महाराष्ट्र सरकार का नया आदेश: रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य, यूनियन का विरोध

Click to start listening
महाराष्ट्र सरकार का नया आदेश: रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य, यूनियन का विरोध

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने 1 मई 2026 से सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस फैसले पर यूनियन ने कड़ा विरोध जताया है।

Key Takeaways

  • 1 मई 2026 से मराठी भाषा का ज्ञान ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए अनिवार्य होगा।
  • लाइसेंस रद्द करने की सख्त नीति लागू की जाएगी।
  • यात्रियों के साथ बेहतर संवाद के लिए यह कदम उठाया गया है।
  • यूनियन ने सरकार के निर्णय का विरोध किया है।
  • चालकों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन की आवश्यकता है।

मुंबई, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 1 मई 2026 से, यानी महाराष्ट्र दिवस से, राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य होगा।

इस नियम के अंतर्गत चालकों को मराठी पढ़ने, लिखने और बोलने में सक्षम होना आवश्यक है। यदि कोई चालक इस भाषा में बुनियादी दक्षता नहीं दिखा सके, तो उसके लाइसेंस को रद्द किया जा सकता है। परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से राज्य भर में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें चालकों की मराठी भाषा की जांच की जाएगी। यह कदम यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और स्थानीय भाषा के सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में कार्यरत चालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए, ताकि मुसाफिरों की सुविधा में कोई कमी न आए और गलतफहमियाँ न हों। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम मोटर वाहन नियमों के तहत आता है और इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित किया जाएगा।

इस निर्णय पर महाराष्ट्र ऑटोरिक्शा चालक-मालक संघटना संयुक्त कृती समिती ने तीव्र विरोध व्यक्त किया है। संगठन के अध्यक्ष शशांक राव ने कहा कि हम सरकार के इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हैं। उन्होंने इसे चालकों पर एक अनुचित बोझ बताया और सरकार से पुनर्विचार की मांग की।

शशांक राव ने आगे कहा, “हमारा संगठन परिवहन मंत्री के उस निर्णय का विरोध करता है, जिसमें 1 मई 2026 से लाइसेंस प्राप्त रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है।”

संगठन का कहना है कि कई चालक अन्य राज्यों से आकर महाराष्ट्र में कार्यरत हैं। उन्हें इतनी कम अवधि में नई भाषा सीखने का दबाव उनके जीवनयापन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

साथ ही, यूनियन ने सरकार से यह अपील की है कि चालकों को पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस नियम का पालन कर सकें। संगठन ने विरोध जताते हुए कहा कि मराठी भाषा सीखना आवश्यक हो सकता है, लेकिन अचानक से सख्ती और लाइसेंस रद्द करने की धमकी से चालकों में आक्रोश फैल गया है।

Point of View

लेकिन इसे लागू करने में चालकों की चिंताओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नए नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध हों।
NationPress
19/04/2026

Frequently Asked Questions

कब से रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य होगी?
1 मई 2026 से सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य होगा।
इस निर्णय का विरोध क्यों हो रहा है?
यूनियन का कहना है कि इस निर्णय से चालकों पर अनुचित बोझ पड़ेगा और उन्हें नई भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया है।
क्या चालकों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है?
यदि कोई चालक मराठी भाषा में बुनियादी दक्षता नहीं दिखा पाता, तो उसके लाइसेंस को रद्द किया जा सकता है।
सरकार ने इस कदम का उद्देश्य क्या बताया है?
सरकार का उद्देश्य यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और स्थानीय भाषा के सम्मान को बढ़ावा देना है।
क्या चालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा?
यूनियन ने सरकार से अपील की है कि चालकों को पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।
Nation Press