मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: दिग्विजय सिंह बोले — 'असंवैधानिक, लोकतंत्र की हत्या'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 10 जून को भोपाल में मीडिया से बातचीत में रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को 'असंवैधानिक' और 'अस्वीकार्य' करार दिया। पार्टी ने इस मामले को लोकतंत्र पर सीधे हमले के रूप में पेश किया है।
मुख्य घटनाक्रम
दिग्विजय सिंह ने कहा कि नामांकन रद्द करने का यह फैसला 'बुरी नीयत' से लिया गया प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज नहीं है — केवल एक नोटिस जारी हुआ है, जिसका उल्लेख नामांकन पत्र में करने का कोई प्रावधान भी नहीं है। उनके अनुसार, 'यह सरासर सीट चोरी है।'
उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी ऐसे अनेक मामले हुए हैं जिनमें इस तरह की बातों को नजरअंदाज किया गया, लेकिन इस बार नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया गया — जो उनके अनुसार 'बहुत आपत्तिजनक' है।
एआईसीसी प्रतिनिधिमंडल की चुनाव आयोग से मुलाकात
दिग्विजय सिंह ने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का एक प्रतिनिधिमंडल इस मामले में चुनाव आयोग से मुलाकात कर रहा है। उन्होंने कहा कि बैठक की विस्तृत जानकारी बाद में सामने आएगी, लेकिन पार्टी इस मुद्दे पर 'एकजुट होकर लड़ेगी।'
कमलनाथ और जीतू पटवारी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया जाना 'पूरी तरह से असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक' है। उनके अनुसार यह घटनाक्रम यह बताता है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) देश में लोकतंत्र और संविधान को कमज़ोर कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर स्तर पर इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी।
मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि 'भाजपा और चुनाव आयोग के हाथ लोकतंत्र के खून से सने हुए हैं।' उन्होंने बताया कि इस फैसले के विरोध में भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास रखकर अपना विरोध दर्ज कराया।
आम जनता और राजनीतिक असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्यसभा चुनावों की प्रक्रिया चल रही है और विपक्षी दलों की नज़र चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर टिकी है। गौरतलब है कि नामांकन रद्द करने की यह प्रक्रिया और उसके आधार — जिसमें केवल एक नोटिस का उल्लेख है — संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच भी बहस का विषय बन सकती है।
क्या होगा आगे
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चुनौती देगी। AICC प्रतिनिधिमंडल और चुनाव आयोग की बैठक के नतीजे पार्टी की अगली रणनीति तय करेंगे। पार्टी का कहना है कि संघर्ष जारी रहेगा।