28 अक्टूबर 2026
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उत्तराखंड: खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधानसभा से दिया इस्तीफा, विपक्ष पर लगाया धोखे का आरोप

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उत्तराखंड: खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधानसभा से दिया इस्तीफा, विपक्ष पर लगाया धोखे का आरोप

सारांश

उत्तराखंड की खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने गैरसैंण सत्र में इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल मचा दी। चार साल तक विपक्ष का साथ देने के बाद भी जनमुद्दों पर अकेले पड़ जाने की पीड़ा उनके इस कदम की वजह बनी।

मुख्य बातें

खानपुर सीट के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने 28 अक्टूबर 2026 को गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा से इस्तीफा सौंपा।
उमेश कुमार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चार वर्षों में हरिद्वार, किसान, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मुद्दों पर उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि सदन में रात भर विपक्ष के साथ फर्श पर सोए , फिर भी जरूरत पर विपक्षी सदस्य पीछे हट गए।
कांग्रेस विधायकों ने लगातार दूसरे दिन गैरसैंण परिसर में प्रदर्शन किया, सत्र की अवधि बढ़ाने और अंकिता भंडारी मामले पर जवाब माँगा।
इस्तीफा स्वीकार होने पर खानपुर सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

उत्तराखंड विधानसभा के खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने 28 अक्टूबर 2026 को गैरसैंण में चल रहे दो दिवसीय सत्र के दौरान सदन से अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने विपक्षी विधायकों पर आरोप लगाया कि जनहित के अहम मुद्दों पर उन्होंने कभी साथ नहीं दिया, जबकि खुद उमेश कुमार हर मौके पर विपक्ष के साथ खड़े रहे। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस ने भी सत्र की अवधि को लेकर विधानसभा परिसर में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन जारी रखा।

इस्तीफे की वजह: चार साल की निराशा

उमेश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मैंने सदन से अपना इस्तीफा सौंप दिया है और विपक्ष के रवैये से आहत हूं। मैंने हर कदम पर उनका साथ दिया। यहां तक कि जब विपक्ष सदन में रातभर सोया था, तब मैं भी उनके साथ फर्श पर सोया था।' उनका कहना था कि पिछले चार वर्षों से किसानों और आम जनता के मुद्दों पर विपक्ष के सहयोग की उम्मीद थी, जो कभी पूरी नहीं हुई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के आंदोलनों में वे हर बार शामिल रहे, किंतु जब उन्होंने अपने क्षेत्र और जनता के मुद्दों पर समर्थन मांगा तो विपक्षी सदस्य पीछे हट गए।

कौन-से मुद्दे उठाए थे उमेश कुमार ने

उमेश कुमार के अनुसार, उन्होंने सदन में हरिद्वार के निवासियों के स्थायी निवास प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरों, आपदा राहत, किसानों के लिए चीनी मिलों, तथा आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं से जुड़े सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रत्येक मौके पर उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष उनके साथ खड़ा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

गौरतलब है कि खानपुर सीट से निर्दलीय जीते उमेश कुमार की पहचान एक मुखर जन-प्रतिनिधि के रूप में रही है, जो सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों से स्वतंत्र रुख अपनाते रहे हैं।

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन जारी

इस बीच, गैरसैंण में मंगलवार से शुरू हुए दो दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते हुए मौजूदा सत्र की अवधि कम होने पर आपत्ति जताई और इसे बढ़ाने की माँग की।

प्रदर्शनकारी विधायकों ने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, भ्रष्टाचार और आम जनता की रोज़मर्रा की समस्याओं पर पर्याप्त चर्चा का समय माँगा। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा भी उठाया और इस मामले पर सत्तारूढ़ दल की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।

आम जनता पर असर और आगे की राह

उमेश कुमार के इस्तीफे से खानपुर विधानसभा सीट के मतदाताओं के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है। यदि इस्तीफा स्वीकार होता है तो इस सीट पर उपचुनाव की नौबत आ सकती है, जिससे राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ेगा। निर्दलीय विधायकों का विधानसभा से इस्तीफा उत्तराखंड में कोई नई घटना नहीं है, लेकिन यह इस्तीफा ऐसे सत्र में आया है जब विपक्ष पहले से ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है।

अब यह देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष उमेश कुमार का इस्तीफा स्वीकार करते हैं या नहीं, और क्या कोई दल उन्हें मनाने की कोशिश करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ वे दलों के लिए तब तक उपयोगी होते हैं जब तक उनकी जरूरत होती है। कांग्रेस पर लगाए गए आरोप इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वह खुद इसी सत्र में सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रही है — लेकिन एक जन-प्रतिनिधि को नजरअंदाज किए जाने की शिकायत उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। गैरसैंण में दो दिवसीय सत्र की अल्पावधि और कांग्रेस का विरोध मिलाकर एक तस्वीर बनाते हैं — उत्तराखंड की विधायिका अभी भी जनमुद्दों के लिए पर्याप्त समय और साझेदारी नहीं जुटा पा रही।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमेश कुमार ने विधानसभा से इस्तीफा क्यों दिया?
निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विपक्षी विधायकों पर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया कि चार वर्षों में हरिद्वार, किसान, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं जैसे जनमुद्दों पर उन्हें कभी विपक्ष का समर्थन नहीं मिला, जबकि वे हमेशा विपक्ष के साथ खड़े रहे।
उमेश कुमार कौन हैं और किस सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं?
उमेश कुमार उत्तराखंड विधानसभा में खानपुर सीट से निर्वाचित निर्दलीय विधायक हैं। वे किसानों और जनसामान्य के मुद्दों पर मुखर रुख के लिए जाने जाते हैं और सत्तारूढ़ दल व विपक्ष दोनों से स्वतंत्र रहते हैं।
गैरसैंण विधानसभा सत्र में कांग्रेस का विरोध किस बात पर था?
कांग्रेस विधायकों ने दो दिवसीय सत्र की अवधि को अपर्याप्त बताते हुए विरोध किया और सत्र बढ़ाने की माँग की। उन्होंने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, भ्रष्टाचार और अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मुद्दे उठाए।
उमेश कुमार के इस्तीफे का खानपुर सीट पर क्या असर होगा?
यदि विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफा स्वीकार करते हैं, तो खानपुर सीट पर उपचुनाव की नौबत आ सकती है। इससे उत्तराखंड की राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना बनेगी।
अंकिता भंडारी हत्याकांड का विधानसभा से क्या संबंध है?
कांग्रेस विधायकों ने गैरसैंण सत्र में अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा उठाया और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर इस मामले में चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सदन में इस पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने दी जा रही।
राष्ट्र प्रेस
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