मराठी अनिवार्यता पर संजय निरुपम का बड़ा कदम, परिवहन मंत्री को लिखी चिट्ठी

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मराठी अनिवार्यता पर संजय निरुपम का बड़ा कदम, परिवहन मंत्री को लिखी चिट्ठी

सारांश

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। मुंबई में 70%25 से अधिक चालक अन्य राज्यों से हैं और यह फैसला उनकी आजीविका पर संकट बन सकता है।

Key Takeaways

  • शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 23 अप्रैल 2025 को परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर मराठी अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग की।
  • महाराष्ट्र सरकार का यह नियम 1 मई 2025 से लागू होने वाला है, जिसके तहत रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी ज्ञान अनिवार्य होगा।
  • मुंबई में 70%25 से अधिक चालक गुजरात, उत्तर भारत, पंजाब और दक्षिण भारत से आते हैं और इस नियम से सर्वाधिक प्रभावित होंगे।
  • निरुपम ने सरकार से आग्रह किया कि टूटी-फूटी मराठी बोलने वाले चालकों को छूट दी जाए और परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
  • परिवहन मंत्री ने कहा कि मराठी राजभाषा अधिनियम के तहत 'कार्यसाधक ज्ञान' की शर्त कानूनी है, लेकिन चालकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।
  • यह विवाद भाषाई नीति और प्रवासी श्रमिकों के अधिकार के बीच व्यापक राष्ट्रीय बहस को भी जन्म दे रहा है।

मुंबई, 23 अप्रैलमराठी भाषा अनिवार्यता के विवादित फैसले के बीच शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार को कड़ी चुनौती देते हुए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने 1 मई 2025 से लागू होने वाले उस आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है, जिसके तहत रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया जाना है।

निरुपम का पत्र — क्या है मांग?

संजय निरुपम ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि यह फैसला हजारों मेहनतकश रिक्शा चालकों के मन में भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना भर रहा है। उनका तर्क है कि मराठी भाषा के प्रति सम्मान सभी के दिलों में है, लेकिन इसे परीक्षा के माध्यम से अनिवार्य बनाना चालकों की आजीविका के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

निरुपम ने सरकार से आग्रह किया कि जो चालक टूटी-फूटी या कामचलाऊ मराठी बोलने और समझने में सक्षम हैं, उन्हें इस शर्त से छूट दी जाए। उन्होंने भाषा को जबरन थोपने की बजाय प्रेम और प्रोत्साहन से सिखाने की पैरवी की।

मुंबई की बहुसांस्कृतिक पहचान पर असर

मुंबई में 70 प्रतिशत से अधिक रिक्शा और टैक्सी चालक गुजरात, उत्तर भारत, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से आते हैं। इन चालकों ने अपनी कड़ी मेहनत से इस महानगर में अपनी पहचान बनाई है और अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।

निरुपम का कहना है कि यह निर्णय न केवल इन चालकों के रोजगार पर संकट खड़ा कर सकता है, बल्कि मुंबई की यातायात व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बताया कि उनके पास कई चालकों के फोन आ रहे हैं जो अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं।

सरकार का पक्ष — क्या कहते हैं परिवहन मंत्री?

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि परिवहन विभाग पर 'मराठी राजभाषा अधिनियम' पूरी तरह लागू होता है। उनके अनुसार, नागरिकों के साथ संवाद के दौरान चालकों के पास मराठी का कम से कम 'कार्यसाधक ज्ञान' होना कानूनी रूप से आवश्यक है।

मंत्री ने कहा कि लाइसेंस, बैज और परमिट जारी करते या उनका नवीनीकरण करते समय मराठी ज्ञान की शर्त लागू की जाएगी। साथ ही, उन्होंने आश्वासन दिया कि चालकों पर अनावश्यक बोझ डाले बिना उन्हें दैनिक कामकाज में उपयोगी वाक्य और वाक्यांश सिखाए जाएंगे।

ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक प्रभाव

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में भाषाई राजनीति एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। गौरतलब है कि मराठी राजभाषा अधिनियम वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों में लागू है, लेकिन परिवहन क्षेत्र में इसे इस स्तर पर लागू करने की कोशिश पहली बार इतने व्यापक विरोध का सामना कर रही है।

अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु और कर्नाटक में भी क्षेत्रीय भाषा अनिवार्यता को लेकर विवाद उठते रहे हैं, जहां इसे प्रवासी श्रमिकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण माना गया। मुंबई की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर प्रवासी श्रमिकों पर निर्भर है, और यदि बड़ी संख्या में चालकों का लाइसेंस रद्द हुआ तो शहर की परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस दबाव के बीच अपने फैसले पर कायम रहती है या 1 मई 2025 से पहले कोई संशोधन करती है।

Point of View

इस फैसले का विरोध कर रहा है — यह राजनीतिक संकेत महत्वपूर्ण है। असली सवाल यह है कि भाषाई नीति को रोजगार नीति से अलग रखकर क्या समावेशी महाराष्ट्र की कल्पना संभव है?
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री को पत्र क्यों लिखा?
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि यह नियम हजारों प्रवासी चालकों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।
मराठी अनिवार्यता का नियम कब से लागू होगा?
महाराष्ट्र सरकार का यह नियम 1 मई 2025 से लागू होने वाला है। इसके तहत लाइसेंस, बैज और परमिट जारी करते या नवीनीकरण करते समय चालकों का मराठी ज्ञान जांचा जाएगा।
मुंबई में कितने रिक्शा-टैक्सी चालक अन्य राज्यों से हैं?
मुंबई में 70 प्रतिशत से अधिक रिक्शा और टैक्सी चालक गुजरात, उत्तर भारत, पंजाब और दक्षिण भारत से आते हैं। ये चालक अपनी मेहनत से शहर में जीवनयापन कर रहे हैं और इस नियम से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का इस मामले में क्या कहना है?
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का कहना है कि मराठी राजभाषा अधिनियम के तहत चालकों को कम से कम 'कार्यसाधक मराठी ज्ञान' होना कानूनी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चालकों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना दैनिक उपयोगी वाक्यांश सिखाए जाएंगे।
क्या मराठी भाषा अनिवार्यता से मुंबई की यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी?
विशेषज्ञों और संजय निरुपम जैसे नेताओं की चिंता है कि यदि बड़ी संख्या में चालकों का लाइसेंस नवीनीकरण रुका तो मुंबई की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। शहर की परिवहन सेवाएं काफी हद तक प्रवासी चालकों पर निर्भर हैं।
Nation Press