UP विधानसभा हंगामा: स्पीकर सतीश महाना बोले — विपक्ष के सहयोग बिना सदन नहीं चल सकता
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने 5 अगस्त 2026 को सदन में हुए हंगामे पर कड़ी नाराज़गी जताई और स्पष्ट किया कि विधानसभा सत्ता पक्ष और विपक्ष — दोनों के सहयोग से चलती है। महाना ने कहा कि उन्होंने दो घंटे से अधिक समय तक विपक्षी सदस्यों को हर मुद्दा उठाने का अवसर दिया, फिर भी स्थिति नियंत्रण से बाहर रही।
मुख्य घटनाक्रम
विधानसभा अध्यक्ष ने बुधवार सुबह मीडिया से बातचीत में कहा, 'विपक्ष का व्यवहार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। मैं उनकी सभी चिंताओं को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार था। मैंने उन्हें हर मुद्दा उठाने के लिए कहने में लगभग दो घंटे बिताए। सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखते हुए, मैंने उनके सामने हाथ भी जोड़े।' उन्होंने यह भी कहा कि 'अगर विपक्ष सहयोग नहीं करेगा तो विधानसभा नहीं चल पाएगी।'
महाना ने यह भी स्पष्ट किया कि सदन में केवल शोर-शराबे से काम नहीं चलेगा। उनके अनुसार, 'अगर विपक्ष के पास कोई मुद्दा हो, तो उस पर चर्चा की जा सकती है — सिर्फ हंगामे से सदन नहीं चलता।'
सपा विधायक सचिन यादव का निष्कासन
सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक सचिन यादव को विधानसभा सत्र से निष्कासित किया गया। स्पीकर महाना ने इस पर कहा, 'मुझे उम्मीद थी कि सचिन यादव एक पढ़े-लिखे व्यक्ति होने के नाते बेहतर व्यवहार करेंगे। लेकिन मंगलवार को मुझे बहुत निराशा हुई।'
महाना के अनुसार, जब विधानसभा में मुख्यमंत्री की तस्वीर अनुचित तरीके से प्रदर्शित की गई, तो उन्होंने सचिन यादव को उसे हटाने का निर्देश दिया। निर्देश के बावजूद यादव ने आदेश नहीं माना, जिसे स्पीकर ने 'सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन' करार दिया।
सदन की गरिमा पर स्पीकर का रुख
महाना ने ज़ोर देकर कहा कि सदन की गरिमा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि विधानसभा के सभी 403 सदस्यों का अधिकार है। उन्होंने कहा, 'इसके ऊपर कोई आक्रमण करता है, तो यह विशेषाधिकार के दायरे में आता है।' यादव के आचरण पर उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि 'उनके आचरण से मुझे आत्मग्लानि हुई।'
आगे की राह
स्पीकर महाना ने संकेत दिया कि वे आगामी सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और विपक्ष के सभी विषयों को सुनने के लिए तैयार हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा में सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। गौरतलब है कि विधानसभा की कार्यवाही में बाधा और सदस्यों का निष्कासन राज्य की संसदीय परंपराओं के लिए एक गंभीर संदेश है।