1 लाख से अधिक गैर-मराठी वाहन चालकों ने सीखी मराठी, परिवहन मंत्री सरनाईक ने की 15 अगस्त तक जुड़ने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 6 अगस्त 2026 को बताया कि राज्य भर में 1 लाख से अधिक गैर-मराठी कमर्शियल यात्री वाहन चालकों ने व्यावहारिक मराठी की शिक्षा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। उन्होंने शेष चालकों से 15 अगस्त से पहले इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
अभियान की पृष्ठभूमि
राज्य परिवहन विभाग ने एक अनिवार्य नियम लागू किया है, जिसके तहत महाराष्ट्र में सभी कमर्शियल यात्री वाहन चालकों — जिनमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, कैब और बस चालक शामिल हैं — के लिए व्यावहारिक मराठी का ज्ञान अनिवार्य है। इसी नियम के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए 'हिंदुहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी कक्षा अभियान' चलाया जा रहा है।
यह अभियान राज्य सरकार के मराठी भाषा विभाग, मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है और धीरे-धीरे राज्यव्यापी जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
मंत्री सरनाईक की प्रतिक्रिया
एक चुनाव अभियान समीक्षा बैठक की अध्यक्षता के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री सरनाईक ने अभियान को मिली प्रतिक्रिया पर संतोष जताया। उन्होंने कहा, 'यदि आप महाराष्ट्र में काम करना चाहते हैं, तो आपको मराठी से जुड़ना होगा। यह कोई बाध्यता की भाषा नहीं, बल्कि स्नेह की भाषा है। प्रत्येक चालक जो यात्रियों से मराठी में कुछ प्रेम भरे शब्द बोलता है, वह महाराष्ट्र की संस्कृति का सम्मान करने वाले राजदूत के रूप में कार्य करता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मराठी सिर्फ संचार का माध्यम नहीं है — यह महाराष्ट्र की पहचान और संस्कृति की आत्मा है। यात्रियों से बातचीत में मराठी का प्रयोग करने से न केवल दैनिक संवाद सुगम होगा, बल्कि लोगों के बीच स्नेह के बंधन भी मज़बूत होंगे।'
मराठी के शास्त्रीय भाषा दर्जे का संदर्भ
मंत्री सरनाईक ने यह भी रेखांकित किया कि मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद इस अभियान में गैर-मराठी चालकों की भागीदारी और भी सकारात्मक रही है। उनके अनुसार, यह स्वतःस्फूर्त भागीदारी शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के भाषा-प्रेम को सच्ची श्रद्धांजलि है।
आम चालकों पर असर
अभियान में भाग लेने वाले प्रत्येक चालक को न केवल विभागीय नियमों का पालन करने वाला माना जा रहा है, बल्कि उन्हें महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत के प्रति संवेदनशील नागरिक के रूप में भी देखा जा रहा है। यह पहल विशेष रूप से मुंबई जैसे बहुभाषी शहर में उन लाखों प्रवासी चालकों को प्रभावित करती है जो रोज़ाना लाखों यात्रियों की सेवा करते हैं।
आगे की राह
विभाग का लक्ष्य है कि 15 अगस्त 2026 तक अधिक से अधिक चालक इस प्रशिक्षण को पूरा करें। अभियान का विस्तार जारी है और राज्य सरकार इसे भाषाई समावेश की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मान रही है।