28 अक्टूबर 2026
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अभिनेत्री मधु की दीपावली पर पटाखों से परहेज की अपील, बोलीं — 'खुद बचपन में नंगे पैर दौड़ती थी पटाखों के साथ'

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अभिनेत्री मधु की दीपावली पर पटाखों से परहेज की अपील, बोलीं — 'खुद बचपन में नंगे पैर दौड़ती थी पटाखों के साथ'

सारांश

बचपन में खुद नंगे पैर पटाखे जलाने वाली अभिनेत्री मधु आज दीपावली पर आतिशबाजी से परहेज की अपील कर रही हैं। वायु प्रदूषण, सांस की बीमारियाँ और पालतू जानवरों की तकलीफ — तीन ठोस वजहें गिनाते हुए उन्होंने कहा कि असली दीपावली खुशियाँ बाँटने में है, पटाखे जलाने में नहीं।

मुख्य बातें

अभिनेत्री मधु ने 28 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया वीडियो के ज़रिए दीपावली पर पटाखों से परहेज की अपील की।
उन्होंने माना कि बचपन में वे खुद नंगे पैर दौड़कर पटाखे जलाती थीं — यह अपील उनके अपने अनुभव के विपरीत है।
पटाखों से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, जिसका असर सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर सबसे ज़्यादा पड़ता है।
पालतू कुत्तों समेत जानवर तेज़ आवाज़ से घबरा जाते हैं; मधु ने पेट ओनर्स से विशेष सतर्कता बरतने को कहा।
मधु ने सुझाया कि मिठाइयाँ बाँटकर और परिवार से मिलकर भी दीपावली की खुशियाँ भरपूर मनाई जा सकती हैं।

अभिनेत्री मधु ने 28 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के ज़रिए लोगों से इस दीपावली पर पटाखों से दूरी बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पटाखों से उठने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण शहरों की हवा को और खराब कर देता है तथा पालतू जानवरों को भी गहरा आघात पहुँचाता है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब देश के कई महानगरों में त्योहारी सीज़न से पहले ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुका है।

बचपन की यादें और आज की जिम्मेदारी

मधु ने स्वीकार किया कि पटाखों से परहेज की अपील करते हुए वे खुद एक भावनात्मक द्वंद्व महसूस करती हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए दीपावली पर पटाखे जलाना त्योहार का अहम हिस्सा हुआ करता था। मैं अपने कजिन्स के साथ पटाखों को लेकर लड़ती थी और एक-दूसरे को दिखाती थी कि कौन कितना बहादुर है। मैं हाथ में पटाखों की लड़ियाँ लेकर उन्हें जलाती थी और नंगे पैर इधर-उधर दौड़ती थी।' उनका कहना था कि उस वक़्त पैरों में चोट लगने की भी परवाह नहीं होती थी — बस त्योहार की धुन सवार रहती थी।

उन्होंने कहा, 'आज जब मैं लोगों से पटाखे न जलाने की अपील करती हूँ, तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं अपने ही बचपन की खूबसूरत यादों को न कह रही हूँ।' गौरतलब है कि इस बार उनके बच्चों का जन्मदिन भी दीपावली के आसपास पड़ रहा है, इसलिए पूरा परिवार इस पर्व को और भी उत्साह से मनाने की तैयारी में है।

वायु और ध्वनि प्रदूषण की गंभीर चिंता

मधु ने मुंबई सहित देश के अन्य बड़े शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि पटाखों से इसमें और इज़ाफा होता है। उनके अनुसार, 'कई लोग सांस से जुड़ी बीमारियों से परेशान हैं। ऐसे में त्योहार मनाते समय हमें उन लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए, जिन्हें खराब हवा के कारण तकलीफ हो सकती है।'

उन्होंने ध्वनि प्रदूषण के असर को भी रेखांकित किया। उनका कहना था, 'पटाखों की तेज़ आवाज़ लोगों को परेशान करती है और इसका असर पालतू जानवरों पर भी पड़ता है। खासकर कुत्ते तेज़ आवाज़ से घबरा जाते हैं, डर के मारे इधर-उधर भागने लगते हैं और कई बार उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है।'

पालतू जानवरों के मालिकों से विशेष अपील

अभिनेत्री ने पालतू जानवर रखने वालों से विशेष अनुरोध किया कि वे दीपावली की रात अपने पशुओं की मनोस्थिति को समझें। उन्होंने कहा कि पटाखों के शोर को कम करने में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। यह अपील उस व्यापक सामाजिक चर्चा से जुड़ती है जो पिछले कुछ वर्षों में पटाखों पर न्यायालयी प्रतिबंधों और 'ग्रीन पटाखों' की अनुमति को लेकर देशभर में चल रही है।

त्योहार मनाने के वैकल्पिक तरीके

मधु ने सुझाव दिया कि दीपावली की खुशियाँ पटाखों के बिना भी भरपूर तरीके से मनाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर, दोस्तों और परिवार से मिलकर, उन्हें गले लगाकर और मिठाइयाँ बाँटकर भी त्योहार की खुशियाँ जी सकते हैं। दीपावली का असली मकसद प्यार, खुशी और अपनापन बाँटना है — इसलिए कोशिश होनी चाहिए कि हमारी खुशियों से किसी दूसरे को परेशानी न हो।'

यह आवाज़ मनोरंजन जगत से उठने वाली उन आवाज़ों की कड़ी में एक और जुड़ाव है, जो हर साल दीपावली से पहले पर्यावरण-संवेदनशील उत्सव की वकालत करती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस तरह की सेलेब्रिटी अपीलों का आम जनता के व्यवहार पर कोई ठोस असर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि खुद अपने बचपन की आदत को चुनौती दे रही हैं, जो संदेश को ज़्यादा विश्वसनीय बनाता है। लेकिन यह भी सच है कि हर साल दीपावली से पहले सेलेब्रिटी अपीलों की एक लंबी परंपरा रही है, जिसका ज़मीनी असर सीमित ही रहा है। असली सवाल यह है कि क्या जागरूकता अभियान अकेले काफी हैं, या इसके लिए नीति-स्तर पर सख्त और सुसंगत क्रियान्वयन जरूरी है — जैसे कि न्यायालयों के निर्देशों के बावजूद प्रतिबंधित पटाखों की खुलेआम बिक्री हर साल होती रहती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिनेत्री मधु ने दीपावली पर क्या अपील की है?
मधु ने लोगों से इस दीपावली पर पटाखे न जलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वायु और ध्वनि प्रदूषण से सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों और पालतू जानवरों को नुकसान होता है।
मधु ने खुद बचपन में पटाखे कैसे जलाए थे?
मधु ने बताया कि वे बचपन में अपने कजिन्स के साथ पटाखों की लड़ियाँ हाथ में लेकर नंगे पैर दौड़ती थीं और एक-दूसरे को बहादुरी दिखाती थीं। उन्होंने कहा कि उस वक़्त पैरों में चोट लगने की भी परवाह नहीं होती थी।
पटाखे पालतू जानवरों को कैसे प्रभावित करते हैं?
पटाखों की तेज़ आवाज़ से कुत्ते जैसे पालतू जानवर डर के मारे इधर-उधर भागने लगते हैं और उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। मधु ने पालतू जानवरों के मालिकों से अपील की है कि वे अपने जानवरों की परेशानी समझें और पटाखों के शोर को कम करने में मदद करें।
पटाखों के बिना दीपावली कैसे मनाएँ?
मधु के अनुसार रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर, परिवार और दोस्तों से मिलकर, उन्हें गले लगाकर और मिठाइयाँ बाँटकर दीपावली की खुशियाँ भरपूर मनाई जा सकती हैं। उनका मानना है कि त्योहार का असली मकसद प्यार और अपनापन बाँटना है।
दीपावली पर पटाखे और वायु प्रदूषण का क्या संबंध है?
पटाखे जलने से हवा में हानिकारक कण और गैसें घुल जाती हैं, जिससे शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तेज़ी से गिरता है। सांस की बीमारियों — जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस — से पीड़ित लोगों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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