मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद 10 मई को पार्टी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारत निर्वाचन आयोग पर तीखे आरोप लगाए। कांग्रेस सांसद जे.बी. माथर ने इसे 'भाजपा का ड्रामा' करार दिया और आयोग पर सत्ताधारी दल के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद जे.बी. माथर के आरोप
कांग्रेस सांसद जे.बी. माथर ने कहा कि यह नामांकन रद्द करना भाजपा की ओर से रचा गया ड्रामा है और चुनाव आयोग इस ड्रामे में सहयोगी की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा, 'आयोग की जिम्मेदारी भारत में चुनावों की निष्पक्षता और पवित्रता बनाए रखने की होनी चाहिए, लेकिन वह सत्ताधारी भाजपा के दबाव में काम कर रहा है और देश में लोकतंत्र व संवैधानिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है।' माथर ने यह भी बताया कि कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के बाहर धरना दिया, परंतु आयोग ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया।
सुरेंद्र राजपूत का तीखा हमला
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि भाजपा पहले वोट चुराती थी, अब सीटें भी चुराने लगी है। उन्होंने कहा, 'जिस तरह से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ है, वह लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले भाजपा नेताओं की भी आंखें खोल देने वाला है।' राजपूत ने स्पष्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है — उन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की एक धारा के तहत केवल नोटिस दिया गया था, जिसका उन्होंने जवाब भी दे दिया था।
नामांकन रद्द होने की वजह
राजपूत के अनुसार, अदालती नोटिस की जानकारी हलफनामे में न देना अपराध नहीं है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने इस पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'हलफनामा अधूरा था और कुछ तथ्यों को छिपाया गया था। उन्हें एक आपराधिक मामले में समन मिला था और उन्होंने अपना जवाब भी दाखिल किया था, लेकिन उन्होंने अपने हलफनामे में इसका उल्लेख नहीं किया, जो भारत निर्वाचन आयोग के नामांकन नियमों के तहत अनिवार्य है।'
सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि पार्टी को उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले का स्वतः संज्ञान लेगा, क्योंकि चुनाव आयोग ने धरने पर बैठे नेताओं की बात सुनने से मना कर दिया है। यह विवाद आगामी दिनों में संसदीय और न्यायिक दोनों मोर्चों पर और गहरा हो सकता है।