सितंबर 2026 में IIP 6.7% बढ़ा: मैन्युफैक्चरिंग 7.6% और बिजली क्षेत्र 11.2% की छलांग
सारांश
मुख्य बातें
भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) ने सितंबर 2026 में सालाना आधार पर 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र की 7.6 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति क्षेत्र की 11.2 प्रतिशत की बढ़त ने निर्णायक भूमिका निभाई। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को जारी त्वरित अनुमान के अनुसार, IIP सितंबर 2025 के 116.5 से बढ़कर सितंबर 2026 में 124.3 पर पहुँच गया। हालाँकि यह वृद्धि अगस्त 2026 की 8 प्रतिशत की दर से कुछ धीमी रही।
क्षेत्रवार प्रदर्शन
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में खनन एवं उत्खनन सूचकांक 90.4, विनिर्माण सूचकांक 128.0, बिजली एवं गैस आपूर्ति सूचकांक 128.6 और जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन सूचकांक 146.4 पर रहा। बिजली एवं गैस क्षेत्र की दोहरे अंकों की वृद्धि ऊर्जा माँग में तेज़ी का संकेत देती है, जो औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से सीधे जुड़ी है।
मैन्युफैक्चरिंग में शीर्ष प्रदर्शक उद्योग
विनिर्माण क्षेत्र में शामिल 23 उद्योग समूहों में से 17 ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माण (33.9 प्रतिशत वृद्धि) सबसे आगे रहा, जिसमें स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, यूपीएस सिस्टम और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टर्स की माँग प्रमुख रही। रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद निर्माण में 19.9 प्रतिशत और मोटर वाहन, ट्रेलर एवं सेमी-ट्रेलर निर्माण में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऑटो कंपोनेंट्स, यात्री वाहन और वाणिज्यिक वाहनों के उत्पादन में तेज़ी ने मोटर वाहन क्षेत्र की रफ़्तार को मज़बूत आधार दिया।
उपयोग आधारित वर्गीकरण के आँकड़े
उपयोग-श्रेणी के आँकड़ों के अनुसार, पूँजीगत वस्तुओं का सूचकांक 153.4 पर रहा, जो निवेश गतिविधियों में सुधार का संकेत है। अवसंरचना एवं निर्माण क्षेत्र का सूचकांक 133.0, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ 133.1, मध्यवर्ती वस्तुएँ 131.7, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएँ 111.8 और प्राथमिक वस्तुएँ 111.6 पर रहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, इंटरमीडिएट गुड्स, प्राइमरी गुड्स और कैपिटल गुड्स की श्रेणियों का सर्वाधिक योगदान उत्पादन और निवेश गतिविधियों में निरंतर मज़बूती का प्रमाण है।
मापन पद्धति में बड़ा बदलाव
सांख्यिकी मंत्रालय ने घोषणा की है कि मूल्य आधारित उत्पादन वाले कुछ उत्पाद समूहों के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के स्थान पर आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) को डिफ्लेटर के रूप में अपनाया जाएगा। इस बदलाव का प्रभाव IIP बास्केट के 463 में से 234 उत्पाद समूहों पर पड़ेगा, जिनका कुल भारांक लगभग 36 प्रतिशत है। गौरतलब है कि मंत्रालय ने 1 जून 2026 को आधार वर्ष 2022-23 के साथ IIP की नई शृंखला जारी की थी, जिससे आँकड़ों की तुलनीयता और विश्वसनीयता में सुधार आने की उम्मीद है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है और कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में विनिर्माण गतिविधि सुस्त पड़ी है। भारत के IIP आँकड़े संकेत देते हैं कि घरेलू माँग और पूँजी निवेश की रफ़्तार बरकरार है। आने वाले महीनों में त्यौहारी माँग, सरकारी पूँजीगत व्यय और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन से इस गति के और मज़बूत होने की संभावना जताई जा रही है।