दीपावली से पहले कांग्रेस की 1 नवंबर रैली: दिल्ली व्यापारियों ने टालने की मांग की, बोले—त्योहारी कारोबार बर्बाद होगा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के व्यापारियों और मिठाई दुकान मालिकों ने 27 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेताओं से आग्रह किया कि वे 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को दीपावली के बाद के लिए स्थगित करें। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन के सबसे अहम दिनों में यह रैली उनकी आजीविका पर गहरा आघात करेगी।
व्यापारियों की चिंता: चार महीनों में पाँचवीं रैली
बंगाली मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कहा कि पिछले चार महीनों में यह पाँचवीं ऐसी रैली होगी, और इन लगातार आयोजनों ने दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। उनके अनुसार, बाज़ार में खरीदारी लगभग ठप हो जाती है, दुकानें बंद रखनी पड़ती हैं और तोड़फोड़ का भय बना रहता है।
गुप्ता ने कहा, 'कारोबारी अपने परिवार, पत्नी और बच्चों का खर्च उठाने में भी असमर्थ हो गए हैं।' उन्होंने राजनीतिक नेताओं से अपील की कि रैलियों की बजाय बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाएं, और यदि रैली करनी ही हो तो ऐसी जगह करें जहाँ किसी को परेशानी न हो।
मिठाई व्यापारियों की पीड़ा: दीपावली का सबसे बड़ा नुकसान
'बंगाली स्वीट हाउस एंड पेस्ट्री शॉप' के मालिक वर्जेश अग्रवाल ने कहा कि दीपावली एक प्रमुख त्योहार है और हर व्यापारी—चाहे छोटा हो या बड़ा—इस सीजन का बेसब्री से इंतजार करता है। उनके अनुसार, रैली के कारण दो से तीन दिनों तक व्यापारिक गतिविधियाँ काफी धीमी रहेंगी और ट्रैफिक जाम से स्थिति और बिगड़ेगी।
अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन त्योहार के इतने करीब रैली करना व्यापार और जनता दोनों के लिए कठिनाई पैदा करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि रैली दीपावली के बाद होती है, तो लोकतांत्रिक अधिकार भी सुरक्षित रहेगा और आम जनता को भी कोई परेशानी नहीं होगी।
खान मार्केट: 'हमारी अपीलें खारिज'
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कड़े शब्दों में कहा कि व्यापारियों की बार-बार की अपीलों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व—जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल हैं—अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए तैयार नहीं है।
मेहरा ने कहा, 'विरोध प्रदर्शनों और रैलियों का आर्थिक बोझ लगातार व्यापारियों को ही उठाना पड़ रहा है। हर बार मार हमें ही झेलनी पड़ती है।' उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सवाल किया कि क्या व्यापारी ही हमेशा इसकी कीमत चुकाते रहेंगे।
मेहरा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संवैधानिक और राजनीतिक नेताओं के इस्तीफे की माँग करने का एक चलन बना लिया है, और इन प्रदर्शनों का सीधा असर व्यापारियों की आजीविका पर पड़ रहा है।
व्यापारियों की मुख्य माँग
व्यापारियों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को कई बार पत्र लिखकर रैली की तारीख पर पुनर्विचार की अपील की है। उनकी एकमात्र माँग है कि यदि रैली होनी ही है, तो उसे दीपावली के बाद के लिए पुनर्निर्धारित किया जाए।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के बाज़ारों में दीपावली से पहले के सप्ताह में कारोबार चरम पर होता है। गौरतलब है कि यह पाँचवीं रैली है और इसका सीधा असर मध्यम व छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है, जो त्योहारी सीजन में पूरे साल का एक बड़ा हिस्सा कमा लेते हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल कांग्रेस की ओर से रैली स्थगित करने का कोई संकेत नहीं मिला है। यदि रैली तय समय पर होती है, तो 1 नवंबर को दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों में भारी व्यवधान की आशंका है। व्यापारी संगठन आगे भी अपनी अपीलें जारी रखने की बात कह रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि राजनीतिक नेता उनकी आर्थिक चिंताओं को संज्ञान में लेंगे।