मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा नामांकन रद्द याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय शुक्रवार, 13 जून 2025 को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए उनके नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी गई है। यह मामला संवैधानिक प्रक्रियाओं और निर्वाचन अधिकारियों की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले की पृष्ठभूमि
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की वेकेशन बेंच ने गुरुवार को नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के तत्काल सुनवाई के अनुरोध पर शुक्रवार को सुनवाई का भरोसा दिया। सिंघवी ने बेंच के समक्ष तर्क दिया कि गुरुवार नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि थी और यदि समय पर राहत नहीं मिली, तो याचिकाकर्ता को प्रभावी उपाय के लिए छह वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।
सिंघवी ने न्यायालय से यह भी आग्रह किया कि विवाद के निपटारे तक चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगाई जाए। हालाँकि, बेंच ने कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए निर्धारित कर दी।
नामांकन खारिज होने की वजह
रिटर्निंग ऑफिसर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आपत्तियों के आधार पर नटराजन का नामांकन पत्र अस्वीकार किया। आपत्ति के अनुसार, नटराजन ने कथित तौर पर नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले का विवरण नहीं दिया।
यह आपत्ति हैदराबाद की चौथी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में पूर्व कॉर्पोरेट अधिकारी ए. श्रीलता द्वारा दायर याचिका पर आधारित थी। उस याचिका में आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया था। श्रीलता ने रेड्डी पर छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगाए थे।
नटराजन की प्रतिक्रिया
नटराजन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया है। उन्होंने हैदराबाद की अदालत में श्रीलता की याचिका का विरोध किया है। इससे पहले, कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर सरकार के इशारे पर काम कर रहे थे और स्वतंत्र संवैधानिक अधिकारियों की भूमिका निभाने के बजाय सत्ताधारी दल के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे थे।
मध्य प्रदेश से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार रहीं नटराजन का कहना है कि उनका नामांकन खारिज करके लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
विरोधी पक्ष की दलीलें
रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने तत्काल हस्तक्षेप की याचिका का विरोध किया। उनका तर्क था कि मामले में अंतरिम राहत देने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय की वेकेशन बेंच शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। न्यायालय का निर्णय न केवल नटराजन के राज्यसभा उम्मीदवारी के भविष्य को तय करेगा, बल्कि रिटर्निंग ऑफिसर के नामांकन अस्वीकार करने के अधिकार की सीमाओं पर भी महत्त्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।