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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: हैदराबाद अदालत में लंबित केस बना विवाद की जड़

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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: हैदराबाद अदालत में लंबित केस बना विवाद की जड़

सारांश

मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इसलिए रद्द हुआ क्योंकि हैदराबाद अदालत में लंबित एक आपराधिक मामले का जिक्र उनके हलफनामे में नहीं था। भाजपा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की शिकायत पर कार्रवाई हुई — और यह 'कागज' तेलंगाना से आए, जिसने नई राजनीतिक उलझन पैदा कर दी है।

मुख्य बातें

मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द किया।
हैदराबाद के चौथे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में बीएनएसएस धारा 223 के तहत दर्ज निजी शिकायत में वह चौथी प्रतिवादी हैं।
अदालत ने उन्हें 17 सितंबर 2025 को पेश होने का निर्देश दिया था; 28 मई 2025 को एफआईआर दर्ज हुई।
भाजपा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की शिकायत पर कार्रवाई हुई; उन्होंने माना कि 'कागज' तेलंगाना के एक कांग्रेस नेता से मिले थे।
कांग्रेस का दावा — 2022 की पहली पुलिस शिकायत में नटराजन का नाम नहीं था और पूर्व की सभी शिकायतें बंद हो चुकी हैं।
बीआरएस नेता ने तेलंगाना के गृह मंत्री की संभावित भूमिका पर सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन विवादों में घिर गया है, क्योंकि हैदराबाद की एक अदालत में कथित तौर पर लंबित एक आपराधिक मामले का उल्लेख उनके नामांकन हलफनामे में नहीं किया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर ने यह नामांकन रद्द कर दिया है, जिससे पार्टी के भीतर और बाहर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद हैदराबाद के चौथे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में बीएनएसएस की धारा 223 के तहत दायर एक निजी शिकायत से जुड़ा है। शिकायत 2025 में दर्ज की गई थी, जिसमें मीनाक्षी नटराजन को चौथे प्रतिवादी के रूप में सूचीबद्ध किया गया। अदालत ने उन्हें 17 सितंबर 2025 को पेश होने और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

शिकायतकर्ता श्रीलता 2002 से 2007 तक तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के टिकट पर ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) की कॉर्पोरेटर रहीं। उन्होंने कांग्रेस नेता शिव कुमार रेड्डी और उनके सहयोगियों पर जान का खतरा होने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

नटराजन के खिलाफ आरोप क्या हैं

शिकायतकर्ता ने मीनाक्षी नटराजन सहित कुल सात कांग्रेस नेताओं को प्रतिवादी बनाया। उसका तर्क था कि इन नेताओं को उसके साथ हो रही 'परेशानी' और 'धमकियों' की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। शिकायत पर अदालत के संज्ञान के बाद 28 मई 2025 को एफआईआर दर्ज की गई।

कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, 2022 में श्रीलता की तरफ से दर्ज कराई गई पहली पुलिस शिकायत में नटराजन का नाम शामिल नहीं था और सबूतों के अभाव में वह मामला बंद कर दिया गया था। बाद में हैदराबाद और बेंगलुरु में दायर उनकी अन्य निजी शिकायतें भी बंद हो चुकी हैं। पार्टी का कहना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

भाजपा की भूमिका और राजनीतिक विवाद

मध्य प्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर ने कथित तौर पर वरिष्ठ भाजपा नेता और मोहन यादव सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नामांकन रद्द किया। विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उन्हें तेलंगाना के एक कांग्रेस नेता से 'कागज' मिले थे — इस बयान ने नई बहस छेड़ दी है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) नेता कृष्णंक मन्ने ने सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश भाजपा को यह जानकारी किसने और क्यों पहुँचाई, और क्या इसमें तेलंगाना के गृह मंत्री की कोई भूमिका है। बीआरएस का दावा है कि नटराजन ने मूसी नदी सौंदर्यीकरण परियोजना, खम्मम में घरों की तोड़फोड़ और हैदराबाद विश्वविद्यालय में पेड़ों की कटाई जैसे विवादास्पद मुद्दों पर तेलंगाना सरकार का विरोध किया था।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि पिछले साल तेलंगाना के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के इंचार्ज को गांधी भवन भेजे गए एक कानूनी नोटिस में भी नटराजन का इस मामले में प्रतिवादी होना उजागर हुआ था। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस इस नामांकन विवाद को कानूनी और राजनीतिक स्तर पर कैसे संभालती है — और क्या पार्टी किसी वैकल्पिक उम्मीदवार पर विचार करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह संकेत देता है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर ही असंतोष की धाराएँ बह रही हैं। बीआरएस का तेलंगाना गृह मंत्री पर सवाल उठाना इस पहेली में एक और परत जोड़ता है। मूल प्रश्न यह है कि क्या हलफनामे में खुलासा न करना कानूनी चूक थी या जानबूझकर की गई लापरवाही — यही तय करेगा कि नटराजन की राज्यसभा यात्रा पुनर्जीवित होगी या नहीं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन क्यों रद्द हुआ?
रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन इसलिए रद्द किया क्योंकि हैदराबाद की एक अदालत में उनके खिलाफ कथित तौर पर लंबित आपराधिक मामले का उल्लेख उनके नामांकन हलफनामे में नहीं था। भाजपा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई।
हैदराबाद अदालत में नटराजन के खिलाफ क्या मामला है?
यह 2025 में हैदराबाद के चौथे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में बीएनएसएस की धारा 223 के तहत दर्ज एक निजी शिकायत है। शिकायतकर्ता श्रीलता ने सात कांग्रेस नेताओं को प्रतिवादी बनाया, जिनमें नटराजन चौथी प्रतिवादी हैं।
कांग्रेस इस मामले पर क्या कह रही है?
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार 2022 की पहली पुलिस शिकायत में नटराजन का नाम नहीं था और सबूतों के अभाव में वह मामला बंद हो गया था। हैदराबाद और बेंगलुरु में बाद की निजी शिकायतें भी बंद की जा चुकी हैं; पार्टी इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बता रही है।
कैलाश विजयवर्गीय की इस विवाद में क्या भूमिका है?
मोहन यादव सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रिटर्निंग ऑफिसर के पास शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने स्वयं माना कि उन्हें तेलंगाना के एक कांग्रेस नेता से संबंधित 'कागज' मिले थे, जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया कि पार्टी के भीतर से ही यह जानकारी क्यों और कैसे लीक हुई।
बीआरएस ने इस मामले में क्या सवाल उठाए हैं?
बीआरएस नेता कृष्णंक मन्ने ने पूछा है कि मध्य प्रदेश भाजपा को यह जानकारी किसने दी और क्या तेलंगाना के गृह मंत्री की इसमें कोई भूमिका है। बीआरएस का यह भी दावा है कि नटराजन ने मूसी नदी परियोजना और खम्मम में घरों की तोड़फोड़ जैसे मुद्दों पर तेलंगाना सरकार का विरोध किया था।
राष्ट्र प्रेस
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