अभिनेत्री मधु की दीपावली पर पटाखों से परहेज की अपील, बोलीं — 'खुद बचपन में नंगे पैर दौड़ती थी पटाखों के साथ'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री मधु ने 28 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के ज़रिए लोगों से इस दीपावली पर पटाखों से दूरी बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पटाखों से उठने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण शहरों की हवा को और खराब कर देता है तथा पालतू जानवरों को भी गहरा आघात पहुँचाता है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब देश के कई महानगरों में त्योहारी सीज़न से पहले ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुका है।
बचपन की यादें और आज की जिम्मेदारी
मधु ने स्वीकार किया कि पटाखों से परहेज की अपील करते हुए वे खुद एक भावनात्मक द्वंद्व महसूस करती हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए दीपावली पर पटाखे जलाना त्योहार का अहम हिस्सा हुआ करता था। मैं अपने कजिन्स के साथ पटाखों को लेकर लड़ती थी और एक-दूसरे को दिखाती थी कि कौन कितना बहादुर है। मैं हाथ में पटाखों की लड़ियाँ लेकर उन्हें जलाती थी और नंगे पैर इधर-उधर दौड़ती थी।' उनका कहना था कि उस वक़्त पैरों में चोट लगने की भी परवाह नहीं होती थी — बस त्योहार की धुन सवार रहती थी।
उन्होंने कहा, 'आज जब मैं लोगों से पटाखे न जलाने की अपील करती हूँ, तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं अपने ही बचपन की खूबसूरत यादों को न कह रही हूँ।' गौरतलब है कि इस बार उनके बच्चों का जन्मदिन भी दीपावली के आसपास पड़ रहा है, इसलिए पूरा परिवार इस पर्व को और भी उत्साह से मनाने की तैयारी में है।
वायु और ध्वनि प्रदूषण की गंभीर चिंता
मधु ने मुंबई सहित देश के अन्य बड़े शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि पटाखों से इसमें और इज़ाफा होता है। उनके अनुसार, 'कई लोग सांस से जुड़ी बीमारियों से परेशान हैं। ऐसे में त्योहार मनाते समय हमें उन लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए, जिन्हें खराब हवा के कारण तकलीफ हो सकती है।'
उन्होंने ध्वनि प्रदूषण के असर को भी रेखांकित किया। उनका कहना था, 'पटाखों की तेज़ आवाज़ लोगों को परेशान करती है और इसका असर पालतू जानवरों पर भी पड़ता है। खासकर कुत्ते तेज़ आवाज़ से घबरा जाते हैं, डर के मारे इधर-उधर भागने लगते हैं और कई बार उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है।'
पालतू जानवरों के मालिकों से विशेष अपील
अभिनेत्री ने पालतू जानवर रखने वालों से विशेष अनुरोध किया कि वे दीपावली की रात अपने पशुओं की मनोस्थिति को समझें। उन्होंने कहा कि पटाखों के शोर को कम करने में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। यह अपील उस व्यापक सामाजिक चर्चा से जुड़ती है जो पिछले कुछ वर्षों में पटाखों पर न्यायालयी प्रतिबंधों और 'ग्रीन पटाखों' की अनुमति को लेकर देशभर में चल रही है।
त्योहार मनाने के वैकल्पिक तरीके
मधु ने सुझाव दिया कि दीपावली की खुशियाँ पटाखों के बिना भी भरपूर तरीके से मनाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर, दोस्तों और परिवार से मिलकर, उन्हें गले लगाकर और मिठाइयाँ बाँटकर भी त्योहार की खुशियाँ जी सकते हैं। दीपावली का असली मकसद प्यार, खुशी और अपनापन बाँटना है — इसलिए कोशिश होनी चाहिए कि हमारी खुशियों से किसी दूसरे को परेशानी न हो।'
यह आवाज़ मनोरंजन जगत से उठने वाली उन आवाज़ों की कड़ी में एक और जुड़ाव है, जो हर साल दीपावली से पहले पर्यावरण-संवेदनशील उत्सव की वकालत करती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस तरह की सेलेब्रिटी अपीलों का आम जनता के व्यवहार पर कोई ठोस असर पड़ता है।