मीनाक्षी नटराजन का आरोप: राज्यसभा नामांकन रद्द करना राजनीतिक साजिश, रिटर्निंग अधिकारी पर मिलीभगत का इल्ज़ाम
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन रद्द होने के बाद उन्होंने 10 जून को सीधे आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है और रिटर्निंग अधिकारी सत्तापक्ष के साथ मिले हुए थे। नटराजन ने कहा कि वे तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और एक बार सांसद भी रही हैं, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें नामांकन फॉर्म भरना नहीं आता।
मीनाक्षी नटराजन के मुख्य आरोप
नटराजन ने कहा, 'यह सामान्य समय नहीं है। हम एक ऐसे युद्धक्षेत्र में हैं, जहाँ कांग्रेस नेता सिर्फ विपक्षी पार्टी के खिलाफ ही नहीं लड़ रहे हैं।' उनके अनुसार, हमारे संविधान निर्माताओं ने जिन संस्थाओं को बनाया था, वे अब इस कदर प्रभावित दिखती हैं कि उनके खिलाफ भी लड़ना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि रिटर्निंग अधिकारी एक प्रवक्ता की तरह काम कर रहे थे और सत्तापक्ष से मिले हुए थे। नटराजन ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग (ECI) के समक्ष उनके वकील इस मुद्दे को उठाएँगे।
भारतीय जनता पार्टी पर तीसरे उम्मीदवार उतारने का आरोप
नटराजन ने मंगलवार को यह भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ज़रूरी संख्या बल न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा। उनके अनुसार, इससे साफ हो गया कि BJP संविधान और लोकतंत्र को दरकिनार करने वाली राजनीति कर रही है और समग्र चुनाव में बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है, ठीक वैसे ही जैसे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में किया गया था।
कांग्रेस नेता बीएम संदीप की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता बीएम संदीप ने इस घटनाक्रम को केवल एक सीट या एक उम्मीदवार का मामला मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'यह पूरी तरह से लोकतंत्र से जुड़ा मामला है। लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की बार-बार हो रही कोशिशों को लेकर चिंता बढ़ रही है।'
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
नटराजन ने इस विवाद को 'भारत की सोच' और लोकतंत्र के लिए एक व्यापक संघर्ष से जोड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस समय देश के लिए एक अहम लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके अनुसार, असली सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र बचेगा, क्या भारत का संघीय ढाँचा बरकरार रहेगा और क्या एकपक्षीय व्यवस्था की कोशिशें विफल होंगी।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह चुनाव आयोग के समक्ष नामांकन रद्द किए जाने को कानूनी चुनौती देगी। यह विवाद मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच तनाव को और गहरा करता है। गौरतलब है कि राज्यसभा चुनावों में नामांकन की तकनीकी वैधता को लेकर विवाद पहले भी कई राज्यों में उठ चुके हैं।