7 अगस्त 2026
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बसवराज होरट्टी के इस्तीफे पर कांग्रेस की सराहना, हरिप्रसाद बोले — निष्पक्षता से संचालित किया सदन

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बसवराज होरट्टी के इस्तीफे पर कांग्रेस की सराहना, हरिप्रसाद बोले — निष्पक्षता से संचालित किया सदन

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद में बहुमत खोने के बाद बसवराज होरट्टी ने सभापति पद से इस्तीफा दिया। कांग्रेस ने इसे संसदीय परंपरा बताया और BJP पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया। 13 अगस्त से शुरू होने वाले सत्र से पहले नए सभापति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

मुख्य बातें

बसवराज होरट्टी ने 7 अगस्त 2026 को कर्नाटक विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष बी.के.
हरिप्रसाद ने होरट्टी की निष्पक्षता और संसदीय योगदान की सराहना की।
75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस के 39 , BJP के 24 , JD(S) के 6 और 1 निर्दलीय सदस्य हैं।
केपीसीसी ने फरवरी 2021 के प्रताप चंद्र शेट्टी के इस्तीफे का उदाहरण देकर परंपरा को उचित ठहराया।
BJP पर 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने के मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप।
विधान परिषद का अगला सत्र 13 अगस्त से शुरू होने वाला है।

कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी द्वारा 7 अगस्त 2026 को पद से इस्तीफा देने के बाद, कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने उनके दीर्घकालिक संसदीय योगदान की सराहना करते हुए कहा कि होरट्टी ने सदन की गरिमा और संवैधानिक परंपराओं को बनाए रखने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब 13 अगस्त से विधान परिषद का नया सत्र शुरू होने वाला है और सदन में दलीय शक्ति संतुलन बदल चुका है।

हरिप्रसाद की प्रतिक्रिया

हरिप्रसाद ने जारी बयान में कहा कि होरट्टी ने अपने लंबे राजनीतिक और विधायी जीवन में कर्नाटक की संसदीय व्यवस्था को उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने कहा, 'संयम, परिपक्वता और निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करते हुए सभी सदस्यों को समान अवसर देने वाली उनकी कार्यशैली हमेशा याद रखी जाएगी।' कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा, 'मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं और कर्नाटक की संसदीय व्यवस्था के प्रति उनकी लंबी सेवा को आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं।'

संसदीय परंपरा का हवाला

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के मीडिया एवं संचार विभाग के अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी रमेश बाबू ने स्पष्ट किया कि जिस दल के पास विधान परिषद में बहुमत नहीं रह जाता, उसके सभापति या उपसभापति का स्वेच्छा से पद छोड़ना एक स्थापित संसदीय परंपरा है। उन्होंने 75 सदस्यीय विधान परिषद की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि कांग्रेस के 39, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 24, जनता दल (सेक्युलर) के 6 और 1 निर्दलीय सदस्य हैं।

2021 का पूर्व उदाहरण

रमेश बाबू ने फरवरी 2021 की घटना का स्मरण कराया, जब BJP को विधान परिषद में बहुमत मिलने पर तत्कालीन सभापति प्रताप चंद्र शेट्टी ने इस्तीफा दिया था। गौरतलब है कि उस समय BJP ने स्वयं शेट्टी के इस्तीफे की माँग करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की थी। यह ऐसे समय में आया है जब BJP अब इसी परंपरा पर सवाल उठा रही है।

BJP पर राजनीतिकरण का आरोप

केपीसीसी ने आरोप लगाया कि BJP होरट्टी के इस्तीफे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। रमेश बाबू ने दावा किया कि BJP नेताओं ने हाल तक होरट्टी को इस्तीफा न देने के लिए मनाने का प्रयास किया, ताकि सभापति पद के माध्यम से राजनीतिक लाभ बरकरार रखा जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से हटाए गए हैं और BJP इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए होरट्टी के इस्तीफे को विवाद बना रही है। पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के उस आरोप को रमेश बाबू ने खारिज किया जिसमें होरट्टी के इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव बताया गया था।

आगे क्या

विधान परिषद का सत्र 13 अगस्त से शुरू होने वाला है, जिससे पहले नए सभापति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। कांग्रेस के बहुमत को देखते हुए नया सभापति उसी दल से होने की उम्मीद है। होरट्टी के इस्तीफे के बाद कर्नाटक की राजनीति में विधान परिषद की भूमिका और संसदीय परंपराओं को लेकर बहस तेज होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कांग्रेस और BJP दोनों का आचरण इस प्रसंग में राजनीतिक सुविधावाद की बानगी है — 2021 में BJP ने शेट्टी का इस्तीफा माँगा था, अब वही दल इस परंपरा पर सवाल उठा रही है। असली सवाल यह है कि मतदाता सूची से कथित तौर पर 1 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का मुद्दा सभापति के इस्तीफे की राजनीति में दब न जाए। कर्नाटक की जनता के लिए विधान परिषद की कार्यप्रणाली और मतदाता अधिकार दोनों एक साथ जवाबदेही के दायरे में रहने चाहिए।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसवराज होरट्टी ने कर्नाटक विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा क्यों दिया?
होरट्टी ने 7 अगस्त 2026 को इस्तीफा दिया क्योंकि 75 सदस्यीय विधान परिषद में उनकी पार्टी BJP के पास अब बहुमत नहीं है — कांग्रेस के 39 सदस्य हैं जबकि BJP के केवल 24। केपीसीसी के अनुसार, जिस दल के पास बहुमत न हो उसके सभापति का इस्तीफा देना एक स्थापित संसदीय परंपरा है।
कांग्रेस ने होरट्टी के इस्तीफे पर क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने होरट्टी के इस्तीफे का सम्मान करते हुए कहा कि उन्होंने सदन की कार्यवाही संयम, परिपक्वता और निष्पक्षता के साथ संचालित की। हरिप्रसाद ने होरट्टी की दीर्घकालिक संसदीय सेवा को आदरपूर्वक स्वीकार किया।
BJP ने होरट्टी के इस्तीफे पर क्या आपत्ति जताई?
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने आरोप लगाया कि होरट्टी के इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव था। केपीसीसी के रमेश बाबू ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि BJP स्वयं 2021 में इसी परंपरा की माँग कर चुकी है।
2021 में प्रताप चंद्र शेट्टी के इस्तीफे से इस मामले की तुलना कैसे होती है?
फरवरी 2021 में जब BJP को विधान परिषद में बहुमत मिला था, तब तत्कालीन सभापति प्रताप चंद्र शेट्टी ने इस्तीफा दिया था और BJP ने उनके इस्तीफे की माँग करते हुए सदन की कार्यवाही भी बाधित की थी। केपीसीसी का कहना है कि अब BJP उसी परंपरा पर सवाल उठाकर दोहरा मानदंड अपना रही है।
कर्नाटक विधान परिषद का अगला सत्र कब शुरू होगा और आगे क्या होगा?
विधान परिषद का अगला सत्र 13 अगस्त 2026 से शुरू होने वाला है। होरट्टी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के बहुमत को देखते हुए नए सभापति का चुनाव सत्र से पहले या उसके दौरान होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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