28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मीनाक्षी नटराजन की सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज, राज्यसभा नामांकन विवाद में अब हाईकोर्ट का रास्ता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मीनाक्षी नटराजन की सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज, राज्यसभा नामांकन विवाद में अब हाईकोर्ट का रास्ता

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज कर दी — चुनाव के दौरान अदालती हस्तक्षेप की सीमा एक बार फिर स्पष्ट हुई। नामांकन में आपराधिक मामले का खुलासा न करना उनके लिए निर्णायक रूप से महंगा साबित हुआ। अब हाईकोर्ट में चुनाव याचिका ही उनका एकमात्र संवैधानिक रास्ता बचा है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 12 जून को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका अनुच्छेद 329 के तहत खारिज की।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस.
चंदूरकर की पीठ ने रिट अधिकार क्षेत्र के प्रयोग से इनकार किया।
नटराजन पर आरोप — राज्यसभा नामांकन पत्र में लंबित आपराधिक मामले का उल्लेख न करना।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने नटराजन का पक्ष रखा; मुकुल रोहतगी ने विपक्षी दलीलें दीं।
अब नटराजन के पास हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने का एकमात्र संवैधानिक विकल्प।

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को 12 जून को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा, जब जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने उनकी याचिका को गैर-स्वीकार्य मानते हुए खारिज कर दिया। राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन पत्र पहले ही अस्वीकृत हो चुका था, और अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका

पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत प्राप्त संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए अपने रिट अधिकार क्षेत्र के प्रयोग से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि वह यह तय करने लगे कि किन मामलों में अनुच्छेद 32/226 के तहत हस्तक्षेप करना उचित है और किन मामलों को चुनाव याचिका के लिए भेजना है, तो यह अनुच्छेद 329 की मूल व्यवस्था के विपरीत एक नई नज़ीर स्थापित करना होगा।

न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी व्याख्या को प्रोत्साहन देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे यह संदेश जाएगा कि कुछ चुनावी मामलों में अदालत सीधे हस्तक्षेप कर सकती है। गौरतलब है कि पुन्नुस्वामी केस में स्थापित कानूनी सिद्धांत के अनुरूप ही यह निर्णय लिया गया।

नामांकन खारिज होने की पृष्ठभूमि

राज्यसभा नेता महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध एक आपराधिक मामले में समन जारी किया गया था, परंतु उन्होंने अपने नामांकन पत्र में इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने न्यायालय में तर्क दिया कि यदि किसी प्रत्याशी के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित हो, तो उसे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष इसकी पूर्ण जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

नटराजन की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें रखीं और जनप्रतिनिधित्व कानून का भी संदर्भ दिया, किंतु न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ।

अनुच्छेद 329 और चुनावी प्रक्रिया

अनुच्छेद 329 यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायालय बीच में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। यदि किसी व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे चुनाव संपन्न होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया — अर्थात चुनाव याचिका — के माध्यम से ही चुनौती देनी होगी। यह संवैधानिक प्रावधान चुनावी कार्यक्रम की निरंतरता और त्वरित निर्वाचन प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए है।

अब मीनाक्षी नटराजन के पास क्या विकल्प

अधिवक्ता संकेत गुप्ता के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन अब हाईकोर्ट में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटिशन) दायर कर सकती हैं। हालाँकि, चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के दौरान वे सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकतीं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया अभी पूरी तरह संपन्न नहीं हुई है। आगे की कानूनी रणनीति पर अभिषेक मनु सिंघवी के मार्गदर्शन में निर्णय लिए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु यह एक बड़े सवाल को उजागर करता है — क्या नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता के नियम सभी दलों के उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होते हैं? मीनाक्षी नटराजन का मामला इस बात की याद दिलाता है कि लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा न करना किसी भी प्रत्याशी के लिए कानूनी रूप से घातक हो सकता है। अनुच्छेद 329 की व्याख्या में न्यायालय ने पुन्नुस्वामी नज़ीर को दोहराया — यह न्यायिक संयम का परिचायक है, लेकिन इससे चुनावी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित उम्मीदवारों के लिए त्वरित न्याय का प्रश्न अनुत्तरित रहता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन की सुप्रीम कोर्ट याचिका क्यों खारिज हुई?
सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत चुनाव प्रक्रिया के दौरान अदालती हस्तक्षेप पर लगी संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए याचिका को गैर-स्वीकार्य माना। न्यायालय ने कहा कि यदि वह कुछ मामलों में हस्तक्षेप करे तो यह पुन्नुस्वामी केस में स्थापित कानूनी सिद्धांत के विरुद्ध होगा।
अनुच्छेद 329 क्या कहता है?
अनुच्छेद 329 यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायालय बीच में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। चुनाव पर आपत्ति होने पर संबंधित व्यक्ति को चुनाव संपन्न होने के बाद निर्धारित चुनाव याचिका प्रक्रिया के माध्यम से ही चुनौती देनी होगी।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र क्यों खारिज हुआ था?
अधिवक्ता संकेत गुप्ता के अनुसार, नटराजन के विरुद्ध एक आपराधिक मामले में समन जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने राज्यसभा नामांकन पत्र में इस जानकारी का उल्लेख नहीं किया। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत यह अनिवार्य है कि प्रत्याशी लंबित आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी निर्वाचन अधिकारी को दे।
अब मीनाक्षी नटराजन के पास क्या कानूनी विकल्प हैं?
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद नटराजन हाईकोर्ट में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटिशन) दायर कर सकती हैं। हालाँकि, चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के दौरान वे सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकतीं।
इस मामले में किन वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलीलें रखीं?
नटराजन की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें रखीं, जबकि विपक्षी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क प्रस्तुत किए। राज्यसभा नेता महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने मीडिया को सुनवाई का विवरण दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले