27 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: भाजपा के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित

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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: भाजपा के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित

सारांश

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीनों सीटें BJP के खाते में गईं — बिना एक भी वोट डाले। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तेलंगाना के एक लंबित मामले का खुलासा न करने के आरोप में रद्द हुआ। अब सर्वोच्च न्यायालय 12 जून को इस विवाद पर सुनवाई करेगा।

मुख्य बातें

तरुण चुघ , रजनीश अग्रवाल और महेश केवट — BJP के तीनों उम्मीदवार 11 जून 2026 को मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित।
कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द — आरोप: हलफनामे में तेलंगाना के लंबित मामले की जानकारी छुपाई।
18 जून को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी; निर्वाचन अधिकारी ने तीनों को प्रमाण पत्र सौंपे।
कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की; शीर्ष अदालत 12 जून को सुनवाई करेगी।
चुनाव में कुल चार नामांकन दाखिल हुए थे; स्क्रूटनी के बाद केवल तीन वैध रहे।

मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर 11 जून 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीनों उम्मीदवार — तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट — निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। नामांकन पत्रों की जाँच में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द होने के बाद मैदान में केवल तीन उम्मीदवार बचे, जिससे 18 जून को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता ही नहीं रही। निर्वाचन अधिकारी ने तीनों विजेताओं को औपचारिक प्रमाण पत्र भी सौंप दिए।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य में राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया था, जिसमें कुल चार उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए। स्क्रूटनी के दौरान BJP की आपत्तियों के आधार पर रिटर्निंग अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया। आरोप है कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी नहीं दी थी। तीन सीटों के लिए ठीक तीन वैध उम्मीदवार शेष रहे, जिससे निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन गई।

कांग्रेस की कानूनी चुनौती

नामांकन रद्द होने के खिलाफ कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में 12 जून को सुनवाई का आश्वासन दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब निर्वाचन पहले ही पूर्ण घोषित हो चुका है, इसलिए याचिका का परिणाम प्रक्रियागत दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होगा।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में BJP के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए मतदान होने की स्थिति में भी तीनों सीटें जीतना पार्टी के लिए कठिन नहीं था। नामांकन रद्द होने की घटना ने हालाँकि राज्यसभा चुनावों में हलफनामे की पारदर्शिता और नामांकन प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि विपक्षी उम्मीदवार के पर्चे को तकनीकी आधार पर रद्द करना लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए चिंताजनक संकेत है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की 12 जून की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि क्या नटराजन के नामांकन को बहाल करने की कोई कानूनी गुंजाइश बचती है। तीनों नवनिर्वाचित सदस्य राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे और उनका कार्यकाल शीघ्र प्रारंभ होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए तीनों सीटें जीतना तय था — असली सवाल यह है कि क्या नटराजन का नामांकन तकनीकी आधार पर रद्द करना उचित प्रक्रिया थी या राजनीतिक रणनीति। राज्यसभा चुनावों में हलफनामे की शर्तें कड़ी हैं, लेकिन विपक्षी उम्मीदवारों के खिलाफ इनका चयनात्मक उपयोग बार-बार विवाद का विषय बनता है। सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया कानूनी कसौटी पर खरी उतरती है — और इसका असर भविष्य के चुनावों में नामांकन प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में कौन निर्वाचित हुए?
भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवार — तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट — 11 जून 2026 को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। कांग्रेस का कोई वैध उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा, जिससे मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों रद्द किया गया?
रिटर्निंग अधिकारी ने BJP की आपत्तियों के बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज किया कि उन्होंने अपने हलफनामे में तेलंगाना में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी नहीं दी थी। राज्यसभा चुनावों में उम्मीदवारों के लिए सभी लंबित मामलों का खुलासा अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने 12 जून को इस याचिका पर सुनवाई का आश्वासन दिया है। कांग्रेस ने नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
18 जून को मतदान क्यों नहीं हुआ?
चूँकि तीन सीटों के लिए नामांकन स्क्रूटनी के बाद केवल तीन वैध उम्मीदवार ही बचे, इसलिए निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन गई और 18 जून को होने वाले मतदान की कोई आवश्यकता नहीं रही।
इस चुनाव का मध्य प्रदेश की राजनीति पर क्या असर होगा?
BJP पहले से ही मध्य प्रदेश विधानसभा में बहुमत में है; तीनों राज्यसभा सीटें जीतने से राज्यसभा में उसकी उपस्थिति और मजबूत होगी। कांग्रेस की सुप्रीम कोर्ट याचिका नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक महत्त्वपूर्ण कानूनी नजीर स्थापित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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