मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026: भाजपा के तीसरे प्रत्याशी महेश केवट का नामांकन, तीनों सीटें जीतने का दावा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीसरे राज्यसभा प्रत्याशी महेश केवट ने सोमवार, 8 जून 2026 को भोपाल में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जिसके साथ ही मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले भाजपा ने तीनों सीटों पर अपनी जीत का दावा किया है।
नामांकन प्रक्रिया और उम्मीदवार
मध्य प्रदेश की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों पर कुल चार उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। नामांकन दाखिल करने से पूर्व महेश केवट ने भाजपा प्रदेश कार्यालय स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना की और पार्टी के संस्थापक नेताओं पं. दीनदयाल उपाध्याय तथा डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।
मुख्यमंत्री और पार्टी नेताओं की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नामांकन के बाद कहा कि भाजपा के तीनों प्रत्याशी विजयी होंगे। उन्होंने महेश केवट की उम्मीदवारी को सामाजिक समरसता की परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने निषादराज को सम्मान दिया था, उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए पार्टी ने यह निर्णय लिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने भी दावा किया कि पार्टी के पास तीनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है।
महेश केवट का वक्तव्य
राज्यसभा प्रत्याशी महेश केवट ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाना भाजपा की कार्यकर्ता-आधारित कार्य संस्कृति को दर्शाता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी के विश्वास पर खरा उतरते हुए समाज की अपेक्षाओं को पूरा करने का पूरा प्रयास करेंगे। इस अवसर पर भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
राजनीतिक समीकरण और आगे की राह
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए पार्टी का तीन सीटों पर दावा राजनीतिक रूप से प्रासंगिक है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं और 18 जून के मतदान से पहले दोनों दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। कांग्रेस की एकमात्र प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी यह संकेत देती है कि विपक्षी दल संख्या बल की वास्तविकता को स्वीकार करते हुए सीमित दाँव लगा रहा है।