मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज: भट्टी विक्रमार्क मल्लू बोले — लोकतंत्र पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज किए जाने पर तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने 10 जून को इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश को कमजोर करने की हताश कोशिश करार दिया। मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले यह विवाद राजनीतिक रूप से गरमाता जा रहा है।
नामांकन खारिज होने की पृष्ठभूमि
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन पत्र अस्वीकार कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि नटराजन ने तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी।
हालाँकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने स्पष्ट किया कि नटराजन के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके अनुसार, केवल एक नोटिस जारी हुआ था, जिसका जवाब पहले ही चुनाव कार्यालय में जमा करा दिया गया था।
भट्टी विक्रमार्क का एक्स पर तीखा हमला
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हम मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को गलत तरीके से खारिज किए जाने की कड़ी निंदा करते हैं। जहाँ कोई गलती नहीं है, वहाँ 'गलतियाँ' गढ़ना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनादेश को कमजोर करने की एक हताश कोशिश है। हम हर उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक रास्ते से इस साजिश का पर्दाफाश करेंगे।"
कांग्रेस का पलटवार और चुनाव आयोग की बैठक
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि BJP प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर करने की कोशिश कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले ही BJP पर 'अलोकतांत्रिक तरीके' अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पार्टी मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा सीट हथियाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
इस पूरे विवाद पर बुधवार को चुनाव आयोग (ECI) में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है। कांग्रेस इस बैठक में नामांकन खारिज किए जाने पर औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कराएगी और आयोग से उचित कार्रवाई की माँग करेगी।
आगे क्या होगा
यह मामला अब कानूनी और संवैधानिक मोर्चे पर भी लड़े जाने की संभावना है, जैसा कि भट्टी विक्रमार्क ने संकेत दिया है। 18 जून के मतदान से पहले चुनाव आयोग का निर्णय इस विवाद की दिशा तय करेगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाता रहा है।