मीनाक्षी नटराजन की सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज, राज्यसभा नामांकन विवाद में अब हाईकोर्ट का रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को 12 जून को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा, जब जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने उनकी याचिका को गैर-स्वीकार्य मानते हुए खारिज कर दिया। राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन पत्र पहले ही अस्वीकृत हो चुका था, और अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत प्राप्त संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए अपने रिट अधिकार क्षेत्र के प्रयोग से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि वह यह तय करने लगे कि किन मामलों में अनुच्छेद 32/226 के तहत हस्तक्षेप करना उचित है और किन मामलों को चुनाव याचिका के लिए भेजना है, तो यह अनुच्छेद 329 की मूल व्यवस्था के विपरीत एक नई नज़ीर स्थापित करना होगा।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी व्याख्या को प्रोत्साहन देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे यह संदेश जाएगा कि कुछ चुनावी मामलों में अदालत सीधे हस्तक्षेप कर सकती है। गौरतलब है कि पुन्नुस्वामी केस में स्थापित कानूनी सिद्धांत के अनुरूप ही यह निर्णय लिया गया।
नामांकन खारिज होने की पृष्ठभूमि
राज्यसभा नेता महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध एक आपराधिक मामले में समन जारी किया गया था, परंतु उन्होंने अपने नामांकन पत्र में इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने न्यायालय में तर्क दिया कि यदि किसी प्रत्याशी के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित हो, तो उसे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष इसकी पूर्ण जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
नटराजन की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें रखीं और जनप्रतिनिधित्व कानून का भी संदर्भ दिया, किंतु न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ।
अनुच्छेद 329 और चुनावी प्रक्रिया
अनुच्छेद 329 यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायालय बीच में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। यदि किसी व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे चुनाव संपन्न होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया — अर्थात चुनाव याचिका — के माध्यम से ही चुनौती देनी होगी। यह संवैधानिक प्रावधान चुनावी कार्यक्रम की निरंतरता और त्वरित निर्वाचन प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए है।
अब मीनाक्षी नटराजन के पास क्या विकल्प
अधिवक्ता संकेत गुप्ता के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन अब हाईकोर्ट में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटिशन) दायर कर सकती हैं। हालाँकि, चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के दौरान वे सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकतीं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया अभी पूरी तरह संपन्न नहीं हुई है। आगे की कानूनी रणनीति पर अभिषेक मनु सिंघवी के मार्गदर्शन में निर्णय लिए जाने की संभावना है।