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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द: कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर 'सीट चोरी' का आरोप लगाया

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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द: कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर 'सीट चोरी' का आरोप लगाया

सारांश

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस ने इसे 'सीट चोरी' बताया। पार्टी का आरोप है कि BJP के पास तीसरी सीट जीतने का बहुमत नहीं था, इसलिए चुनाव आयोग की मिलीभगत से प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को दौड़ से बाहर किया गया।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 12 जून 2026 को BJP और चुनाव आयोग पर मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में मिलीभगत का आरोप लगाया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने हलफनामे में आपराधिक मामले की जानकारी न देने के आधार पर खारिज किया।
कांग्रेस का तर्क: फॉर्म 26 के तहत केवल वे मामले दर्ज करने होते हैं जिनमें आरोप तय हों या अदालत ने संज्ञान लिया हो — नटराजन के मामले में दोनों शर्तें पूरी नहीं थीं।
झारखंड में उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन में कई कमियों के बावजूद स्वीकृति मिलने को कांग्रेस ने 'दोहरे मापदंड' का उदाहरण बताया।
कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के 1973 के फैसले का हवाला देते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।

कांग्रेस ने शुक्रवार, 12 जून को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में पार्टी की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने में दोनों की मिलीभगत थी। कांग्रेस ने इसे 'सीट चोरी' करार दिया और कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खुला खिलवाड़ है।

नामांकन रद्द होने की वजह और कांग्रेस का तर्क

कांग्रेस के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज किया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी। हालाँकि पार्टी का कहना है कि नटराजन के खिलाफ अभी कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और किसी भी अदालत ने उनके खिलाफ किसी अपराध का संज्ञान नहीं लिया है।

कांग्रेस ने तर्क दिया कि फॉर्म 26 के तहत उम्मीदवारों को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें आरोप तय हो चुके हों या अदालत ने संज्ञान लिया हो। पार्टी के मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस कानूनी नोटिस का हवाला दिया, वह महज एक निजी शिकायत से जुड़ा था — न कि कोई लंबित आपराधिक प्रकरण। ऐसे में हलफनामे में 'लागू नहीं' का जवाब कानूनी रूप से सही था।

कांग्रेस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने केवल सुनवाई का अवसर देने के लिए नोटिस जारी किया था, न कि कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू की थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गलत तरीके से यह निष्कर्ष निकाला कि अदालत ने अपराध का संज्ञान लिया था।

भाजपा पर 'गलत हथकंडे' का आरोप

कांग्रेस का दावा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में BJP के पास राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं था। इसीलिए, पार्टी के अनुसार, BJP ने विरोधी उम्मीदवार को चुनावी दौड़ से बाहर करने के लिए 'गलत हथकंडे' अपनाए। कांग्रेस ने कहा, "सीट चोरी के इस ताज़ा मामले में BJP और चुनाव आयोग अपराध में भागीदार हैं।"

झारखंड से तुलना: 'दोहरे मापदंड' का आरोप

विपक्षी पार्टी ने चुनाव आयोग पर 'दोहरे मापदंड' अपनाने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस के अनुसार, झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन पत्र में कई कमियाँ थीं — हलफनामे में नाम में अंतर, फॉर्म 26 में अधूरी जानकारी और संपत्ति व कर विवरण में चूक। इन कमियों के बावजूद झारखंड के रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्टीकरण की अनुमति दी और नामांकन स्वीकार कर लिया।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस ने प्रह्लाददास खंडेलवाल बनाम नरेंद्र कुमार साल्वे (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास उम्मीदवारों को जाँच-पड़ताल के दौरान बड़ी कमियाँ ठीक करने की अनुमति देने का अधिकार नहीं है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर आगे ले जाएगी। गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव में नामांकन से जुड़े विवाद अक्सर अदालत तक पहुँचते हैं, और इस मामले में भी न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह चुनावी प्रक्रिया में एकरूपता की कमी को उजागर करती है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने राज्यसभा चुनाव में तकनीकी आधार पर नामांकन रद्द करने को राजनीतिक हथियार बताया हो। चुनाव आयोग और BJP दोनों की चुप्पी इस विवाद को और गहरा बनाती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों रद्द किया गया?
रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज किया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी। हालाँकि कांग्रेस का कहना है कि उनके खिलाफ कोई लंबित आपराधिक मामला नहीं है और फॉर्म 26 के तहत ऐसी जानकारी देना अनिवार्य नहीं था।
कांग्रेस ने 'सीट चोरी' किसे बताया?
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने की पूरी प्रक्रिया को 'सीट चोरी' कहा। पार्टी का आरोप है कि BJP के पास तीसरी सीट जीतने का बहुमत नहीं था, इसलिए प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को बाहर करने के लिए चुनाव आयोग की मदद ली गई।
झारखंड के परिमल नथवानी मामले से इसकी तुलना क्यों की जा रही है?
कांग्रेस का आरोप है कि झारखंड में परिमल नथवानी के नामांकन पत्र में हलफनामे में नाम की गड़बड़ी, अधूरी जानकारी और संपत्ति विवरण में चूक जैसी कई कमियाँ थीं, फिर भी रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्टीकरण की अनुमति देकर नामांकन स्वीकार किया। पार्टी इसे चुनाव आयोग का 'दोहरा मापदंड' बताती है।
फॉर्म 26 में आपराधिक मामलों की जानकारी कब देनी होती है?
फॉर्म 26 के तहत उम्मीदवारों को केवल उन आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें आरोप तय हो चुके हों या अदालत ने संज्ञान लिया हो। कांग्रेस का कहना है कि नटराजन के मामले में यह दोनों शर्तें पूरी नहीं थीं, इसलिए 'लागू नहीं' का जवाब कानूनी रूप से सही था।
इस विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के किस फैसले का हवाला दिया गया?
कांग्रेस ने प्रह्लाददास खंडेलवाल बनाम नरेंद्र कुमार साल्वे (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि रिटर्निंग ऑफिसर को जाँच के दौरान उम्मीदवारों को बड़ी कमियाँ सुधारने की अनुमति देने का अधिकार नहीं है। पार्टी ने इस फैसले के आधार पर झारखंड में नथवानी के नामांकन की स्वीकृति को भी अनुचित ठहराया।
राष्ट्र प्रेस
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