महाराष्ट्र में कमर्शियल वाहन चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, 16 अगस्त 2026 से लागू होगा नया नियम
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 8 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए राज्य के सभी वाणिज्यिक यात्री वाहनों के चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य कर दिया। यह नियम 16 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा और इसके लिए महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 4, 22, 78 और 85 में संशोधन किया गया है।
मुख्य घोषणा और कानूनी आधार
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को राज्य विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में इस फैसले की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस आशय की आधिकारिक अधिसूचना 8 जुलाई 2026 को ही जारी कर दी गई है। यह निर्णय राज्य में कार्यरत टैक्सी, ऑटोरिक्शा और अन्य सभी श्रेणियों के कमर्शियल पैसेंजर वाहन चालकों पर लागू होगा।
सरकार की मंशा और तर्क
सदन को संबोधित करते हुए सरनाईक ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का उद्देश्य गैर-स्थानीय कामगारों को हाशिये पर धकेलना नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र ने हमेशा देश के हर कोने से रोज़गार की तलाश में आने वाले लोगों का स्वागत किया है, लेकिन राज्य के लोगों से संवाद के लिए मराठी का पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है।' मंत्री ने तर्क दिया कि चालक और यात्री के बीच स्पष्ट संवाद से गलतफहमियाँ घटती हैं, आपात स्थिति में त्वरित सहायता संभव होती है और सार्वजनिक परिवहन पर नागरिकों का भरोसा मजबूत होता है।
प्रशिक्षण अभियान और बुनियादी ढाँचा
इस बदलाव को सुगम बनाने के लिए परिवहन विभाग ने पिछले कुछ महीनों में राज्यभर में व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार की है। राज्य मराठी भाषा विभाग, उद्योग मंत्री उदय सामंत, कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के सहयोग से एक विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है। हजारों अनुभवी भाषा शिक्षकों को इस अभियान से जोड़ा गया है और प्रशिक्षण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) तथा विशेष केंद्रों के माध्यम से दिया जा रहा है।
चालकों की कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण का समय लचीला रखा गया है। सरकार ने जटिल व्याकरण की बजाय एक व्यावहारिक पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसमें रोज़मर्रा के परिवहन से जुड़े शब्द, दिशा-निर्देश, किराया तय करना, बिलिंग और यात्रियों से विनम्र संवाद शामिल हैं। महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों के साथ बेहतर संवाद के लिए विशेष मॉड्यूल भी तैयार किए गए हैं।
अध्ययन सामग्री और सहायता
प्रशिक्षण को सुलभ बनाने के लिए चित्रयुक्त पुस्तिकाएँ, ऑडियो-वीडियो सामग्री और सरल प्रशिक्षण किट तैयार की गई हैं। वाहन खराब होने, चिकित्सा आपातकाल या दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में उपयोगी भाषिक वाक्यांश भी पाठ्यक्रम में शामिल हैं। सरनाईक ने वाणिज्यिक वाहन चालकों, वाहन मालिकों, परिवहन यूनियनों और आम नागरिकों से नए नियमों के पालन में सहयोग की अपील की।
आगे की राह
सरकार इस पहल को कार्यस्थल पर सांस्कृतिक समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है। यह नियम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में भाषाई पहचान और प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज़ हुआ है। 16 अगस्त 2026 की समय-सीमा को देखते हुए आने वाले हफ्तों में प्रशिक्षण अभियान की गति और तेज़ होने की उम्मीद है।