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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका

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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका

सारांश

मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन तेलंगाना के एक मामले का उल्लेख न होने के कारण निरस्त हो गया। चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिली। BJP ने जश्न मनाया, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में निराशा है और पार्टी के भीतर षड्यंत्र के सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य बातें

मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र तेलंगाना में दर्ज मामले का उल्लेख न होने के कारण निरस्त हुआ।
चुनाव आयोग (ECI) और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने कांग्रेस की दलील खारिज की।
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर BJP के उम्मीदवार तरुण चुघ व रजनीश अग्रवाल और तीसरे उम्मीदवार महेश केवट मैदान में हैं।
BJP ने प्रदेश कार्यालय में विजय उत्सव मनाया; कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा।
कांग्रेस के भीतर सवाल उठ रहे हैं कि चूक लापरवाही थी या आंतरिक षड्यंत्र ।

मध्य प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को राज्यसभा चुनाव में उस समय करारा झटका लगा जब पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। चुनाव आयोग (ECI) और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने पार्टी की दलील को खारिज कर दिया, जिससे भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा फैल गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही संगठनात्मक कमज़ोरियों से जूझ रही है।

नामांकन निरस्त होने की वजह

रिपोर्टों के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र में एक बड़ी चूक यह हुई कि तेलंगाना में उनके विरुद्ध दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया गया। यह कानूनी अनिवार्यता न पूरी होने के कारण नामांकन रद्द हो गया। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए पहले चुनाव आयोग और फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन दोनों मंचों पर पार्टी को निराशा हाथ लगी।

राज्यसभा चुनाव का समीकरण

मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना था। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार का निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा था। BJP ने तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा।

इसी बीच कांग्रेस के भीतर आंतरिक खींचतान की खबरें आने लगीं। BJP ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतार दिया। कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कर्नाटक ले जाने की तैयारी की, वहीं BJP के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के संपर्क में कांग्रेस के कई विधायकों के आने की खबरें भी सामने आईं।

कांग्रेस में आंतरिक संकट की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस लगभग ढाई दशक के अधिकांश समय से सत्ता से बाहर रही है। एक अवसर अवश्य आया जब पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिला, लेकिन आपसी खींचतान के चलते वह सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व में परिवर्तन किया, लेकिन आलोचकों का कहना है कि आंतरिक हालात में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं आया है।

BJP का जश्न, कांग्रेस में सवाल

नामांकन निरस्त होने के बाद BJP ने अपने प्रदेश कार्यालय में विजय उत्सव मनाया। BJP का यह भी दावा है कि कांग्रेस को हार का आभास हो गया था, इसीलिए उसने नामांकन निरस्त कराने की रणनीति अपनाई — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नामांकन में यह चूक वास्तव में लापरवाही थी या पार्टी के भीतर से ही कोई षड्यंत्र रचा गया। यह प्रश्न पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में क्या रुख अपनाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो नेतृत्व परिवर्तन महज़ औपचारिकता बनकर रह जाता है। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इस मामले की जवाबदेही तय करेगा या इसे भी 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' कहकर आगे बढ़ जाएगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन क्यों निरस्त हुआ?
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र में तेलंगाना में उनके विरुद्ध दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया गया था, जो कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस चूक के कारण चुनाव आयोग ने नामांकन रद्द कर दिया।
कांग्रेस ने नामांकन निरस्त होने के बाद क्या कदम उठाए?
कांग्रेस ने पहले चुनाव आयोग और फिर सर्वोच्च न्यायालय में अपील की, लेकिन दोनों मंचों पर पार्टी की दलील खारिज कर दी गई। इस प्रकार पार्टी के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा।
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में BJP के कौन-से उम्मीदवार हैं?
BJP ने तीन राज्यसभा सीटों के लिए तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। संख्या बल के आधार पर BJP के दो उम्मीदवारों की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, और तीसरे उम्मीदवार को उतारना कांग्रेस की आंतरिक कमज़ोरी का फायदा उठाने की रणनीति बताई जा रही है।
क्या कांग्रेस के भीतर षड्यंत्र की आशंका है?
कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि नामांकन में चूक लापरवाही थी या पार्टी के भीतर से ही षड्यंत्र रचा गया। BJP ने भी यह दावा किया है, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति क्या है?
कांग्रेस मध्य प्रदेश में लगभग ढाई दशक के अधिकांश समय से सत्ता से बाहर है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व बदला, लेकिन आंतरिक गुटबाज़ी और संगठनात्मक कमज़ोरियाँ बनी हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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