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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज: सिद्धारमैया बोले — भाजपा ने चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग किया

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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज: सिद्धारमैया बोले — भाजपा ने चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग किया

सारांश

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर सिद्धारमैया ने भाजपा पर चुनावी मशीनरी के दुरुपयोग का सीधा आरोप लगाया है — यह विपक्ष की उस चिंता की ताज़ा कड़ी है कि संस्थाओं को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने 10 जून को मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश राज्यसभा नामांकन खारिज होने को 'लोकतंत्र पर हमला' करार दिया।
भाजपा पर आरोप — केवल दो सीट जीतने लायक संख्या बल होने के बावजूद तीन उम्मीदवार उतारे और कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश की।
सिद्धारमैया के अनुसार, नटराजन के विरुद्ध कोई अदालत-संज्ञानित आपराधिक मामला नहीं, फिर भी नामांकन रद्द — रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष कानूनी तर्क रखे जाने के बावजूद।
कांग्रेस ने इसे 'वोट चोरी' के बाद 'सीट चोरी' की संज्ञा दी और हर लोकतांत्रिक माध्यम से विरोध की घोषणा की।
भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य सिद्धारमैया ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने को 'लोकतंत्र पर हमला' और 'स्पष्ट गैरकानूनी कार्रवाई' करार दिया है। 10 जून को जारी बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग कर वह सीट हथियाने की कोशिश की, जो वह ईमानदार चुनावी प्रक्रिया से जीत नहीं सकती थी।

नामांकन खारिज होने की परिस्थितियाँ

सिद्धारमैया के अनुसार, भाजपा ने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार उतारे, जबकि उसके पास केवल दो सीटें जीतने लायक संख्या बल था। उनका आरोप है कि पहले कांग्रेस विधायकों को तोड़ने और समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। जब यह प्रयास विफल रहा और कांग्रेस विधायक एकजुट बने रहे, तब चुनावी तंत्र के ज़रिये नटराजन का नामांकन ही रद्द करा दिया गया।

उन्होंने कहा, 'यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि लोकतंत्र का जश्न मनाने का दावा करने वाली भाजपा के शासन में चुनावी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है।'

नामांकन खारिज करने के आधार पर सवाल

सिद्धारमैया ने नामांकन रद्द किए जाने के कानूनी आधार को भी चुनौती दी। उनके अनुसार, मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध कानूनी दृष्टि से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी निजी शिकायत को तब तक आपराधिक प्रकरण नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत उस पर संज्ञान न ले — और केवल अदालत का नोटिस जारी होना भी नामांकन पत्र में अनिवार्य घोषणा की श्रेणी में नहीं आता।

उन्होंने दावा किया कि यह कानूनी पक्ष रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा गया था, फिर भी नामांकन खारिज कर दिया गया — जो उनके मतानुसार निर्णय की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

सिद्धारमैया ने इस घटना को एक अकेली घटना नहीं, बल्कि भाजपा की 'व्यापक रणनीति' का हिस्सा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन जैसे तरीकों से 'वोट चोरी' के बाद अब 'सीट चोरी' भी उसी अभियान की कड़ी बन गई है। उन्होंने कहा, 'चाहे मतदाताओं में हेरफेर हो, दल-बदल कराया जाए, विधायकों की खरीद-फरोख्त हो, संस्थाओं का दुरुपयोग किया जाए या सीटें छीनी जाएं — भाजपा का उद्देश्य संसद में कृत्रिम बहुमत तैयार करना है।'

गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब देश में राज्यसभा की कई सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है और विपक्षी दल केंद्रीय संस्थाओं की स्वायत्तता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

कांग्रेस का आगे का रुख

सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस कथित हमले का हर लोकतांत्रिक माध्यम से विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के साथ मिलकर इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह देखना बाकी है कि कांग्रेस इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय या चुनाव आयोग के समक्ष ले जाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अभी तक एकतरफा — भाजपा या रिटर्निंग अधिकारी का पक्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है, जो इस पूरी तस्वीर को अधूरा बनाता है। यह घटना उस बड़े सवाल को फिर उठाती है कि चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी आधारों पर नामांकन खारिज करने का अधिकार कितना विवेकाधीन है और इसकी निगरानी कौन करे। राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग और दल-बदल की घटनाएँ नई नहीं हैं — लेकिन नामांकन-स्तर पर हस्तक्षेप का आरोप, अगर सिद्ध हो, तो यह संसदीय लोकतंत्र के लिए कहीं अधिक गहरी चिंता का विषय है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन क्यों खारिज हुआ?
सिद्धारमैया के अनुसार, नामांकन एक निजी शिकायत के आधार पर खारिज किया गया, जिसे अदालत ने अभी तक आपराधिक मामले के रूप में संज्ञान नहीं लिया था। उनका कहना है कि यह कानूनी तर्क रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष रखा गया था, फिर भी नामांकन रद्द कर दिया गया। रिटर्निंग अधिकारी या भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
सिद्धारमैया ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश की, और जब वह विफल रही, तब चुनावी मशीनरी का इस्तेमाल कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ही खारिज करा दिया। उन्होंने इसे संसद में 'कृत्रिम बहुमत' बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया।
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति क्या थी?
सिद्धारमैया के अनुसार, भाजपा के पास मध्य प्रदेश में केवल दो राज्यसभा सीटें जीतने लायक संख्या बल था, लेकिन उसने तीन उम्मीदवार मैदान में उतारे। यह तीसरी सीट जीतने के लिए कांग्रेस विधायकों का समर्थन हासिल करना या विपक्षी उम्मीदवार को बाहर करना ज़रूरी था।
कांग्रेस इस मामले में आगे क्या करेगी?
सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस हर लोकतांत्रिक माध्यम से इस फैसले का विरोध करेगी और जनता के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखेगी। हालाँकि, पार्टी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह मामले को सर्वोच्च न्यायालय या चुनाव आयोग के समक्ष ले जाएगी या नहीं।
क्या नामांकन खारिज होने के खिलाफ कानूनी चुनौती दी जा सकती है?
राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने के खिलाफ उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है। सिद्धारमैया का कहना है कि नामांकन खारिज करने का आधार कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, जो इस संभावना को और प्रासंगिक बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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