कर्नाटक विधान परिषद चेयरमैन पद: बसवराज होरट्टी बोले — 'मुझे मजबूरन इस्तीफा दिलाया गया'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधान परिषद के पूर्व चेयरमैन बसवराज होरट्टी ने मंगलवार, 11 अगस्त को हुबली में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें दबाव में अपने इस्तीफे के पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्होंने स्वयं इस्तीफा देने की योजना बनाई थी, उस दिन उन्हें यह अवसर नहीं दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
होरट्टी के अनुसार, उन्होंने इस्तीफे से जुड़ी समस्त जानकारी राज्यपाल को दे दी थी, परंतु उन्हें आज तक यह नहीं बताया गया कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा, 'गवर्नर ने मुझे कोई सूचना नहीं दी है — न यह कि मुझे पद से मुक्त किया गया, न यह कि इस्तीफा मंजूर हुआ। जहाँ तक मुझे पता है, यदि प्रोटेम चेयरमैन नियुक्त किया गया है, तो इसका अर्थ है कि मेरा इस्तीफा स्वीकार हो गया है।'
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को होरट्टी ने कर्नाटक विधान परिषद के चेयरमैन पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया था। इस्तीफे का पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किया गया। इससे पहले होरट्टी ने सुबह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की थी और उसके बाद दोपहर में चेयरमैन के कार्यालय में एक और बैठक हुई।
होरट्टी की आपत्ति — 'मेरी योजना अलग थी'
होरट्टी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार के साथ इस्तीफे के समय को लेकर पहले ही सहमति बना ली थी। उन्होंने बताया, '13 अगस्त को शोक प्रस्ताव पूरे करने और 14 अगस्त को वाइस चेयरमैन का चुनाव कराने की योजना थी। मैंने कहा था कि उस दिन आभार व्यक्त करने के बाद मैं इस्तीफा सौंपूँगा — इसकी घोषणा भी कर दी थी।' उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने उसी दिन हस्ताक्षर करने का दबाव डाला, जिससे उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा।
सरकार की भूमिका पर सवाल
होरट्टी ने राज्य सरकार द्वारा इस पूरे मामले को संभालने के तरीके पर खेद जताया। उन्होंने कहा, 'मैं 46 वर्षों से सदन में हूँ और अपनी सेवाएँ दे रहा हूँ। मुझे मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा। मैं टकराव नहीं चाहता था, इसलिए माँग मान ली — लेकिन इससे मुझे गहरा दुख हुआ है।' गौरतलब है कि होरट्टी कर्नाटक में सबसे लंबे समय तक विधायक रहे हैं।
विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन को लिखे तीन पंक्तियों के इस्तीफा पत्र में होरट्टी ने उल्लेख किया कि वे अपनी इच्छा से पद छोड़ रहे हैं — हालाँकि अब वे इसे अपनी 'मर्जी' नहीं मानते। इस्तीफे के तुरंत बाद विधान परिषद की सचिव ने अधिसूचना जारी कर पद को रिक्त घोषित कर दिया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। आलोचकों का कहना है कि होरट्टी जैसे वरिष्ठ विधायक को इस तरह पद से हटाना संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है।
आगे क्या होगा
होरट्टी ने संकेत दिया कि वे इस मामले में राज्यपाल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। प्रोटेम चेयरमैन की नियुक्ति के बाद अब विधान परिषद में नए चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया की दिशा तय होगी।