24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश राज्यसभा: भाजपा ने ओबीसी नेता महेश केवट को तीसरी सीट के लिए उतारा, क्रॉस-वोटिंग पर टिकी नज़र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश राज्यसभा: भाजपा ने ओबीसी नेता महेश केवट को तीसरी सीट के लिए उतारा, क्रॉस-वोटिंग पर टिकी नज़र

सारांश

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा ने ओबीसी नेता महेश केवट को उतारकर सामाजिक संतुलन का दांव खेला है — लेकिन जीत के लिए कांग्रेस के कम से कम 10 विधायकों की क्रॉस-वोटिंग ज़रूरी है। यह सीट असल में संख्याओं का नहीं, दलबदल की राजनीति का खेल है।

मुख्य बातें

महेश केवट ने 8 जून 2026 को मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया।
भाजपा को जीत के लिए कांग्रेस विधायकों से कम से कम 10 क्रॉस-वोट की आवश्यकता है; पहली दो सीटों के बाद केवल 48 वोट शेष हैं।
केवट बुंदेलखंड के निवारी से हैं और केवट समुदाय (ओबीसी) से संबंध रखते हैं; पहले 6 साल के लिए भाजपा से निष्कासित हो चुके हैं।
राज्य सरकार ने 24 अप्रैल को उन्हें मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण और मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
तीनों सीटों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त होगा; कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को नामित किया है।
भाजपा के अन्य दो उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए महेश केवट को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 8 जून 2026 को नामांकन दाखिल करने वाले केवट बुंदेलखंड के निवारी जिले से आते हैं और केवट समुदाय (ओबीसी) से संबंध रखते हैं। यह चयन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के सप्ताहांत मंथन और केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद अंतिम समय में किया गया।

चुनावी गणित और क्रॉस-वोटिंग की चुनौती

पहली दो सीटों के बाद विधानसभा में केवल लगभग 48 वोट शेष बचे हैं। तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को कांग्रेस विधायकों की क्रॉस-वोटिंग से कम से कम 10 अतिरिक्त वोट हासिल करने होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा की संख्या बल के बावजूद तीसरी सीट पर जीत गणितीय रूप से अनिश्चित बनी हुई है।

महेश केवट: राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि

महेश केवट का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शहरी निकाय चुनावों के दौरान पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोपों पर उन्हें छह साल के लिए भाजपा से निष्कासित किया गया था। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि का लाभ उठाते हुए पार्टी में वापसी की।

इसी वर्ष 24 अप्रैल को राज्य सरकार ने उन्हें मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण और मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था — जो उनकी उम्मीदवारी से महज़ कुछ सप्ताह पहले हुआ।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन की रणनीति

पार्टी रणनीतिकारों के अनुसार, केवट का चयन सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की सोची-समझी रणनीति है। बुंदेलखंड में उनका मजबूत सामुदायिक प्रभाव और जमीनी स्तर पर जुड़ाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति माना जा रहा है। गौरतलब है कि ओबीसी वर्ग को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देना भाजपा की व्यापक सामाजिक इंजीनियरिंग का हिस्सा है।

तीनों सीटों की स्थिति और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार

राज्य से तीन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है — दो भाजपा और एक कांग्रेस के। कांग्रेस की रिक्त सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिन्होंने दोबारा चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। कांग्रेस ने इस सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को नामित किया है। भाजपा पहले ही पहली दो सीटों के लिए रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ के नामांकन की घोषणा कर चुकी है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें कांग्रेस विधायकों की एकजुटता पर टिकी हैं। यदि भाजपा आवश्यक क्रॉस-वोटिंग सुनिश्चित कर लेती है, तो मध्य प्रदेश में उसका राज्यसभा प्रतिनिधित्व तीन में से तीन सीटों तक पहुँच जाएगा। मतदान की तिथि निकट आने के साथ दोनों दलों की व्हिप रणनीति निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें ओबीसी प्रतिनिधित्व को चुनावी संख्या-गणित से जोड़ा जाता है। लेकिन विरोधाभास यह है कि जिस उम्मीदवार को पार्टी ने एक बार छह साल के लिए निष्कासित किया, वही आज उसकी राज्यसभा उम्मीद बन गया है — यह दर्शाता है कि सामाजिक समीकरण कभी-कभी अनुशासन से बड़े हो जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या भाजपा कांग्रेस के 10 विधायकों को तोड़ पाएगी — और यदि नहीं, तो यह 'अप्रत्याशित' चयन एक महंगी रणनीतिक चूक साबित होगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महेश केवट कौन हैं और उन्हें भाजपा ने क्यों चुना?
महेश केवट बुंदेलखंड के निवारी से आने वाले ओबीसी (केवट समुदाय) नेता हैं, जिन्हें भाजपा ने मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार बनाया है। पार्टी रणनीतिकार उनके सामुदायिक प्रभाव और बुंदेलखंड में जमीनी जुड़ाव को सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन के लिए अहम मानते हैं।
मध्य प्रदेश में तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए भाजपा को क्या करना होगा?
पहली दो सीटों के बाद केवल लगभग 48 वोट शेष हैं और भाजपा को जीत के लिए कांग्रेस विधायकों की क्रॉस-वोटिंग से कम से कम 10 अतिरिक्त वोट चाहिए। बिना क्रॉस-वोटिंग के भाजपा के लिए तीसरी सीट जीतना गणितीय रूप से संभव नहीं है।
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों का कार्यकाल कब समाप्त होगा?
तीनों सीटों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें दो भाजपा और एक कांग्रेस (पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह) की सीट शामिल है।
कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए किसे उम्मीदवार बनाया है?
कांग्रेस ने तीसरी सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को नामित किया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है, ने दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।
महेश केवट को पहले भाजपा से क्यों निकाला गया था?
शहरी निकाय चुनावों के दौरान पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोपों पर उन्हें छह साल के लिए भाजपा से निष्कासित किया गया था। बाद में RSS की पृष्ठभूमि का लाभ उठाते हुए उन्होंने पार्टी में वापसी की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले