29 सितंबर 2026
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भारत का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में 8% उछला, मैन्युफैक्चरिंग में 9% की रिकॉर्ड वृद्धि

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भारत का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में 8% उछला, मैन्युफैक्चरिंग में 9% की रिकॉर्ड वृद्धि

सारांश

भारत का IIP अगस्त में 8% उछला — और इसके पीछे मैन्युफैक्चरिंग की लगातार तीसरी तेज़ छलाँग है। इलेक्ट्रिकल उपकरणों में 30.9% और कैपिटल गुड्स में 16.9% की वृद्धि बताती है कि निवेश और माँग दोनों मज़बूत हैं — हालाँकि खनन की 5.6% गिरावट चिंता का एक कोण छोड़ती है।

मुख्य बातें

सांख्यिकी मंत्रालय के 28 सितंबर 2026 के आँकड़ों के अनुसार भारत का IIP अगस्त 2026 में 8 प्रतिशत बढ़ा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की — लगातार तीसरे महीने 8% या अधिक की वृद्धि।
23 में से 18 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की; इलेक्ट्रिकल उपकरण (+30.9%), मशीनरी (+25.3%), मोटर वाहन (+25.2%) शीर्ष पर।
कैपिटल गुड्स उत्पादन में 16.9% और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 11.1% की वृद्धि।
बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में 12.3% की वृद्धि; इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में 6.4% ।
खनन क्षेत्र में 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज।

भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा, जिसका मुख्य श्रेय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के असाधारण प्रदर्शन को जाता है। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार यह वृद्धि अर्थव्यवस्था में बढ़ते औद्योगिक ताप का संकेत है। मैन्युफैक्चरिंग ने न सिर्फ IIP को ऊपर खींचा, बल्कि लगातार तीसरे महीने 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज कर एक नई मिसाल कायम की।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का दमदार प्रदर्शन

IIP में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अगस्त में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। आधिकारिक बयान के अनुसार, 'रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने लगातार तीन महीनों में 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की है।' सेक्टर के भीतर 23 में से 18 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, जो व्यापक-आधारित सुधार का संकेत है।

सबसे अधिक उछाल दर्ज करने वाले तीन प्रमुख उद्योग रहे — इलेक्ट्रिकल उपकरण विनिर्माण में 30.9 प्रतिशत, मशीनरी एवं उपकरण विनिर्माण में 25.3 प्रतिशत, और मोटर वाहन विनिर्माण में 25.2 प्रतिशत की वृद्धि।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण: निवेश और उपभोग दोनों मज़बूत

कैपिटल गुड्स — यानी कारखानों में उपयोग होने वाली मशीनों — के उत्पादन में 16.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह वर्ग अर्थव्यवस्था में वास्तविक पूँजी निवेश का प्रत्यक्ष प्रमाण है और भविष्य में रोज़गार तथा आय-सृजन का पूर्वसंकेत भी।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स — जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, रेफ्रिजरेटर और टीवी — के उत्पादन में 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज हुई, जो बढ़ती घरेलू आय के बीच उपभोक्ता माँग में आए उछाल को दर्शाती है। वहीं, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स — जैसे साबुन और कॉस्मेटिक्स — में 2.1 प्रतिशत की सामान्य वृद्धि रही।

बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र भी आगे

बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में अगस्त के दौरान 12.3 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई। इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसे हाईवे, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं में सरकारी निवेश की बड़ी भूमिका माना जा रहा है। जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

खनन क्षेत्र में गिरावट

यह ऐसे समय में आया है जब तस्वीर पूरी तरह गुलाबी नहीं है। खनन क्षेत्र में अगस्त के दौरान 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जो समग्र IIP की रफ्तार पर एक सतर्क करने वाला संकेत है। आलोचकों का कहना है कि खनन में यह सुस्ती यदि लंबी खिंची तो ऊर्जा और कच्चे माल की आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है।

आगे की राह

गौरतलब है कि मैन्युफैक्चरिंग में रोज़गार-गहन उद्योगों — विशेषतः मोटर वाहन और इलेक्ट्रिकल उपकरण — की तीव्र वृद्धि उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी कर रोज़गार की तलाश में हैं। आने वाले महीनों में त्योहारी सीज़न की माँग और सरकार की पूँजीगत व्यय की रफ्तार यह तय करेगी कि IIP की यह तेज़ी टिकाऊ है या मौसमी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह वृद्धि रोज़गार में तब्दील हो रही है। कैपिटल गुड्स में 16.9% की छलाँग बताती है कि कंपनियाँ क्षमता विस्तार में निवेश कर रही हैं — यह एक ठोस संकेत है। लेकिन खनन में 5.6% की गिरावट एक कमज़ोर कड़ी है; यदि कच्चे माल की आपूर्ति पर दबाव बना तो मैन्युफैक्चरिंग की यह रफ्तार आगे चलकर थम सकती है। त्योहारी सीज़न की माँग और सरकारी पूँजीगत व्यय की निरंतरता यह तय करेगी कि यह उछाल टिकाऊ है या महज एक मौसमी उभार।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 2026 में भारत की IIP वृद्धि दर क्या रही?
सांख्यिकी मंत्रालय के 28 सितंबर 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा। इस वृद्धि का मुख्य आधार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का 9 प्रतिशत का मज़बूत प्रदर्शन रहा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे अधिक वृद्धि किस उद्योग में हुई?
इलेक्ट्रिकल उपकरण विनिर्माण में सबसे अधिक 30.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद मशीनरी एवं उपकरण विनिर्माण में 25.3 प्रतिशत और मोटर वाहन विनिर्माण में 25.2 प्रतिशत की वृद्धि रही।
कैपिटल गुड्स की वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
कैपिटल गुड्स — यानी कारखानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनें — के उत्पादन में अगस्त में 16.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह वर्ग अर्थव्यवस्था में वास्तविक पूँजी निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोज़गार और आय-सृजन पर सीधा असर पड़ता है।
खनन क्षेत्र का प्रदर्शन कैसा रहा?
खनन क्षेत्र में अगस्त 2026 के दौरान 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यह समग्र IIP की सकारात्मक तस्वीर में एकमात्र उल्लेखनीय कमज़ोरी रही।
IIP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी कितनी है और इसका क्या महत्व है?
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर IIP में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखता है, इसलिए इसका प्रदर्शन समग्र औद्योगिक वृद्धि की दिशा तय करता है। इंजीनियरिंग और विश्वविद्यालय स्नातकों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोज़गार सृजन में भी इस सेक्टर की केंद्रीय भूमिका है।
राष्ट्र प्रेस
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