27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली व्यापारी संगठनों की राहुल गांधी से अपील: दीपावली सीजन में रामलीला मैदान रैली टालें, ₹25,000 करोड़ के व्यापार पर संकट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली व्यापारी संगठनों की राहुल गांधी से अपील: दीपावली सीजन में रामलीला मैदान रैली टालें, ₹25,000 करोड़ के व्यापार पर संकट

सारांश

दीपावली से ठीक पहले 1 नवंबर को रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारी एकजुट हुए हैं। ₹25,000 करोड़ के व्यापार पर संकट की आशंका और मैदान की सीमित क्षमता का हवाला देते हुए संगठनों ने राहुल गांधी से रैली टालने या स्थान बदलने की अपील की है।

मुख्य बातें

दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 1 नवंबर 2026 की रामलीला मैदान रैली टालने की अपील की।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष रविकांत गर्ग के अनुसार रैली से ₹25,000 करोड़ का व्यापार प्रभावित होने की आशंका।
रामलीला मैदान की क्षमता 40,000–50,000 लोगों की है, जबकि रैली में 10–12 लाख लोगों को आमंत्रित करने की बात कही जा रही है।
व्यापारियों ने सुझाया कि रैली बुराड़ी या द्वारका जैसे बाहरी स्थानों पर हो, या 14 दिसंबर के बाद मलमास काल में आयोजित की जाए।
ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय नारंग ने स्पष्ट किया कि रैली से नहीं, उसके समय से आपत्ति है।
व्यापारियों ने सरकार, रैली आयोजकों और राहुल गांधी तीनों को अलग-अलग पत्र भेजे हैं।

दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपील की है कि 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली को त्योहारी सीजन की समाप्ति तक टाल दिया जाए। व्यापारियों का कहना है कि दीपावली और अन्य त्योहारों के ठीक पहले इस रैली से ₹25,000 करोड़ का व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। विभिन्न बाज़ार संघों ने सरकार और रैली आयोजकों को पत्र लिखकर या तो रैली स्थगित करने या उसे शहर की परिधि पर आयोजित करने की माँग रखी है।

व्यापारियों की आपत्ति और मुख्य माँगें

नई लाजपत राय मार्केट के अध्यक्ष कमल कालरा ने कहा कि रैली का व्यापार पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है और व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, 'साल में एक बार आने वाले इस बड़े त्योहार से करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।'

भागीरथ पैलेस इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि यदि रैली की अनुमति देनी ही है, तो इसे बुराड़ी या द्वारका के बाहरी इलाके में आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर अनुरोध किया था। उनका कहना था कि दुकानदार के साथ-साथ गरीब वर्ग भी इस आयोजन से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होता है।

रैली की क्षमता पर सवाल

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत गर्ग ने रैली की क्षमता को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार रामलीला मैदान की वास्तविक क्षमता 40,000 से 50,000 लोगों की है और आसपास के क्षेत्र मिलाकर अधिकतम एक लाख लोग ही समा सकते हैं। उन्होंने कहा कि 10 से 12 लाख लोगों को आमंत्रित करने की बात कही जा रही है, जो भारी अव्यवस्था का कारण बन सकती है।

गर्ग ने अपील की कि रैली कम से कम एक महीने के लिए स्थगित कर दी जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि 14 दिसंबर से 14 जनवरी के मलमास काल में रैली हो तो व्यापारियों को कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनेता या राजनीतिक दल को किसी के काम-धंधे और रोजी-रोटी छीनने का अधिकार नहीं है।

आम जनता और छोटे कारोबारियों पर असर

साइकिल व्यापारी जसप्रीत सिंह ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और सभी को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन सही समय और स्थान का चुनाव ज़रूरी है। उनका तर्क था, 'त्योहारी सीजन में अच्छे कारोबार की उम्मीद से व्यापारी और उनके कर्मचारी दोनों की रोजी-रोटी चलती है। जीएसटी संग्रह भी तभी बढ़ेगा जब व्यापार अच्छा होगा।'

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के बाज़ार दीपावली से पहले की खरीदारी से गुलज़ार रहते हैं और व्यापारी पूरे साल की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं हफ्तों में अर्जित करते हैं।

विरोध में भी संतुलन का स्वर

ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय नारंग ने स्पष्ट किया, 'हमें राहुल गांधी की रैली से कोई दिक्कत नहीं है — राहुल गांधी की रैली का समय गलत है।' उन्होंने कहा कि दीपावली एक ऐसा त्योहार है जिसमें कर्मचारियों और ग्राहकों की अपेक्षाएँ जुड़ी होती हैं। नारंग ने सवाल उठाया कि 'तलवार सदैव व्यापारी की गर्दन पर ही क्यों गिरती है?' उन्होंने इतनी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी से संवेदनशीलता की अपेक्षा जताई।

आगे की राह

गौरतलब है कि दिल्ली के व्यापार संगठनों ने सरकार, रैली आयोजकों और राहुल गांधी — तीनों को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। अभी तक इंडिया ब्लॉक की ओर से रैली स्थगित करने या स्थान बदलने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। व्यापारिक संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि समय पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो वे और कदम उठाने पर विचार करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का सवाल भी है। दूसरी ओर, विपक्ष का तर्क है कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को व्यावसायिक हितों के आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए। इस विवाद की असली परीक्षा यह होगी कि क्या राजनीतिक दल और प्रशासन मिलकर ऐसा ढाँचा बना सकते हैं जिसमें लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और आर्थिक गतिविधि दोनों की रक्षा हो।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली के व्यापारी इंडिया ब्लॉक की रैली का विरोध क्यों कर रहे हैं?
व्यापारियों का कहना है कि 1 नवंबर 2026 को दीपावली से ठीक पहले रामलीला मैदान में रैली होने से त्योहारी खरीदारी बाधित होगी और ₹25,000 करोड़ तक का व्यापार प्रभावित हो सकता है। उनकी आपत्ति रैली से नहीं, उसके समय और स्थान से है।
व्यापारियों ने रैली के लिए क्या विकल्प सुझाए हैं?
व्यापारी संगठनों ने दो विकल्प सुझाए हैं — रैली को बुराड़ी या द्वारका के बाहरी इलाके में स्थानांतरित किया जाए, अथवा इसे 14 दिसंबर के बाद मलमास काल में आयोजित किया जाए। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष रविकांत गर्ग ने कहा कि उस दौरान रोज़ रैलियाँ हों तो भी कोई आपत्ति नहीं है।
रामलीला मैदान में कितने लोग समा सकते हैं और क्या समस्या है?
रविकांत गर्ग के अनुसार रामलीला मैदान की वास्तविक क्षमता 40,000 से 50,000 लोगों की है और आसपास मिलाकर अधिकतम एक लाख। रैली आयोजकों द्वारा 10 से 12 लाख लोगों को आमंत्रित करने की बात कही जा रही है, जिससे भारी अव्यवस्था की आशंका है।
किन व्यापारिक संगठनों ने इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई है?
नई लाजपत राय मार्केट एसोसिएशन, भागीरथ पैलेस इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल और ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की है। इन संगठनों ने सरकार, रैली आयोजकों और राहुल गांधी को अलग-अलग पत्र लिखे हैं।
क्या इंडिया ब्लॉक ने रैली टालने या स्थान बदलने पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक इंडिया ब्लॉक की ओर से रैली स्थगित करने या स्थान बदलने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। व्यापारिक संगठनों ने संकेत दिया है कि सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने पर वे आगे के कदम उठाने पर विचार करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 8 घंटे पहले
  4. कल
  5. कल
  6. 2 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 3 दिन पहले