मध्य प्रदेश राज्यसभा: भाजपा ने ओबीसी नेता महेश केवट को तीसरी सीट के लिए उतारा, क्रॉस-वोटिंग पर टिकी नज़र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए महेश केवट को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 8 जून 2026 को नामांकन दाखिल करने वाले केवट बुंदेलखंड के निवारी जिले से आते हैं और केवट समुदाय (ओबीसी) से संबंध रखते हैं। यह चयन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के सप्ताहांत मंथन और केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद अंतिम समय में किया गया।
चुनावी गणित और क्रॉस-वोटिंग की चुनौती
पहली दो सीटों के बाद विधानसभा में केवल लगभग 48 वोट शेष बचे हैं। तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को कांग्रेस विधायकों की क्रॉस-वोटिंग से कम से कम 10 अतिरिक्त वोट हासिल करने होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा की संख्या बल के बावजूद तीसरी सीट पर जीत गणितीय रूप से अनिश्चित बनी हुई है।
महेश केवट: राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि
महेश केवट का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शहरी निकाय चुनावों के दौरान पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोपों पर उन्हें छह साल के लिए भाजपा से निष्कासित किया गया था। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि का लाभ उठाते हुए पार्टी में वापसी की।
इसी वर्ष 24 अप्रैल को राज्य सरकार ने उन्हें मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण और मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था — जो उनकी उम्मीदवारी से महज़ कुछ सप्ताह पहले हुआ।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन की रणनीति
पार्टी रणनीतिकारों के अनुसार, केवट का चयन सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की सोची-समझी रणनीति है। बुंदेलखंड में उनका मजबूत सामुदायिक प्रभाव और जमीनी स्तर पर जुड़ाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति माना जा रहा है। गौरतलब है कि ओबीसी वर्ग को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देना भाजपा की व्यापक सामाजिक इंजीनियरिंग का हिस्सा है।
तीनों सीटों की स्थिति और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार
राज्य से तीन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है — दो भाजपा और एक कांग्रेस के। कांग्रेस की रिक्त सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिन्होंने दोबारा चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। कांग्रेस ने इस सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को नामित किया है। भाजपा पहले ही पहली दो सीटों के लिए रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ के नामांकन की घोषणा कर चुकी है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें कांग्रेस विधायकों की एकजुटता पर टिकी हैं। यदि भाजपा आवश्यक क्रॉस-वोटिंग सुनिश्चित कर लेती है, तो मध्य प्रदेश में उसका राज्यसभा प्रतिनिधित्व तीन में से तीन सीटों तक पहुँच जाएगा। मतदान की तिथि निकट आने के साथ दोनों दलों की व्हिप रणनीति निर्णायक भूमिका निभाएगी।