मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: हैदराबाद अदालत में लंबित केस बना विवाद की जड़
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन विवादों में घिर गया है, क्योंकि हैदराबाद की एक अदालत में कथित तौर पर लंबित एक आपराधिक मामले का उल्लेख उनके नामांकन हलफनामे में नहीं किया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर ने यह नामांकन रद्द कर दिया है, जिससे पार्टी के भीतर और बाहर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद हैदराबाद के चौथे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में बीएनएसएस की धारा 223 के तहत दायर एक निजी शिकायत से जुड़ा है। शिकायत 2025 में दर्ज की गई थी, जिसमें मीनाक्षी नटराजन को चौथे प्रतिवादी के रूप में सूचीबद्ध किया गया। अदालत ने उन्हें 17 सितंबर 2025 को पेश होने और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
शिकायतकर्ता श्रीलता 2002 से 2007 तक तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के टिकट पर ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) की कॉर्पोरेटर रहीं। उन्होंने कांग्रेस नेता शिव कुमार रेड्डी और उनके सहयोगियों पर जान का खतरा होने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
नटराजन के खिलाफ आरोप क्या हैं
शिकायतकर्ता ने मीनाक्षी नटराजन सहित कुल सात कांग्रेस नेताओं को प्रतिवादी बनाया। उसका तर्क था कि इन नेताओं को उसके साथ हो रही 'परेशानी' और 'धमकियों' की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। शिकायत पर अदालत के संज्ञान के बाद 28 मई 2025 को एफआईआर दर्ज की गई।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, 2022 में श्रीलता की तरफ से दर्ज कराई गई पहली पुलिस शिकायत में नटराजन का नाम शामिल नहीं था और सबूतों के अभाव में वह मामला बंद कर दिया गया था। बाद में हैदराबाद और बेंगलुरु में दायर उनकी अन्य निजी शिकायतें भी बंद हो चुकी हैं। पार्टी का कहना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
भाजपा की भूमिका और राजनीतिक विवाद
मध्य प्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर ने कथित तौर पर वरिष्ठ भाजपा नेता और मोहन यादव सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नामांकन रद्द किया। विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उन्हें तेलंगाना के एक कांग्रेस नेता से 'कागज' मिले थे — इस बयान ने नई बहस छेड़ दी है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) नेता कृष्णंक मन्ने ने सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश भाजपा को यह जानकारी किसने और क्यों पहुँचाई, और क्या इसमें तेलंगाना के गृह मंत्री की कोई भूमिका है। बीआरएस का दावा है कि नटराजन ने मूसी नदी सौंदर्यीकरण परियोजना, खम्मम में घरों की तोड़फोड़ और हैदराबाद विश्वविद्यालय में पेड़ों की कटाई जैसे विवादास्पद मुद्दों पर तेलंगाना सरकार का विरोध किया था।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि पिछले साल तेलंगाना के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के इंचार्ज को गांधी भवन भेजे गए एक कानूनी नोटिस में भी नटराजन का इस मामले में प्रतिवादी होना उजागर हुआ था। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस इस नामांकन विवाद को कानूनी और राजनीतिक स्तर पर कैसे संभालती है — और क्या पार्टी किसी वैकल्पिक उम्मीदवार पर विचार करती है।