19 अगस्त 2026
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मराठी अनिवार्यता पर रामदास आठवले का विरोध: 'रोजगार की शर्त बनाना मुंबई की भावना के खिलाफ'

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मराठी अनिवार्यता पर रामदास आठवले का विरोध: 'रोजगार की शर्त बनाना मुंबई की भावना के खिलाफ'

सारांश

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने महाराष्ट्र के उस नए नियम पर आपत्ति जताई है जिसके तहत रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य की गई है। उनका कहना है कि भाषा न जानने पर लाइसेंस रद्द करना मुंबई की समावेशी पहचान के खिलाफ है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 19 अगस्त 2026 को रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता के नियम का विरोध किया।
महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम-2026 के तहत मराठी न जानने वाले चालकों को पहले एक महीने का नोटिस देने का प्रावधान किया है।
नोटिस के बाद भी अनुपालन न होने पर लाइसेंस तीन महीने तक निलंबित और अंततः स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।
आठवले ने कहा कि भाषा को रोजगार की शर्त या दंड का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने मराठी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए मुंबई की विविधता और समावेशिता को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया।

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 19 अगस्त 2026 को मुंबई में रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले का कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी गरीब कामगार की रोजी-रोटी महज भाषा न जानने के कारण छीनना मुंबई की समावेशी आत्मा के विरुद्ध है।

आठवले का रुख: भाषा सम्मान, रोजगार पर रोक नहीं

आठवले ने कहा, 'मुझे मराठी भाषा पर बहुत गर्व है और मेरा दृढ़ता से मानना है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी जरूर सीखनी चाहिए, क्योंकि यह इस राज्य की आत्मा और हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है। लेकिन इसके साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि मुंबई सिर्फ एक राज्य की राजधानी नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक राजधानी और एक तेजी से उभरता हुआ वैश्विक शहर है।'

उन्होंने आगे कहा कि मुंबई की असली पहचान इसकी विविधता और हर किसी को खुले दिल से अपनाने की क्षमता में निहित है। देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से लोग अपने सपने और उम्मीदें लेकर इस शहर में आते हैं।

महाराष्ट्र सरकार का संशोधित नियम क्या है

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम-1988 के तहत महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम-2026 लागू करने का आधिकारिक शासनादेश जारी किया। इन संशोधित नियमों के अनुसार जिन चालकों के पास मराठी का व्यावहारिक ज्ञान नहीं होगा, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा।

यदि चालक नोटिस अवधि में मराठी सीखने में असफल रहता है तो उसके लाइसेंस का प्राधिकरण तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है। निलंबन के बाद भी अनुपालन न होने पर ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।

आठवले की मुख्य आपत्ति

आठवले ने कहा, 'वैश्विक और समावेशी वास्तविकता को देखते हुए रोजगार या ऑटो-रिक्शा परमिट के लिए मराठी अनिवार्य करने जैसे सख्त कानून थोपना अनुचित लगता है। किसी गरीब कामगार की रोजी-रोटी सिर्फ इसलिए छीन लेना या उसे परेशान करना, क्योंकि उसे स्थानीय भाषा पूरी तरह नहीं आती, मुंबई की मूल भावना के खिलाफ है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाषा का सम्मान और प्रसार जरूरी है, लेकिन उसे रोजगार की शर्त या दंड का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम होनी चाहिए, विभाजन का नहीं।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में भाषाई अस्मिता और प्रवासी मजदूरों के अधिकारों को लेकर बहस तेज है। गौरतलब है कि मुंबई में लाखों प्रवासी चालक ऑटो-रिक्शा और टैक्सी सेवाओं की रीढ़ हैं। आठवले के बयान से यह विवाद राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है, और आने वाले दिनों में महाराष्ट्र सरकार पर इस नियम की समीक्षा का दबाव बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब लाखों प्रवासी चालक शहर की परिवहन व्यवस्था की धुरी हैं। बिना व्यापक भाषा-प्रशिक्षण ढाँचे के यह नियम समावेश के बजाय बहिष्करण का हथियार बन सकता है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम-2026 में मराठी अनिवार्यता का प्रावधान क्या है?
इस नियम के तहत जिन ऑटो-रिक्शा व टैक्सी चालकों को मराठी का व्यावहारिक ज्ञान नहीं है, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। नोटिस के बाद भी मराठी न सीखने पर लाइसेंस तीन महीने तक निलंबित और अंततः स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।
रामदास आठवले ने इस नियम का विरोध क्यों किया?
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का कहना है कि भाषा न जानने के कारण किसी गरीब कामगार की रोजी-रोटी छीनना मुंबई की समावेशी भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम होनी चाहिए, न कि रोजगार की शर्त।
क्या आठवले मराठी भाषा के विरोधी हैं?
नहीं। आठवले ने स्पष्ट कहा कि उन्हें मराठी पर गर्व है और महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखनी चाहिए। उनकी आपत्ति भाषा से नहीं, बल्कि उसे रोजगार की अनिवार्य शर्त बनाने से है।
इस नियम से मुंबई के कितने चालक प्रभावित हो सकते हैं?
स्रोत में सटीक संख्या नहीं दी गई है, लेकिन मुंबई में बड़ी संख्या में प्रवासी चालक ऑटो-रिक्शा और टैक्सी सेवाएँ चलाते हैं जो अन्य राज्यों से आए हैं और जिन्हें मराठी का सीमित ज्ञान हो सकता है।
यह विवाद राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
आठवले महायुति गठबंधन के एक घटक दल के नेता हैं और उनका यह बयान राज्य सरकार के नीतिगत फैसले से सीधे टकराता है। यह गठबंधन के भीतर भाषाई राजनीति को लेकर असहमति को सार्वजनिक करता है।
राष्ट्र प्रेस
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