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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: 'कांग्रेस में साजिश नहीं, भाजपा और रिटर्निंग अधिकारियों की मिलीभगत'

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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: 'कांग्रेस में साजिश नहीं, भाजपा और रिटर्निंग अधिकारियों की मिलीभगत'

सारांश

तेलंगाना कांग्रेस प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा — मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन रद्द होने के पीछे पार्टी की नहीं, भाजपा और रिटर्निंग अधिकारियों की साजिश है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और मध्य प्रदेश में अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखने की घोषणा की।

मुख्य बातें

मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन एक लंबित कानूनी नोटिस के आधार पर रद्द किया गया।
नटराजन ने कांग्रेस में किसी अंदरूनी साजिश से इनकार किया; भाजपा और रिटर्निंग अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया।
भाजपा ने तीसरी सीट के लिए नामांकन दाखिल किया जबकि उसके पास आवश्यक 58 की जगह केवल 48 विधायक थे; कांग्रेस के पास 61 विधायक थे।
चुनाव आयोग पर समझौतावादी रवैये का आरोप; हरियाणा और झारखंड में भी सीट 'छीनने' का दावा।
नटराजन ने तेलंगाना से किसी सांसद के उनके लिए सीट खाली करने की खबरों को बेबुनियाद बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक भूमिका मध्य प्रदेश में ही जारी रहेगी।

तेलंगाना कांग्रेस प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने 22 जून 2025 को हैदराबाद स्थित कांग्रेस के तेलंगाना मुख्यालय गांधी भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश से उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी खारिज होने के पीछे कांग्रेस पार्टी के भीतर किसी प्रकार की अंदरूनी साजिश नहीं थी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और रिटर्निंग अधिकारियों की कथित मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया।

नामांकन रद्द होने की वजह क्या बताई

नटराजन ने बताया कि उनके नामांकन पत्र में लंबित कानूनी नोटिस की जानकारी देने के लिए कोई कॉलम नहीं था, इसलिए उन्होंने यह विवरण स्वेच्छा से नहीं भरा। उनके अनुसार, जब आपत्ति उठाई गई तो रिटर्निंग अधिकारी ने उनसे सीधे पूछा और उन्होंने स्वीकार किया कि एक कानूनी नोटिस लंबित है। उन्होंने कहा, 'मैंने उन्हें बताया कि हाँ, एक कानूनी नोटिस लंबित है और कानून का पालन करने वाली नागरिक होने के नाते मैंने उसका जवाब भी दिया है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह नोटिस 2025 में एआईसीसी पर्यवेक्षक बनने से पहले का है।

भाजपा पर गंभीर आरोप

नटराजन ने आरोप लगाया कि भाजपा ने रिटर्निंग अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा ने राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए नामांकन दाखिल किया, जबकि उसके पास आवश्यक 58 विधायकों की संख्या से 10 विधायक कम थे। इसके विपरीत, कांग्रेस के पास 61 विधायक थे। उन्होंने कहा कि यह स्थिति शुरू से ही संदिग्ध थी।

पार्टी में अंदरूनी साजिश के आरोपों को नकारा

मध्य प्रदेश के कुछ भाजपा नेताओं के उस दावे को नटराजन ने सिरे से खारिज किया कि तेलंगाना के किसी कांग्रेस नेता ने उनके खिलाफ लंबित कानूनी नोटिस की जानकारी भाजपा को दी थी। उन्होंने कहा, 'कोई साजिश नहीं है। पार्टी में किसी के पास मेरे खिलाफ साजिश करने की कोई वजह नहीं है। यह साजिश की कहानी भाजपा द्वारा फैलाई जा रही है ताकि हमारा ध्यान भटकाया जा सके और हम उस साजिश पर ध्यान न दें जो वे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कर रहे हैं।'

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर पार्टी के भीतर वाकई कोई साजिश थी, तो दो रिटर्निंग अधिकारियों ने नामांकन को मामूली आधार पर क्यों खारिज किया — जो उनके अनुसार भाजपा की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।

चुनाव आयोग और अन्य राज्यों पर सवाल

नटराजन ने चुनाव आयोग पर भी समझौतावादी रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है — हरियाणा में क्रॉस वोटिंग करवाकर एक सीट छीनी गई और झारखंड में भी एक सीट की कथित चोरी हुई। उनके अनुसार, देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने की कोशिश हो रही है।

आगे की राजनीतिक भूमिका

नटराजन ने उन खबरों को भी बेबुनियाद बताया जिनमें कहा गया था कि तेलंगाना से कोई कांग्रेस सांसद उनके लिए राज्यसभा सीट खाली करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका आगे भी मध्य प्रदेश में ही जारी रहेगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब राज्यसभा चुनावों में प्रक्रियागत विवादों की संख्या लगातार बढ़ रही है और विपक्षी दल चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक वरिष्ठ पार्टी प्रभारी के नामांकन में इतनी बुनियादी प्रक्रियागत चूक कैसे हुई। लंबित कानूनी नोटिस की जानकारी न देना — भले ही कॉलम न हो — एक अनुभवी नेता की टीम से अपेक्षित सतर्कता का अभाव दर्शाता है। दूसरी ओर, भाजपा का आवश्यक विधायक संख्या से कम होने के बावजूद तीसरी सीट पर नामांकन दाखिल करना और फिर विपक्ष का नामांकन तकनीकी आधार पर रद्द होना — यह संयोग से अधिक रणनीति लगती है। चुनाव आयोग की भूमिका पर बार-बार उठते सवाल अब संस्थागत विश्वसनीयता की बड़ी बहस की माँग करते हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन क्यों रद्द हुआ?
उनका नामांकन एक लंबित कानूनी नोटिस का खुलासा न करने के आधार पर रद्द किया गया। नटराजन का कहना है कि नामांकन पत्र में इसके लिए कोई कॉलम नहीं था, इसलिए उन्होंने यह जानकारी अलग से नहीं दी।
क्या कांग्रेस के भीतर नटराजन के खिलाफ साजिश थी?
नटराजन ने इसे पूरी तरह नकारा है। उनके अनुसार यह कहानी भाजपा द्वारा फैलाई जा रही है ताकि असली मुद्दे — भाजपा और रिटर्निंग अधिकारियों की कथित मिलीभगत — से ध्यान हटाया जा सके।
भाजपा पर नटराजन ने क्या आरोप लगाए?
नटराजन ने आरोप लगाया कि भाजपा ने रिटर्निंग अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने कहा कि भाजपा ने तीसरी सीट के लिए नामांकन दाखिल किया जबकि उसके पास आवश्यक 58 विधायकों से 10 कम थे, जो शुरू से ही संदिग्ध था।
क्या नटराजन के लिए तेलंगाना से कोई राज्यसभा सीट खाली होगी?
नहीं। नटराजन ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए तेलंगाना में कोई भी राज्यसभा सीट से इस्तीफा नहीं दे रहा और उनकी राजनीतिक भूमिका मध्य प्रदेश में ही जारी रहेगी।
इस विवाद का लोकतंत्र पर क्या असर बताया गया?
नटराजन ने इसे एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया — हरियाणा में क्रॉस वोटिंग और झारखंड में सीट की कथित चोरी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी समझौतावादी रवैये का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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