₹2,526.07 करोड़ है। यह योजना सोलहवें वित्त आयोग के कार्यकाल के साथ समाप्त होगी। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत कोई स्थायी पद सृजित नहीं किए जाएंगे; आवश्यकतानुसार राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर संविदात्मक मानव संसाधनों की नियुक्ति का प्रावधान है।

लाभार्थी और प्रत्यक्ष प्रभाव

योजना से लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और अन्य हितधारक — 25 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों में — प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। प्रत्येक समन्वित जागरूकता अभियान के माध्यम से कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

यह योजना ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर प्रतिवर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी में सहायता करेगी। सहभागी और साक्ष्य-आधारित नियोजन के ज़रिए ग्राम प्राथमिकताओं, केंद्रीय और राज्य विभागों के हस्तक्षेप तथा उपलब्ध संसाधनों को एक डिजिटल मंच पर समेकित किया जाएगा।

पारदर्शिता और डिजिटल जवाबदेही

योजना के तहत प्रतिवर्ष कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन लेखापरीक्षा योजनाएँ तैयार की जाएंगी और ऑडिट ऑनलाइन के माध्यम से संबंधित लेखापरीक्षाएँ समय पर पूरी की जाएंगी। बेहतर ऑनलाइन लेखांकन, सार्वजनिक प्रकटीकरण और स्वयं के स्रोतों से राजस्व जुटाने की क्षमता विकसित कर पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर ज़ोर दिया गया है।

गौरतलब है कि मौजूदा डिजिटल और जनसंपर्क मंचों, ग्राम सभाओं तथा अन्य पंचायत मंचों का उपयोग करते हुए सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय पहलों के स्थानीय प्रभावों पर सूचित चर्चा को प्रोत्साहित किया जाएगा।

भौगोलिक विस्तार और समावेशिता

यह योजना उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी जहाँ ग्रामीण स्थानीय सरकार की संस्थाएँ हैं — इसमें संविधान के भाग नौ के दायरे से बाहर के वे क्षेत्र भी शामिल हैं जहाँ पारंपरिक स्थानीय निकाय मौजूद हैं। यह समावेशी दृष्टिकोण पूर्वोत्तर और जनजातीय क्षेत्रों की ग्रामीण संस्थाओं को भी योजना की परिधि में लाता है।

पीएम मोदी का बयान और आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस योजना से स्थानीय संसाधनों, क्षमताओं और चुनौतियों के अनुरूप योजनाएँ तैयार की जा सकेंगी और जनभागीदारी को बल मिलेगा, जिससे सतत विकास के लक्ष्यों को तेज़ी से हासिल किया जा सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर ग्रामीण शासन को मज़बूत करने पर केंद्रित है। अब नज़रें इस बात पर होंगी कि राज्य स्तर पर क्रियान्वयन तंत्र कितनी तेज़ी से खड़ा होता है और पंचायतें डिजिटल मंचों का कितने प्रभावी ढंग से उपयोग कर पाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल परीक्षा ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के ज़मीनी उपयोग में होगी — जहाँ डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी बड़ी बाधा हैं। 32 लाख प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन संविदात्मक मानव संसाधनों पर निर्भरता से कार्यान्वयन की निरंतरता पर सवाल उठता है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता तब तक सीमित रहेगी जब तक स्थानीय राजस्व संग्रह की संस्थागत क्षमता नहीं बढ़ती — जो अब तक अनेक ग्रामीण निकायों के लिए एक कमज़ोर कड़ी रही है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PMVGSY) क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को मंज़ूर की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य पंचायतों की शासन क्षमता, डिजिटल जवाबदेही और सहभागी नियोजन को मज़बूत करना है। यह 2026-27 से 2030-31 तक ₹7,395.55 करोड़ के परिव्यय से लागू होगी।
इस योजना से किसे फायदा होगा?
लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और अन्य हितधारक इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी होंगे। इसके अलावा प्रत्येक जागरूकता अभियान के ज़रिए कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँचने का लक्ष्य है।
केंद्र और राज्यों के बीच योजना की लागत कैसे बँटेगी?
कुल ₹7,395.55 करोड़ में से केंद्र सरकार ₹4,869.48 करोड़ और राज्य सरकारें ₹2,526.07 करोड़ का वहन करेंगी। यह योजना सोलहवें वित्त आयोग के कार्यकाल तक चलेगी।
ई-ग्रामस्वराज पोर्टल की इस योजना में क्या भूमिका है?
ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर प्रतिवर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ तैयार की जाएंगी। साथ ही 2.55 लाख ऑनलाइन लेखापरीक्षा योजनाएँ बनाई जाएंगी और ऑनलाइन माध्यम से लेखापरीक्षाएँ समय पर पूरी की जाएंगी।
क्या यह योजना उन क्षेत्रों में भी लागू होगी जहाँ पंचायतें नहीं हैं?
हाँ, यह योजना उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी जहाँ ग्रामीण स्थानीय सरकार की संस्थाएँ हैं। इसमें संविधान के भाग नौ के दायरे से बाहर के वे क्षेत्र भी शामिल हैं जहाँ पारंपरिक स्थानीय निकाय मौजूद हैं।
राष्ट्र प्रेस
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