महाराष्ट्र: 15 अगस्त के बाद गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी प्रमाणपत्र अनिवार्य, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के परिवहन विभाग ने राज्य में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले गैर-मराठी चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 अगस्त 2025 के बाद जिन चालकों के पास आधिकारिक मराठी भाषा प्रमाणपत्र नहीं होगा, उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश 19 जून 2025 को मुंबई से जारी किया गया।
पाठ्यक्रम और समय-सीमा
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मार्गदर्शन में लागू इस पहल के तहत 1 जून से 15 अगस्त के बीच सभी गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए चार घंटे का 'मराठी भाषा संचार पाठ्यक्रम' पूरा करना अनिवार्य किया गया है। यह प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क है और अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र — विशेषकर मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) — में बड़ी संख्या में उत्तर भारत, राजस्थान और अन्य राज्यों से आए चालक ऑटो-टैक्सी सेवाओं में कार्यरत हैं। यह नीति ऐसे समय में आई है जब राज्य में मराठी भाषा के संरक्षण को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
अधिकृत प्रशिक्षण संस्थाएँ
इस कार्यक्रम के लिए महाराष्ट्र राज्य मराठी भाषा विभाग, कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ को अधिकृत विशेषज्ञ संस्थाओं के रूप में नियुक्त किया गया है। परिवहन विभाग केवल इन्हीं संस्थाओं द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को मान्यता देगा।
कोंकण मराठी साहित्य परिषद के लगभग 4,500 शिक्षक इस प्रशिक्षण अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र में करीब 71 अध्ययन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं और सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) चालकों को आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
उद्देश्य और सरकार का रुख
परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त रवि गायकवाड़ के अनुसार, इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करना, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना और चालकों के पेशेवर अवसरों को बढ़ाना है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि सभी चालकों को समय रहते नि:शुल्क प्रशिक्षण का लाभ उठाकर प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है।
आम चालकों पर असर
यह नीति उन हज़ारों गैर-मराठी चालकों को सीधे प्रभावित करती है जो MMR और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में आजीविका के लिए ऑटो-टैक्सी सेवाओं पर निर्भर हैं। मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होने से यात्रियों और चालकों के बीच दैनिक संवाद अधिक प्रभावी होगा।
आगे क्या होगा
15 अगस्त 2025 की समय-सीमा के बाद परिवहन विभाग बिना प्रमाणपत्र वाले चालकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि 71 अध्ययन केंद्र और 4,500 शिक्षक ढाई महीने की छोटी समय-सीमा में सभी पात्र चालकों तक पहुँच पाते हैं या नहीं।