मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: विजयवर्गीय का बड़ा संकेत — तीसरा उम्मीदवार उतरा तो जीत भी पक्की करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार, 5 जून 2026 को इंदौर में पत्रकारों से बात करते हुए आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय नेतृत्व किसी तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का निर्णय लेता है, तो पार्टी उसकी जीत भी सुनिश्चित करने में सक्षम है। यह बयान 18 जून को होने वाले मतदान से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
BJP ने 18 जून के राज्यसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य के वरिष्ठ नेता रजनीश अग्रवाल को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व लोकसभा सांसद और कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य मीनाक्षी नटराजन को अपना प्रत्याशी बनाया है। विजयवर्गीय का यह बयान उम्मीदवारों की घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया है।
विजयवर्गीय ने दोनों घोषित उम्मीदवारों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर संगठन की सेवा की है और उनका नामांकन उनके योगदान की स्वाभाविक पहचान है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ये दोनों निश्चित रूप से जीतेंगे, लेकिन अगर पार्टी किसी तीसरे उम्मीदवार के बारे में फैसला करती है, तो हम उनकी जीत भी सुनिश्चित करेंगे।'
संख्याबल का गणित
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के वोट आवश्यक हैं। BJP के पास फिलहाल 165 विधायक हैं, जिससे दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद उसके पास 49 अतिरिक्त वोट बचते हैं। यह अतिरिक्त संख्या किसी तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन यदि कांग्रेस के कुछ विधायक अनुपस्थित रहें या उनके वोट अमान्य हों, तो समीकरण बदल सकता है।
कांग्रेस की प्रभावी संख्या 62 विधायक है — मीनाक्षी नटराजन को जिताने के लिए आवश्यक 58 से चार अधिक। हालांकि, यदि कांग्रेस के 10 या अधिक विधायकों के वोट अमान्य हो जाते हैं या वे मतदान से दूर रहते हैं, तो BJP के संभावित तीसरे उम्मीदवार की राह खुल सकती है। विधानसभा में एक सीट भारतीय आदिवासी पार्टी के पास भी है।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक जानकारों के अनुसार विजयवर्गीय का यह बयान BJP की रणनीतिक सतर्कता को दर्शाता है — पार्टी अपने विकल्प खुले रखना चाहती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में BJP की विधानसभा में भारी बहुमत के बावजूद तीसरी सीट का गणित सीधा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त वोट, प्राथमिकता वोटों का हस्तांतरण और मतदान से दूरी — ये तीनों कारक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
आगे क्या होगा
18 जून को मतदान होना है। यदि BJP केंद्रीय नेतृत्व तीसरे उम्मीदवार को उतारने का निर्णय लेता है, तो नामांकन की अंतिम तिथि से पहले घोषणा अपेक्षित होगी। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपना सकती है। चुनाव परिणाम मध्य प्रदेश में दोनों दलों की संगठनात्मक ताकत की असली परीक्षा होगी।