ओला-उबर-रैपिडो चालकों की जाँच करें, नियम तोड़ने वालों पर FIR दर्ज हो: परिवहन मंत्री सरनाईक
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 27 अक्टूबर 2026 को मोटर परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि रैपिडो, ओला और उबर जैसी ऐप-आधारित यात्री परिवहन सेवाओं में कार्यरत चालकों की गहन जाँच की जाए। जाँच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएँ। यह निर्देश मुंबई के माहिम इलाके में एक रैपिडो चालक के खिलाफ आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की कार्रवाई के बाद हुई समीक्षा बैठक के दौरान जारी किए गए।
माहिम ATS कार्रवाई की पृष्ठभूमि
मुंबई के माहिम इलाके में रैपिडो बाइक टैक्सी चलाने वाले एक व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट से कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की गई थी, जिसके बाद ATS ने उसके खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। हालाँकि, शुरुआती जाँच में संबंधित व्यक्ति के पाकिस्तान में किसी व्यक्ति या संगठन से सीधे संबंध होने का कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है।
सरनाईक के निर्देश: क्या बदलेगा
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐप-आधारित सेवाओं में काम करने वाले चालकों की पृष्ठभूमि, लाइसेंस की वैधता, आवश्यक दस्तावेजों और नियमों के पालन की विस्तृत जाँच की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी घटना के बाद प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई करने के बजाय इन सेवाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मंत्री ने यह भी कहा कि यदि मौजूदा कानूनों में आवश्यक प्रावधानों की कमी है, तो इन चालकों को कानूनी दायरे में लाने के लिए एक अलग संशोधित कानून बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही, इन सेवाओं को राज्य परिवहन प्राधिकरण के नियामक दायरे में लाने के लिए आवश्यक कानूनी संशोधन भी प्रस्तावित किए जाएँ।
यात्री सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं
समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यात्रियों की सुरक्षा, परिवहन व्यवस्था में अनुशासन और कानून के पालन के मामले में कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने, शिकायतों को प्राथमिकता देने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। गौरतलब है कि ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं के तेज़ विस्तार के साथ चालकों के सत्यापन से जुड़े सवाल देश के कई राज्यों में उठते रहे हैं।
व्यापक नियामक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में ऐप-आधारित राइड-हेलिंग सेवाओं के नियमन को लेकर बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि इन प्लेटफ़ॉर्मों पर चालकों के सत्यापन की जिम्मेदारी अभी भी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है — कंपनियाँ अपनी प्रक्रियाओं का हवाला देती हैं, जबकि सरकारी तंत्र पारंपरिक परिवहन नियमों पर निर्भर रहता है। मंत्री सरनाईक के निर्देश इस खाई को पाटने की दिशा में पहला औपचारिक कदम माने जा रहे हैं।