मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द: कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर 'सीट चोरी' का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस ने शुक्रवार, 12 जून को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में पार्टी की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने में दोनों की मिलीभगत थी। कांग्रेस ने इसे 'सीट चोरी' करार दिया और कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खुला खिलवाड़ है।
नामांकन रद्द होने की वजह और कांग्रेस का तर्क
कांग्रेस के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज किया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी। हालाँकि पार्टी का कहना है कि नटराजन के खिलाफ अभी कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और किसी भी अदालत ने उनके खिलाफ किसी अपराध का संज्ञान नहीं लिया है।
कांग्रेस ने तर्क दिया कि फॉर्म 26 के तहत उम्मीदवारों को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें आरोप तय हो चुके हों या अदालत ने संज्ञान लिया हो। पार्टी के मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस कानूनी नोटिस का हवाला दिया, वह महज एक निजी शिकायत से जुड़ा था — न कि कोई लंबित आपराधिक प्रकरण। ऐसे में हलफनामे में 'लागू नहीं' का जवाब कानूनी रूप से सही था।
कांग्रेस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने केवल सुनवाई का अवसर देने के लिए नोटिस जारी किया था, न कि कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू की थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गलत तरीके से यह निष्कर्ष निकाला कि अदालत ने अपराध का संज्ञान लिया था।
भाजपा पर 'गलत हथकंडे' का आरोप
कांग्रेस का दावा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में BJP के पास राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं था। इसीलिए, पार्टी के अनुसार, BJP ने विरोधी उम्मीदवार को चुनावी दौड़ से बाहर करने के लिए 'गलत हथकंडे' अपनाए। कांग्रेस ने कहा, "सीट चोरी के इस ताज़ा मामले में BJP और चुनाव आयोग अपराध में भागीदार हैं।"
झारखंड से तुलना: 'दोहरे मापदंड' का आरोप
विपक्षी पार्टी ने चुनाव आयोग पर 'दोहरे मापदंड' अपनाने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस के अनुसार, झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन पत्र में कई कमियाँ थीं — हलफनामे में नाम में अंतर, फॉर्म 26 में अधूरी जानकारी और संपत्ति व कर विवरण में चूक। इन कमियों के बावजूद झारखंड के रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्टीकरण की अनुमति दी और नामांकन स्वीकार कर लिया।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस ने प्रह्लाददास खंडेलवाल बनाम नरेंद्र कुमार साल्वे (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास उम्मीदवारों को जाँच-पड़ताल के दौरान बड़ी कमियाँ ठीक करने की अनुमति देने का अधिकार नहीं है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर आगे ले जाएगी। गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव में नामांकन से जुड़े विवाद अक्सर अदालत तक पहुँचते हैं, और इस मामले में भी न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।