11 अगस्त 2026
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कर्नाटक विधान परिषद चेयरमैन पद: बसवराज होरट्टी बोले — 'मुझे मजबूरन इस्तीफा दिलाया गया'

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कर्नाटक विधान परिषद चेयरमैन पद: बसवराज होरट्टी बोले — 'मुझे मजबूरन इस्तीफा दिलाया गया'

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद के पूर्व चेयरमैन बसवराज होरट्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के दबाव में उन्हें उसी दिन इस्तीफे पर हस्ताक्षर करने पड़े, जबकि उन्होंने 14 अगस्त को सम्मानजनक विदाई की योजना बनाई थी। 46 साल की संसदीय सेवा का यह अंत विवादों में घिर गया है।

मुख्य बातें

बसवराज होरट्टी ने 11 अगस्त को हुबली में आरोप लगाया कि उन्हें दबाव में कर्नाटक विधान परिषद के चेयरमैन पद से इस्तीफा देना पड़ा।
होरट्टी की योजना थी कि 14 अगस्त को शोक प्रस्ताव और वाइस चेयरमैन चुनाव के बाद वे आभार व्यक्त कर इस्तीफा देंगे।
उनके अनुसार मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उसी दिन हस्ताक्षर करने का दबाव डाला, जिससे उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा।
होरट्टी 46 वर्षों से कर्नाटक विधानमंडल में सेवारत हैं और राज्य के सबसे वरिष्ठ विधायकों में गिने जाते हैं।
राज्यपाल ने इस्तीफे की स्वीकृति की कोई औपचारिक सूचना होरट्टी को नहीं दी; प्रोटेम चेयरमैन की नियुक्ति से ही उन्हें स्वीकृति का अनुमान है।

कर्नाटक विधान परिषद के पूर्व चेयरमैन बसवराज होरट्टी ने मंगलवार, 11 अगस्त को हुबली में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें दबाव में अपने इस्तीफे के पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्होंने स्वयं इस्तीफा देने की योजना बनाई थी, उस दिन उन्हें यह अवसर नहीं दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

होरट्टी के अनुसार, उन्होंने इस्तीफे से जुड़ी समस्त जानकारी राज्यपाल को दे दी थी, परंतु उन्हें आज तक यह नहीं बताया गया कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा, 'गवर्नर ने मुझे कोई सूचना नहीं दी है — न यह कि मुझे पद से मुक्त किया गया, न यह कि इस्तीफा मंजूर हुआ। जहाँ तक मुझे पता है, यदि प्रोटेम चेयरमैन नियुक्त किया गया है, तो इसका अर्थ है कि मेरा इस्तीफा स्वीकार हो गया है।'

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को होरट्टी ने कर्नाटक विधान परिषद के चेयरमैन पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया था। इस्तीफे का पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किया गया। इससे पहले होरट्टी ने सुबह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की थी और उसके बाद दोपहर में चेयरमैन के कार्यालय में एक और बैठक हुई।

होरट्टी की आपत्ति — 'मेरी योजना अलग थी'

होरट्टी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार के साथ इस्तीफे के समय को लेकर पहले ही सहमति बना ली थी। उन्होंने बताया, '13 अगस्त को शोक प्रस्ताव पूरे करने और 14 अगस्त को वाइस चेयरमैन का चुनाव कराने की योजना थी। मैंने कहा था कि उस दिन आभार व्यक्त करने के बाद मैं इस्तीफा सौंपूँगा — इसकी घोषणा भी कर दी थी।' उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने उसी दिन हस्ताक्षर करने का दबाव डाला, जिससे उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा।

सरकार की भूमिका पर सवाल

होरट्टी ने राज्य सरकार द्वारा इस पूरे मामले को संभालने के तरीके पर खेद जताया। उन्होंने कहा, 'मैं 46 वर्षों से सदन में हूँ और अपनी सेवाएँ दे रहा हूँ। मुझे मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा। मैं टकराव नहीं चाहता था, इसलिए माँग मान ली — लेकिन इससे मुझे गहरा दुख हुआ है।' गौरतलब है कि होरट्टी कर्नाटक में सबसे लंबे समय तक विधायक रहे हैं।

विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन को लिखे तीन पंक्तियों के इस्तीफा पत्र में होरट्टी ने उल्लेख किया कि वे अपनी इच्छा से पद छोड़ रहे हैं — हालाँकि अब वे इसे अपनी 'मर्जी' नहीं मानते। इस्तीफे के तुरंत बाद विधान परिषद की सचिव ने अधिसूचना जारी कर पद को रिक्त घोषित कर दिया।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। आलोचकों का कहना है कि होरट्टी जैसे वरिष्ठ विधायक को इस तरह पद से हटाना संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है।

आगे क्या होगा

होरट्टी ने संकेत दिया कि वे इस मामले में राज्यपाल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। प्रोटेम चेयरमैन की नियुक्ति के बाद अब विधान परिषद में नए चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के लिए चिंताजनक संकेत है। इस्तीफा पत्र में 'अपनी मर्जी' लिखवाना और वास्तविकता में दबाव का होना — यह विरोधाभास ही इस पूरे प्रकरण का सबसे असुविधाजनक पहलू है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसवराज होरट्टी ने कर्नाटक विधान परिषद के चेयरमैन पद से इस्तीफा क्यों दिया?
होरट्टी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के दबाव में उसी दिन इस्तीफे पर हस्ताक्षर करने पड़े, जबकि उन्होंने 14 अगस्त को सम्मानजनक विदाई के बाद इस्तीफा देने की योजना बनाई थी। उनके अनुसार यह स्वैच्छिक नहीं, बल्कि मजबूरी में दिया गया इस्तीफा था।
होरट्टी को इस्तीफे की स्वीकृति की सूचना मिली है?
नहीं। होरट्टी ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें अभी तक कोई औपचारिक सूचना नहीं दी है। उन्होंने कहा कि प्रोटेम चेयरमैन की नियुक्ति से ही उन्हें यह अनुमान हो रहा है कि उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है।
होरट्टी ने इस्तीफे के समय को लेकर मुख्यमंत्री से क्या सहमति बनाई थी?
होरट्टी के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवकुमार के साथ तय हुआ था कि 13 अगस्त को शोक प्रस्ताव पूरे होंगे, 14 अगस्त को वाइस चेयरमैन का चुनाव होगा और उसी दिन आभार व्यक्त करने के बाद वे इस्तीफा सौंपेंगे। लेकिन इस सहमति का पालन नहीं हुआ।
बसवराज होरट्टी कर्नाटक की राजनीति में कितने वरिष्ठ नेता हैं?
होरट्टी 46 वर्षों से कर्नाटक विधानमंडल में सेवारत हैं और राज्य के सबसे लंबे समय तक विधायक रहने वाले नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कर्नाटक विधान परिषद के चेयरमैन के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कर्नाटक विधान परिषद में अब आगे क्या होगा?
होरट्टी के इस्तीफे के बाद विधान परिषद की सचिव ने पद को रिक्त घोषित कर दिया है और प्रोटेम चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। अब नए चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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