7 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बसवराज होरट्टी के इस्तीफे पर कांग्रेस की सराहना, हरिप्रसाद बोले — 'संसदीय परंपराओं के अनुरूप फैसला'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बसवराज होरट्टी के इस्तीफे पर कांग्रेस की सराहना, हरिप्रसाद बोले — 'संसदीय परंपराओं के अनुरूप फैसला'

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस के बहुमत के बाद सभापति बसवराज होरट्टी ने इस्तीफा दिया। कांग्रेस ने इसे परंपरा बताया तो BJP ने दबाव का आरोप लगाया — लेकिन 2021 की मिसाल कांग्रेस के पक्ष में है।

मुख्य बातें

बसवराज होरट्टी ने 7 अगस्त 2026 को कर्नाटक विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दिया।
केपीसीसी अध्यक्ष बी.के.
हरिप्रसाद ने इस्तीफे को संसदीय परंपरा के अनुरूप बताते हुए होरट्टी के कार्यकाल की सराहना की।
75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस के 39 , BJP के 24 , JD(S) के 6 और 1 निर्दलीय सदस्य हैं।
पूर्व एमएलसी रमेश बाबू ने फरवरी 2021 की मिसाल दी, जब BJP के बहुमत पर तत्कालीन सभापति प्रताप चंद्र शेट्टी ने इस्तीफा दिया था।
केपीसीसी ने BJP पर 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
विधान परिषद का अगला सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है।

कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी के 7 अगस्त 2026 को पद से इस्तीफा देने के बाद कर्नाटक कांग्रेस ने उनके कार्यकाल की सराहना की और इस कदम को दीर्घकालीन संसदीय परंपरा के अनुरूप बताया। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि होरट्टी ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को समान अवसर देकर सदन की गरिमा बनाए रखी।

हरिप्रसाद ने क्या कहा

हरिप्रसाद ने जारी बयान में कहा कि होरट्टी ने अपने लंबे राजनीतिक और विधायी जीवन में कर्नाटक की संसदीय व्यवस्था को उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा, 'संयम, परिपक्वता और निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करते हुए सभी सदस्यों को समान अवसर देने वाली उनकी कार्यशैली हमेशा याद रखी जाएगी।'

हरिप्रसाद ने यह भी कहा, 'मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं और कर्नाटक की संसदीय व्यवस्था के प्रति उनकी लंबी सेवा को आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं।' उन्होंने संवैधानिक पदों की गरिमा के प्रति होरट्टी की प्रतिबद्धता की विशेष रूप से सराहना की।

संसदीय परंपरा का हवाला

केपीसीसी के मीडिया एवं संचार विभाग के अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी रमेश बाबू ने स्पष्ट किया कि जिस दल के पास विधान परिषद में बहुमत नहीं रहता, उसके सभापति या उपसभापति का स्वेच्छा से पद छोड़ना लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपरा है। उन्होंने बताया कि 75 सदस्यीय विधान परिषद में अभी कांग्रेस के 39, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 24, जनता दल (सेक्युलर) के 6 और 1 निर्दलीय सदस्य हैं।

रमेश बाबू ने फरवरी 2021 की मिसाल दी, जब BJP को विधान परिषद में बहुमत मिलने पर तत्कालीन सभापति प्रताप चंद्र शेट्टी ने इस्तीफा दिया था — और उस समय BJP ने खुद उनके इस्तीफे की मांग करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की थी। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त से शुरू होने वाले परिषद के सत्र से पहले होरट्टी का इस्तीफा इसी परंपरा की कड़ी है।

BJP पर पलटवार

रमेश बाबू ने पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के उस आरोप को सिरे से खारिज किया, जिसमें उन्होंने होरट्टी के इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव होने की बात कही थी। केपीसीसी ने आरोप लगाया कि BJP नेताओं ने हाल तक होरट्टी को इस्तीफा न देने के लिए मनाने का प्रयास किया, ताकि सभापति के पद के ज़रिए राजनीतिक लाभ बरकरार रखा जा सके।

रमेश बाबू ने यह भी कहा कि BJP संसदीय परंपराओं और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है, और अब जब सदन में उसके पास बहुमत नहीं है, तो वह इस परंपरा का विरोध कर रही है।

मतदाता सूची विवाद से जोड़ा मामला

रमेश बाबू ने इस पूरे विवाद को राज्य में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान से जोड़ा। उनका आरोप है कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के दौरान 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटाए गए हैं और BJP इस संवेदनशील मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए होरट्टी के इस्तीफे को विवाद का विषय बना रही है।

केपीसीसी ने स्पष्ट कहा कि विधान परिषद के सभापति जैसे संवैधानिक पद का राजनीतिकरण करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। आने वाले दिनों में नए सभापति के चुनाव की प्रक्रिया पर सभी दलों की नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे इस विवाद की आड़ में दबाया नहीं जाना चाहिए — मुख्यधारा की कवरेज इस कड़ी को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसवराज होरट्टी ने कर्नाटक विधान परिषद सभापति पद से इस्तीफा क्यों दिया?
होरट्टी ने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि विधान परिषद में उनकी पार्टी BJP के पास अब बहुमत नहीं है और कांग्रेस के 39 सदस्य बहुमत में हैं। यह दीर्घकालीन संसदीय परंपरा के अनुरूप है, जिसके तहत बहुमत खोने वाले दल के पीठासीन अधिकारी स्वेच्छा से पद छोड़ते हैं।
कांग्रेस ने होरट्टी के इस्तीफे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने इस्तीफे को संसदीय परंपरा के अनुरूप बताया और होरट्टी के निष्पक्ष संचालन की सराहना की। पार्टी ने BJP पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
क्या 2021 में भी ऐसा हुआ था?
हाँ, फरवरी 2021 में जब BJP को विधान परिषद में बहुमत मिला था, तब तत्कालीन सभापति प्रताप चंद्र शेट्टी ने इस्तीफा दिया था। उस समय BJP ने खुद उनके इस्तीफे की माँग करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की थी।
कर्नाटक विधान परिषद में अभी किस दल के कितने सदस्य हैं?
75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस के 39, BJP के 24, जनता दल (सेक्युलर) के 6 और 1 निर्दलीय सदस्य हैं। कांग्रेस स्पष्ट बहुमत में है।
होरट्टी के इस्तीफे को मतदाता सूची विवाद से क्यों जोड़ा जा रहा है?
केपीसीसी के रमेश बाबू का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और BJP इस संवेदनशील मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए होरट्टी के इस्तीफे को विवाद बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. 3 दिन पहले
  6. 3 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 2 महीने पहले