महाराष्ट्र: कक्षा 1 से 10 तक मराठी की अनिवार्यता पर उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के विद्यालयों में कक्षा एक से 10वीं तक मराठी भाषा को अनिवार्य बनाया गया है। लेकिन जो स्कूल इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय सरकार ने लिया है।
इस संदर्भ में, स्कूल शिक्षा विभाग ने एक विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की है और इस पर एक सरकारी निर्णय (जीआर) भी जारी किया गया है। सरकारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मराठी एक अनिवार्य विषय है। यह नियम 'महाराष्ट्र अनिवार्य शिक्षण और मराठी भाषा अधिगम अधिनियम, 2020' के लागू होने के बाद से लागू हुआ है।
यदि कोई स्कूल इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे पहले नोटिस दिया जाएगा और 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण आवश्यक होगा। अगर संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है, तो संबंधित विद्यालय प्रबंधन पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, अगले शैक्षणिक वर्ष से मराठी विषय को अनिवार्य रूप से लागू करने के आदेश भी दिए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, संबंधित विद्यालय को इस निर्णय के खिलाफ 30 दिनों के भीतर अपील करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। यदि अपील के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो विद्यालय की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अंतिम निर्णय स्कूल शिक्षा आयुक्त स्तर पर सुनवाई करने के बाद तीन महीने के भीतर लिया जाएगा। विभाग ने बताया है कि यह निर्णय राज्य के सभी विद्यालयों में मराठी भाषा के प्रभावी शिक्षण को सुनिश्चित करने में सहायता करेगा।
हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार ने टैक्सी एवं ड्राइवरों के लिए भी मराठी भाषा को अनिवार्य किया है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा है कि ये सभी कदम गरीब लोगों को परेशान करने के लिए उठाए गए हैं। उनका कहना है कि ये नियम क्यों अभी लागू किए जा रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि यह रिक्शावालों और टैक्सीवालों से पैसे वसूलने का एक तरीका है।