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महाराष्ट्र: 15 अगस्त के बाद गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी प्रमाणपत्र अनिवार्य, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई

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महाराष्ट्र: 15 अगस्त के बाद गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी प्रमाणपत्र अनिवार्य, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों को 15 अगस्त तक मराठी भाषा प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर दिया है। 71 केंद्रों पर नि:शुल्क प्रशिक्षण जारी है, 4,500 शिक्षक तैनात हैं — लेकिन ढाई महीने की समय-सीमा में हज़ारों चालकों तक पहुँचना असली चुनौती है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा प्रमाणपत्र अनिवार्य किया।
1 जून से 15 अगस्त 2025 के बीच चार घंटे का 'मराठी भाषा संचार पाठ्यक्रम' पूरा करना ज़रूरी है।
प्रशिक्षण नि:शुल्क ; महाराष्ट्र राज्य मराठी भाषा विभाग , कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ अधिकृत संस्थाएँ।
MMR में 71 अध्ययन केंद्र सक्रिय; 4,500 शिक्षक प्रशिक्षण में जुटे।
15 अगस्त के बाद बिना प्रमाणपत्र वाले चालकों पर दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र सरकार के परिवहन विभाग ने राज्य में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले गैर-मराठी चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 अगस्त 2025 के बाद जिन चालकों के पास आधिकारिक मराठी भाषा प्रमाणपत्र नहीं होगा, उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश 19 जून 2025 को मुंबई से जारी किया गया।

पाठ्यक्रम और समय-सीमा

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मार्गदर्शन में लागू इस पहल के तहत 1 जून से 15 अगस्त के बीच सभी गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए चार घंटे का 'मराठी भाषा संचार पाठ्यक्रम' पूरा करना अनिवार्य किया गया है। यह प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क है और अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र — विशेषकर मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) — में बड़ी संख्या में उत्तर भारत, राजस्थान और अन्य राज्यों से आए चालक ऑटो-टैक्सी सेवाओं में कार्यरत हैं। यह नीति ऐसे समय में आई है जब राज्य में मराठी भाषा के संरक्षण को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

अधिकृत प्रशिक्षण संस्थाएँ

इस कार्यक्रम के लिए महाराष्ट्र राज्य मराठी भाषा विभाग, कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ को अधिकृत विशेषज्ञ संस्थाओं के रूप में नियुक्त किया गया है। परिवहन विभाग केवल इन्हीं संस्थाओं द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को मान्यता देगा।

कोंकण मराठी साहित्य परिषद के लगभग 4,500 शिक्षक इस प्रशिक्षण अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र में करीब 71 अध्ययन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं और सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) चालकों को आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

उद्देश्य और सरकार का रुख

परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त रवि गायकवाड़ के अनुसार, इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करना, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना और चालकों के पेशेवर अवसरों को बढ़ाना है।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि सभी चालकों को समय रहते नि:शुल्क प्रशिक्षण का लाभ उठाकर प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है।

आम चालकों पर असर

यह नीति उन हज़ारों गैर-मराठी चालकों को सीधे प्रभावित करती है जो MMR और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में आजीविका के लिए ऑटो-टैक्सी सेवाओं पर निर्भर हैं। मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होने से यात्रियों और चालकों के बीच दैनिक संवाद अधिक प्रभावी होगा।

आगे क्या होगा

15 अगस्त 2025 की समय-सीमा के बाद परिवहन विभाग बिना प्रमाणपत्र वाले चालकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि 71 अध्ययन केंद्र और 4,500 शिक्षक ढाई महीने की छोटी समय-सीमा में सभी पात्र चालकों तक पहुँच पाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचकों की नज़र में यह प्रवासी श्रमिकों पर एक अतिरिक्त अनुपालन बोझ है जो पहले से ही कम आय में काम करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या ढाई महीने की समय-सीमा और 71 केंद्र हज़ारों चालकों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं, या यह नीति व्यवहार में दंड का औज़ार बन जाएगी। यह नीति ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में 'मराठी अस्मिता' की राजनीति चरम पर है — और इसका समय महज संयोग नहीं लगता।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी प्रमाणपत्र क्यों अनिवार्य किया गया है?
परिवहन विभाग के अनुसार, इसका उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच भाषाई बाधाओं को दूर करना, सेवा की गुणवत्ता सुधारना और चालकों के पेशेवर अवसर बढ़ाना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम दंडात्मक नहीं, बल्कि प्रेरक है।
मराठी भाषा प्रमाणपत्र कहाँ से और कैसे मिलेगा?
महाराष्ट्र राज्य मराठी भाषा विभाग, कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ — तीन अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से नि:शुल्क चार घंटे का 'मराठी भाषा संचार पाठ्यक्रम' उपलब्ध है। MMR में 71 अध्ययन केंद्र और 4,500 शिक्षक इस काम में लगे हैं।
15 अगस्त के बाद बिना प्रमाणपत्र वाले चालकों पर क्या होगा?
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 अगस्त 2025 के बाद बिना आधिकारिक मराठी प्रमाणपत्र वाले गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह नीति किन चालकों पर लागू होती है?
यह नीति महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले उन सभी गैर-मराठी चालकों पर लागू होती है जिनके पास अभी तक मराठी भाषा का बुनियादी प्रमाणपत्र नहीं है। मराठी भाषी चालक इस अनिवार्यता के दायरे से बाहर हैं।
इस अभियान की देखरेख कौन कर रहा है?
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मार्गदर्शन में यह पहल लागू हो रही है। परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त रवि गायकवाड़ MMR में अभियान का समन्वय कर रहे हैं और सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) चालकों को सहयोग दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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