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पीएम-वीबीआरवाई के पहले वर्ष में 72 लाख से अधिक को मिला औपचारिक रोजगार, ₹99,446 करोड़ की योजना

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पीएम-वीबीआरवाई के पहले वर्ष में 72 लाख से अधिक को मिला औपचारिक रोजगार, ₹99,446 करोड़ की योजना

सारांश

पीएम-वीबीआरवाई के पहले वर्ष में 72 लाख से अधिक पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी औपचारिक कार्यबल से जुड़े — जिनमें 30% महिलाएँ हैं। ₹99,446 करोड़ की यह योजना ईपीएफओ पंजीकरण और डीबीटी के ज़रिए भारत के असंगठित श्रम बाज़ार को संगठित करने का सबसे बड़ा प्रयास है।

मुख्य बातें

पीएम-वीबीआरवाई के पहले वर्ष में 72 लाख से अधिक पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी औपचारिक कार्यबल से जुड़े।
लाभार्थियों में करीब 30 प्रतिशत महिलाएँ ; 15 लाख से अधिक को प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है।
योजना का कुल बजट ₹99,446 करोड़ ; अवधि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक।
समग्र लक्ष्य 3.5 करोड़ लोगों को रोजगार, जिनमें 1.92 करोड़ पहली बार नौकरी पाने वाले।
पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को अधिकतम ₹15,000 एकमुश्त प्रोत्साहन; नियोक्ताओं को 2 वर्षों तक प्रति माह ₹3,000 तक।
विनिर्माण क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन अवधि तीसरे और चौथे वर्ष तक विस्तारित।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के लागू होने के पहले ही वर्ष में 72 लाख से अधिक पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी औपचारिक कार्यबल से जुड़ चुके हैं। 1 अगस्त 2026 को जारी एक आधिकारिक सरकारी बयान के अनुसार, यह योजना सामाजिक सुरक्षा का दायरा विस्तृत करने के साथ-साथ नियोक्ताओं को नए रोजगार सृजित करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।

मुख्य उपलब्धियाँ

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, योजना के लाभार्थियों में करीब 30 प्रतिशत महिलाएँ हैं — जो श्रम बाज़ार में लैंगिक समावेश की दिशा में एक उल्लेखनीय संकेत है। इसके अतिरिक्त, 15 लाख से अधिक लाभार्थियों को रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन राशि पहले ही हस्तांतरित की जा चुकी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकरण और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से रोजगार को जोड़कर यह योजना देश के संगठित श्रम बाज़ार को सुदृढ़ बना रही है।

योजना की संरचना और बजट

यह योजना अगस्त 2025 में घोषित की गई थी और 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक लागू रहेगी। इसके लिए सरकार ने ₹99,446 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है। योजना का समग्र लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिनमें 1.92 करोड़ पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी शामिल हैं।

पीएम-वीबीआरवाई दो हिस्सों वाली प्रोत्साहन व्यवस्था पर आधारित है। प्रति माह ₹1 लाख तक वेतन पाने वाले पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को उनके एक महीने के ईपीएफ वेतन के बराबर, अधिकतम ₹15,000 तक का एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाता है। यह राशि दो किस्तों में जारी होती है — पहली किस्त 6 महीने की सेवा पूरी होने पर और दूसरी किस्त 12 महीने की निरंतर सेवा तथा वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने के बाद।

नियोक्ताओं के लिए प्रावधान

नियोक्ताओं को प्रत्येक पात्र अतिरिक्त कर्मचारी के लिए — जिसे कम से कम छह महीने तक नौकरी पर रखा जाए — दो वर्षों तक प्रति माह ₹3,000 तक का प्रोत्साहन मिलता है। इससे कंपनियों की भर्ती लागत घटती है और दीर्घकालिक रोजगार को बढ़ावा मिलता है। विनिर्माण क्षेत्र की विशेष रोजगार क्षमता को देखते हुए इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन अवधि को तीसरे और चौथे वर्ष तक भी विस्तारित किया गया है।

व्यापक संदर्भ और महत्व

गौरतलब है कि भारत में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की संख्या अभी भी बड़ी है और कार्यबल के औपचारिककरण की रफ्तार ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है। यह योजना ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के तहत श्रम-प्रधान उद्योगों में रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जा रही है। ईपीएफओ-संचालित पारदर्शी व्यवस्था और डीबीटी के संयोजन से रिसाव की संभावना कम होती है और लाभ सीधे पात्र कर्मचारियों तक पहुँचता है।

आगे देखें तो योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या नए पंजीकृत कर्मचारी दीर्घकालिक औपचारिक रोजगार में बने रहते हैं या केवल प्रोत्साहन राशि के लिए अल्पकालिक पंजीकरण होता है। सरकार की अगली रिपोर्ट से इस प्रवृत्ति पर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने कर्मचारी 12 महीने बाद भी औपचारिक रोजगार में बने रहते हैं — क्योंकि प्रोत्साहन-चालित पंजीकरण और टिकाऊ रोजगार दो अलग बातें हैं। भारत में कार्यबल औपचारिककरण की दर ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है और असंगठित क्षेत्र में वापसी की प्रवृत्ति भी देखी गई है। ₹99,446 करोड़ की यह प्रतिबद्धता बड़ी है, परंतु बिना स्वतंत्र रोजगार-अवधारण डेटा के, यह स्पष्ट नहीं होगा कि योजना केवल पंजीकरण बढ़ा रही है या वास्तव में दीर्घकालिक सुरक्षित रोजगार का निर्माण कर रही है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-वीबीआरवाई योजना क्या है?
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) एक केंद्र सरकार की रोजगार-प्रोत्साहन योजना है, जो 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक लागू है। इसका उद्देश्य ईपीएफओ पंजीकरण और डीबीटी के माध्यम से पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को औपचारिक कार्यबल से जोड़ना है।
पीएम-वीबीआरवाई के तहत कर्मचारियों को कितनी प्रोत्साहन राशि मिलती है?
₹1 लाख तक मासिक वेतन पाने वाले पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को अधिकतम ₹15,000 तक का एकमुश्त प्रोत्साहन मिलता है। यह राशि दो किस्तों में दी जाती है — 6 महीने की सेवा के बाद और 12 महीने की निरंतर सेवा तथा वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने के बाद।
नियोक्ताओं को पीएम-वीबीआरवाई से क्या लाभ मिलता है?
नियोक्ताओं को प्रत्येक पात्र अतिरिक्त कर्मचारी के लिए दो वर्षों तक प्रति माह ₹3,000 तक का प्रोत्साहन मिलता है, बशर्ते कर्मचारी कम से कम छह महीने तक कार्यरत रहे। विनिर्माण क्षेत्र में यह प्रोत्साहन तीसरे और चौथे वर्ष तक भी मिलता है।
पीएम-वीबीआरवाई का समग्र लक्ष्य क्या है और इसका बजट कितना है?
योजना का लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिनमें 1.92 करोड़ पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी शामिल हैं। इसके लिए सरकार ने ₹99,446 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है।
पीएम-वीबीआरवाई में महिलाओं की भागीदारी कितनी है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, योजना के लाभार्थियों में करीब 30 प्रतिशत महिलाएँ हैं। यह श्रम बाज़ार में लैंगिक समावेश की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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