मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा नामांकन विवाद: चुनाव आयोग से राहत नहीं, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट जाएंगी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले में चुनाव आयोग से कोई राहत न मिलने के बाद कांग्रेस ने गुरुवार, 12 जून 2026 को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है। इस विवाद ने अब तेलंगाना की राजनीति में भी तूफान ला दिया है, जहाँ सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने बुधवार, 10 जून 2026 को हैदराबाद के सेंट्रल क्राइम स्टेशन (CCS) में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के विरुद्ध औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि इन अकाउंट्स के ज़रिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक सामग्री फैलाई जा रही है।
शिकायत में 'तेलुगु स्क्राइब' सहित कई सोशल मीडिया हैंडल्स का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि इन्होंने यह प्रचारित किया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कराने की साजिश मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने रची थी। सांसद ने विस्तृत जाँच कर एफआईआर दर्ज करने की माँग की है।
सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप
किरण कुमार रेड्डी ने अपनी शिकायत में कहा कि संबंधित अकाउंट्स ने फर्जी खबरें फैलाकर मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर दावा किया गया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मीनाक्षी नटराजन के पुराने कानूनी मामले की जानकारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं को गुप्त रूप से साझा की, जिसके कारण उनका नामांकन रद्द हुआ।
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों से जुड़े डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
भाजपा और बीआरएस पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किरण कुमार रेड्डी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दल मिलकर कांग्रेस सरकार को घेरने और तेलंगाना में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की साजिश रच रहे हैं।
नामांकन रद्द होने की कानूनी पृष्ठभूमि
सांसद ने स्पष्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध केवल एक निजी शिकायत दर्ज है, और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत फॉर्म-26 में इसे 'मामला' (केस) के रूप में दर्शाने की कोई बाध्यता नहीं है। यह कानूनी तर्क ही सर्वोच्च न्यायालय में कांग्रेस की दलील का आधार बनने की संभावना है।
आगे क्या होगा
गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय में दायर होने वाली याचिका से यह तय होगा कि क्या मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बहाल हो सकता है। यह मामला न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया की व्याख्या के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है। तेलंगाना में जारी सियासी तनाव यह दर्शाता है कि यह विवाद कानूनी दायरे से बाहर निकलकर राज्य की राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है।