मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद: उमंग सिंघार बोले — जनता तय करे लोकतंत्र चाहिए या तानाशाही
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 12 जून 2026 को नई दिल्ली में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने के मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और विधायकों के संवैधानिक अधिकारों का है।
मुख्य घटनाक्रम
सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट होकर दिल्ली पहुँचे हैं। उनके अनुसार, मीनाक्षी नटराजन के साथ जो हुआ वैसा देश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रिटर्निंग अधिकारियों को इस तरह मनमाने फैसले लेने की छूट मिलती रही, तो पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति से अपील
सिंघार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर विचार कर एक ऐतिहासिक नजीर पेश करेगा। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र को बचाने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय हमसे भी अधिक गंभीर है। साथ ही उन्होंने बताया कि कांग्रेस विधायकों ने राष्ट्रपति से मिलने का समय माँगा था, परंतु उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया गया। सिंघार ने कहा कि यदि राष्ट्रपति नहीं मिलतीं, तो पार्टी को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
वोट और सीट चोरी का आरोप
सिंघार ने आरोप लगाया कि पहले विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के ज़रिए मतदाता सूची में गड़बड़ी कर वोट चोरी की गई और अब रिटर्निंग अधिकारी नामांकन फॉर्म रद्द कर सीट चोरी कर रहे हैं। उनके अनुसार यह देश में एक नई और खतरनाक परंपरा की शुरुआत है। उन्होंने कहा, 'अब देश की जनता तय करेगी कि लोकतंत्र बचाना है या तानाशाही सरकार चाहिए।'
जलजीवन मिशन में घोटाले का आरोप
सिंघार ने मध्य प्रदेश में जलजीवन मिशन को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है — पाइपलाइनें अधूरी छोड़ी गईं, पानी की टंकियाँ नहीं बनाई गईं और आम जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा विधानसभा में कई बार उठाया जा चुका है।
विक्रांत भूरिया की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया ने कहा कि असली सवाल यह है कि इस देश में संविधान और लोकतंत्र बचेगा या नहीं। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पिछले दरवाज़े से रद्द कराने को महिला-विरोधी रवैये का प्रमाण बताया। भूरिया ने कहा कि जब कांग्रेस ने एक महिला को राज्यसभा में भेजने का अवसर दिया, तो सत्तारूढ़ पक्ष को वह स्वीकार्य नहीं हुआ।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जो इस मामले में एक निर्णायक मिसाल कायम कर सकता है।