कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष पद: जीएस पाटिल ने दाखिल किया नामांकन, सलीम अहमद परिषद अध्यक्ष पद की दौड़ में
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक जीएस पाटिल ने गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की उपस्थिति में कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर सहित कई वरिष्ठ मंत्री और पार्टी नेता मौजूद रहे।
मुख्य घटनाक्रम
इसी दिन कांग्रेस एमएलसी सलीम अहमद ने कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार की मौजूदगी में विधान परिषद सचिव के कार्यालय में अपने नामांकन पत्र जमा किए। इस पद के लिए शुक्रवार, 14 अगस्त को चुनाव निर्धारित है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी सदस्यों ने विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी के नेतृत्व में एक बैठक आयोजित की, जिसमें विधान परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव और विकास कार्यों पर विचार-विमर्श किया गया।
पूर्व अध्यक्ष होरट्टी की आपत्तियाँ
इस बीच, कर्नाटक विधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष बसवराज होरट्टी ने अपने इस्तीफे की परिस्थितियों पर गहरी नाराज़गी जताई। उनका कहना है कि उन्हें मजबूरी में इस्तीफे के पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े, क्योंकि जिस दिन उन्होंने इस्तीफा देने की योजना बनाई थी, उस दिन उन्हें ऐसा करने का अवसर नहीं दिया गया।
होरट्टी ने यह भी बताया कि उन्होंने इस्तीफे से जुड़ी सभी जानकारी राज्यपाल को दे दी थी, किंतु उन्हें अभी तक यह पुष्टि नहीं मिली कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया या नहीं। उन्होंने कहा, 'मैंने इस संबंध में राज्यपाल को सब कुछ बता दिया है। राज्यपाल ने मुझे कोई सूचना नहीं दी है। उन्होंने यह नहीं बताया है कि मुझे पद से मुक्त कर दिया गया है या मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। जहाँ तक मुझे पता है, अगर मुझे प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है, तो इसका मतलब है कि मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।'
होरट्टी की पीड़ा और सरकार पर निशाना
होरट्टी ने राज्य सरकार द्वारा इस मामले को संभालने के तरीके पर खुलकर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'मैं राज्य सरकार के इस कदम से दुखी हूँ। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। मैं 46 वर्षों से सदन में हूँ और अपनी सेवाएँ दी हैं। मुझे मजबूरी में इस्तीफा देना पड़ा। मैं टकराव की स्थिति नहीं चाहता था।'
गौरतलब है कि होरट्टी के अनुसार उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार से इस्तीफे के समय पर चर्चा की थी और दोनों के बीच एक सहमति बनी थी। उन्होंने बताया, 'मुख्यमंत्री के साथ मेरी बातचीत में यह तय हुआ था कि 14 अगस्त को उपाध्यक्ष का चुनाव होगा। मैंने कहा था कि उस दिन मुझे अपना आभार व्यक्त करने का मौका मिलेगा और उसके बाद मैं इस्तीफा सौंप दूँगा। मैंने इस बारे में घोषणा भी की थी।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार विधायिका के दोनों सदनों में अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। विधान परिषद अध्यक्ष पद पर कब्ज़ा सत्ता संतुलन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जाता है। BJP ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और होरट्टी के बयानों को सरकार की कार्यशैली पर गंभीर आरोप बताया है।
आगे क्या होगा
विधान परिषद अध्यक्ष पद के लिए 14 अगस्त को होने वाले चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि सलीम अहमद निर्विरोध निर्वाचित होते हैं या BJP कोई उम्मीदवार उतारती है। वहीं, होरट्टी के इस्तीफे की वैधता को लेकर राज्यपाल का रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है, जो आने वाले दिनों में एक संवैधानिक पेचीदगी बन सकती है।